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मंगलवार, 5 जून 2018

1054....कारण स्पष्ट है....... प्रकृति के साथ छेड़छाड़.....


जय मां हाटेशवरी....
स्वागत है आप सभी का......
सुन कर कुछ अजीब सा लगता है......
 हिमालय की गोद में बसे.....
शिमला में भी पानी के लिये मारामारी हो रही है.....
आंदोलन हो रहे हैं......
जाने जा रही है......
कारण स्पष्ट है.......
प्रकृति के साथ छेड़छाड़.....
 विश्व पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकृति को समर्पित दुनियाभर में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है फिर भी हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता है। यह बात चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। विश्व पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा सकारात्मक पर्यावरण कार्य हेतु दुनियाभर में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अन्योन्याश्रित संबंध है तथापि हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता पड़ रही है।

यह चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)का
आगे पढ़े....
अब पेश है..... कुछ पढ़ी हुई रचनाएं.....

रेणुबाला
Image result for रूहानी प्यार के चित्र
रूहानी प्यार --------- कविता --
  बदल जायेंगे जब -
 सुहाने ये मन के मौसम ,
 तनहाइयों में साँझ की
 घुटने लगेगा दम - 
खुद को बहलायेंगें-
इसको निहार हम !!
  इस प्यार की क्षितिज पे
  रहेंगी टंकी कहानियां  ,




आँचल पाण्डेय

बहरुपी कलयुग
झूठ,लोभ और बैर कथा से
है इसके पाप का घड़ा भरा
पर डर मत तू ए बंदे तबतक
जबतक तू सच के साथ खड़ा
जो साथ निभाए दृढ़ता से सच का
भगवन का उसको साथ मिला





रश्मि शर्मा

पत्‍थर साहि‍ब और मैग्‍नेटि‍क हि‍ल का जादू
माना जाता है कि‍ गुरु नानक देव जी नेपाल, सि‍क्‍कि‍म और ति‍ब्‍बत होते हुए यारकंद के रास्‍ते लेह से यहाँ पहुँचे। सामने की पहाड़ी पर एक राक्षस रहता था जो यहाँ के लोगों को मारकर खा जाता था। गुरुजी लोगों की पुकार सुनकर इस स्‍थान पर पहुँचे और यहाँ नदी के कि‍नारे आसन लगाया। लोगों को राहत हुई

पंकज कुमार 'साहेब'

अपने हीं लोगों में कहीं खो गए हम
घायल, रोता हुआ गिड़गिड़ाता रहा
बचते हुए सड़क पार हो गए हम।।
भगवान की दुहाई सुनाई न पड़ी
मगर फ़िल्मी गानों पे रो गए हम।।


अरमान...
My photo
चलो आज लगाएं यादों का बाज़ार
बाज़ार ए इश्क़ में बड़ी चालबाज़ी है
छूके देखिए जनाब ये आज भी ताज़ी है

ले लो सस्ती हैं, नहीं क़ीमत ज़्यादा है
ताउम्र साथ रहेंगीं 'अरमान' का वादा है...



राधा तिवारी

तालमेल
 राहें भरी है फूल से ये कौन आ रहा।
लगता यही है आज तो दिलदार आ रहे।।
सड़कों पर तो दिखते थे इंसान रात-दिन।
रातों को अब घरों में तो सियार आ रहे ।।

मेरी धरोहर

उम्मीद-ए-वफ़ा की फितरत से शर्मिंदा हूँ मैं,
ग़ज़ब कि दगा के हादसों के बाद ज़िंदा हूँ मैं,
मुहब्बत से ऐतबार उठ गया अच्छे-अच्छों का,
शिकस्त से हौसले आज़माने वाला चुनिंदा हूँ मैं,

अब चलें
हम-क़दम के बाईसवें विषय की ओर..
इस सप्ताह का विषय है
"दहलीज़"
उदाहरण
"दहलीज़"
संस्कारों की भाषा
सभ्यता की दहलीज़ लांघने से पहले
हर शब्द के आगे
एक लक्ष्मण रेखा खींच देती है
...
संवाद मन का मन से
कभी मौन रहकर,
कभी आंखों की भाषा पढ़ती आँखे
बिना कुछ कहे
कितनी ही बातों को पहुँचाते
ये मन के तार इक दूजे तक
दूरियाँ ऐसे क्षणों में बेमानी हो जाती
- सीमा "सदा" सिंघल

रचनाएँ दिनांक 09 जून शाम पाँच बजे तक स्वाकार्य
प्रकाशन तिथिः 11 जून 2018...
सभी रचनाएँ ब्लॉग सम्पर्क प्रारूप पर ही भेजें
सादर
धन्यवाद।
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