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मंगलवार, 12 जून 2018

1061....जी हजूरी है आज बहुत जरूरी

जय मां हाटेशवरी.....
एक वर्ष से भी कम समय है.....
लोकसभा चुनाव के लिये......
फिर शंखनाद होगा......
महाभारत से युद्ध सा माहौल बनाएंगे देश में.....
अब तो जनता भी असमंजस  में है.....
किसे वोट दें......
अगर किसी दल को वोट दें तो.....
प्रत्याशी स्थिति देखकर दल बदल देता है......
अगर किसी प्रत्याशी को वोट दें तो......
वो दूसरे दल में शामिल हो जाता है......
जीतने के बाद उसका निजी मत चलता है.....
अगर मत न दें तो....देश के साथ छल होगा.....
इस लिये अभी एक वर्ष है.....
सोच-समझकर मत करें.....
ताकि देश का भविष्य उजवल हो.....
इस आशा के साथ पेश है....कुछ पढ़े हुए लिंक....


साथ गर मेरा तुम्हे स्वीकार हो ...

है मुझे मंज़ूर हर व्योपार पर
पाँच ना हो दो जमा दो, चार हो
मौत है फिर भी नदी का ख्वाब है
बस समुन्दर ही मेरा घरबार हो
इक नया इतिहास लिख दूंगा सनम
साथ गर मेरा तुम्हे स्वीकार हो

बुद्धि का क्या अर्थ होता है?

लेकिन जो आदमी अज्ञात की तरफ यात्रा करता है,
वही परमात्मा की तरफ यात्रा करता है।
अष्ट्रावक्र महागीता-भाग-1प्र-10

जरूरी है फटी रजाई का 
घर के अन्दर ही रहना 
खोल सफेद झक्क 
बस दिखाते चलें 
धूप में सूखते हुऐ 
करीने से लगे लाईन में

घर के अन्दर
अंधेरे की
खिड़कियों को
समझाती हुई
परहेज करना
रोशनी से
फटी
रजाई ओढ़ते
आदमी का
बाहर
झाँकता चेहरा
साँस लेने के लिये

निष्ठा

उसने अनायास ही मेरे मन में
जीवन के प्रति निष्ठा रोपी है ।
हो सकता है ये बात अटपटी लगे
पर धूप ने भी अपनी मुहर लगाई है ।

नागपुर में किसे, क्या मिला?


प्रणब मुखर्जी का स्वागत करते हुए संघ प्रमुख ने भी सफाई दी। उन्होंने कहा, हम अपने इन कार्यक्रमों में हमेशा से अतिथि बुलाते आए हैं। हम उन्हें अपने कार्यक्रमों से परिचित कराते हैं और उनके विचारों को सुनते हैं। यह हमारी सामान्य परम्परा है। इसबार इस कार्यक्रम के बारे में काफी बातें हो रहीं हैं। पर सच यह है कि इससे
कोई अंतर नहीं पड़ता। संघ, अपनी जगह पर संघ है और डॉ. प्रणब मुखर्जी अपनी जगह हैं।

कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रणब दा के भीतर का राजनेता अब भी सक्रिय है। कुछ को लगता है कि वे इन सब बातों से ऊपर उठ गए हैं और ज्यादा बड़े फलक पर संवाद को बढ़ाना चाहते हैं। दो बातें इस कार्यक्रम से स्पष्ट हुईं। एक, वे संघ को अस्पृश्य नहीं मानते। दूसरे, उनका राष्ट्रवाद संघ की धारणाओं से ज्यादा व्यापक है।
दोनों पाँच हजार साल की भारतीय परम्पराओं का हवाला देते हैं। प्रणब मुखर्जी इसमें सांविधानिक-राष्ट्रवाद की भूमिका को ऊपर रखते हैं। यही विमर्श का सभ्य और सकारात्मक तरीका है।

जी हजूरी है आज बहुत जरूरी

यदि स्थाई होना हो तो
ऐसी सेवा है आवश्यक
साहब से पहले बाई साहब का
हर हुकुम मानना पड़ता है
तभी फाइल स्थाई होने की
आगे बढ़ पाती है 

प्रकृति

 मिट्टी ज़हरीली होने लगी
कहीं नहीं छोड़ा हमने प्रकृति को
अब हाल ये है की
वो दिन दूर नहीं जब
प्रकृति जर्जर होकर सच में
मर जाएगी !!

भरा शहर वीराना है

गूँगी लाशें जली ज़मीर का
हिसाब यहीं दे जाना है।
वक़्त सिकंदर सबका बैठा
जो चाहे जितना भी ऐंठा,
पिघल पिघल कर जिस्मों को
माटी ही हो जाना है।

अब बारी है....
हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम तेईसवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है

सीप


मैंने अनजाने ही भीगे बादलों से पूछा
छुआ तुमने क्या
उस सीप में मोती को
बादलों ने नकारा उसे
बोले दुहरी है अनुभूति मेरी
बहुत सजल है सीप का मोती
- रजनी भार्गव
.....................
हम आपको ये बता दें कि सीप का
नक्षत्र स्वाति से गहरा नाता है
और इस नक्षत्र में गिरे जल की एक बूंद को
सीप, मोती मे परिवर्तित कर देती है
उपरोक्त विषयों पर आप सबको अपने ढंग से
पूरी कविता लिखने की आज़ादी है


आप अपनी रचना शनिवार 16 जून 2018
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं
आगामी सोमवारीय अंक 18 जून 2018  को प्रकाशित की जाएगी ।
रचनाएँ  पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के
सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें


धन्यवाद।








   














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