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शुक्रवार, 1 जून 2018

1050..मन में लिए, कुछ अनकही सी बात

प्रत्येक  माता-पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को लेकर सदैव चिंतित रहते हैं। 
सीबीएसई बोर्ड की दसवीं और बारहवीं का परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है। कुछ बच्चों ने 
रिकॉर्ड बनाते हुये 98℅ - 99℅ तक नं लेकर आये हैं, सभी को जीवन में सफलता के 
महत्वपूर्ण सोपान पर चढ़ने  की  हार्दिक शुभकामनाएँ, 
पर जिन बच्चों का परसेंटज मनोनुकूल नहीं आया हैंं , उनके माता-पिता और रिश्तेदारों से विनती है 
कि दूसरों के बच्चों से  अपने बच्चों का तुलनात्मक विश्लेषण कृपया न करें।उनकी कोमल मनोदशा 
को समझते हुये उनका सहारा बने उन्हें सकारात्मक रहने को प्रेरित करें।
नंबर की दौड़ में पिछड़ते बच्चों की कुंठा के लिए जिम्मेदार हमारी शिक्षा-प्रणाली में बदलाव 
की उम्मीद करना व्यर्थ है। पर आप पर निर्भर, हर बात पर आपका मुँह जोहते आपके 
बच्चों पर अपने अधूरे सपनों का बोझ न डालें।
रट्टू तोता बनते बच्चे,विषय संबंधी ज्ञान और भारी-भरकम सिलेबस में इस कदर उलझ जाते है 
कि उनका मानसिक विकास सिकुड़ कर रह जाता है।
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अपने बच्चों को ज़िंदगी में सकारात्मक रहकर कपनी क्षमता के 
अनुरुप क्रियाशीलता को बढ़ावा देकर हम उनका भविष्य गढ़ने में सहयोग कर सकते हैं।

सादर नमस्कार

चलते है आपके द्वारा सृजित रचनात्मकता के संसार में-

आदरणीय विश्वमोहन जी की लिखी अद्भुत रचना
भोर भोरैया....
हूक उठे छतिया, मसक गयी अंगिया
कसक कसक उठे, चिहुँके चिरैया

भोर भोरैया, रोये रे चिरैया
बीत गयी रैना, आये न सैंया

आदरणीया मालती जी की रचना
लेखनी स्तब्ध है
भावों का आवागमन
दिग्भ्रमित करने लगा
शब्दों के मायाजाल में
सहज मन उलझने लगा।
बढ़ गईं खामोशियाँ
जो अंतर को उकसाने लगीं

आदरणीया रेणु जी की हृदयस्पर्शी कहानी
जिद

गाँव भर में  तुम्हारे  चाल-चलन  के बिगड़ने की अफवाहे फैलती रहती थी पर तुम्हारी माँ हमेशा कहती  की तुम निर्दोष हो  | उसे हमेशा लगता रहा ,कि तुम सरल हो इस लिए अपना भला  बुरा समझ नहीं पाते | वह कहती -तुम्हे   तुम्हारे   शरारती दोस्तों के साथ खड़े होने   की सजा मिलती  है | 


🔷💠🔷

आदरणीया इन्दिरा जी की रचना
साँझ ढले

साँझ अकेली 
बैठी बैठी 
सोच रही एक ही बात 
कौन दे गया 
जाते जाते 

जीवन भर का ये अवसाद !

🔷💠🔷

आदरणीय पुरुषोत्तम जी की रचना
चराग


यूँ धू-धू कर जले, चरागों के ख्वाब,
ज्यूं चिंता में, भस्म हुए हों मरने के बाद,
मन में लिए, कुछ अनकही सी बात,
चिताओं सी दहकती, वो जलती सी रात,

बंद पलकों तले, ढ़ल गई वो भी साथ....

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और चलते-चलते आदरणीया अनीता  की लेखनी से
क्या कहूँ
मेरी फ़ोटो
क्यो अमावस्या सी ,लगे ज़िंदगी..!
हर रात स्याह ,अंधेरी है।
तुम्हारे लिहाफ में ,छुपी नींदें
क्यो मेरी आंखें रतजगी वीरानी है
क्यो अमावस्या सी ,लगे ज़िंदगी..!
हर रात स्याह ,अंधेरी है।
तुम्हारे लिहाफ में ,छुपी नींदें

क्यो मेरी आंखें रतजगी वीरानी है

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आपके द्वारा सृजित रचनाओं का संसार कैसा लगा
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में



श्वेता सिन्हा


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