सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
बेटियों को प्यार करना स्वाभाविक है
गर्भनाल का रिश्ता है
क्या समधन की बेटी को स्वाभाविक प्यार मिलता है!
आज हम बातें कर लेते हैं उनकी जो सजाती हैं
घर आँगन ड्योढ़ी को और उन्हें पुकारते हैं
क्यों लादे इतने नियम,क्यूँ छीनी आजादी,
घर छूटा, माँ-बाप छूटे,भाई-बहन,सहेलियां छूटी,
आजादी छीनी घूमने की,कही आने-जाने की,
पहनने की,हँसने-बोलने की,
नौकरी करने की,निर्णय लेने की,
बहुएं आपके परिवार का हिस्सा है कामवाली नहीं: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट के इस बयान के बाद देश के कई हिस्सों से महिलाओं ने इसका मजबूती के साथ सर्मथन किया है। कई महिलाओं ने कहा कि इस बयान से उन्हें काफी खुशी हुई क्योंकि इस बार भी हमेशा की तरह सुप्रीम कोर्ट उनके साथ खड़ा नजर आया।
रेशम की तरह, आपस में उलझा हुआ। जिसे आसानी से सत्य या असत्य करार दे देना,
बहू/बेटी/ माँ/सास की कोमल भावनाओं पर कुठाराघात होगा,
क्योंकि यह कथनना तो पूर्णतः सत्य है ना ही असत्य।
इसे समझने हेतु आइये जरा अपने दृष्टिकोण को विस्तृत रूप प्रदान करते हैं।
कारण कि इनके मध्य जो विभाजन रेखा है वह कर्त्तव्य
व अधिकार की प्राथमिकता से पृथकता प्राप्त करती है
मेरे सम्मुख अब बोलने को कुछ न था शायद इसीलिए मेरे मुख से निकला-“भाभी अब कैसी हो। चाय पी लो फिर चलती हूँ।”
“जीजी पहले आप चाय पी लो ।ऑफिस से आने के बाद आपने भी तो नही पी।”
और अब मैं भाभी के प्यार के सामने खुद को बौना पाने लगी।
प्रभा पर वज्र-सा गिर पड़ा—उसके हृदय के टुकड़े हो गये—सारी आशाओं पर पानी फिर गय। उसका निर्बल शरीर इस आघात का सहन न कर सका। उसे ज्वर आने लगा। और किसी को उसके जीवन की आशा न रही। वह स्वयं मृत्यु की अभिलाषिणी थी और मालूम भी होता था कि मौत किसी सर्प की भांति उसकी देह से लिपट गई है। लेकिन बुलने से मौत भी नही आती। ज्वर शान्त हो गया और प्रभा फिर वही आशाविह विहीन जीवन व्यतीत करने लगी
><
फिर मिलेंगे....
हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम अट्ठारहवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है
इंतजार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब, वफ़ा, नशा
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई सरेआम हुई
उपरोक्त दो पंक्तियों
को आधार मान कर रचना लिखनी है
सबको अपने ढंग से पूरी कविता लिखने की आज़ादी है
रचनाकारः रोहिताश घोड़ेला
आप अपनी रचना शनिवार 12 मई 2018
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी
सोमवारीय अंक 14 मई 2018 को प्रकाशित की जाएगी ।
रचनाएँ पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें
