हम सभी तप रहे हैं गर्मी में
अचानक फोन आया भाई कुलदीप का
मैं शिमला में हूँ....
तपन और बढ़ गई...
अचानक फोन आया भाई कुलदीप का
मैं शिमला में हूँ....
तपन और बढ़ गई...
सादर अभिवादन....
आज की पढ़ी रचनाओं की ओर....
काफी दिनों के बाद रेवा दीदी की ताजी रचना मिली
जब ब्याह हो जाता है
अपना दिल जान सब
न्यौछावर कर देती है स्त्री,
पर जब उसे वो मिलता नही
जो वो चाहती है
जो सबसे कीमती है उसकी नज़र में
तो उदास हो जाती है अंदर से ,
गूगल प्लस में एक रचना मिली
सखी कल्पना जी ब्लाग नहीं लिखती
सो हम उस रचना को विविधा के माध्यम से पढ़वा रहे हैं
सखी कल्पना जी ब्लाग नहीं लिखती
सो हम उस रचना को विविधा के माध्यम से पढ़वा रहे हैं

हिज्र पल-पल यूँ सताता हैं कि हमको,
मुस्कुराये इक ज़माना हो गया है।
सोचते हैं इन दिनों हम भी कहें कुछ,
सबकी सुनते इक ज़माना हो गया है।
भाई पंकज भूषण दी एक कड़ुआ सच सामने ले आए है

फ़टे कपड़ों में भी शर्म छुपाते हैं गरीब
हमने अमीरों को हया लुटाते देखा है।
गरीब तो मुफ़्त में ही बदनाम है प्रियम
अमीरों को भी फ़टे कपड़ों में देखा है।
एक मार्मिक रचना सखी इन्दिरा दी की कलम से

वादे सबा तो छू कर चलदी
कुछ लेकर कुछ दे कर चल दी
यादों का गमगीन पिटारा
था आंसुओं से भरा भरा !
उलूक के पन्ने से.....डॉ. सुशील जोशी
कबाड़ी का
सौंदर्य बोध
तो कबाड़
होता है
कहीं भी
पड़ा रहे
कबाड़ी
के लिये
बस वो
ही तो
श्रंगार
होता है
उलूक के पन्ने से.....डॉ. सुशील जोशी
कबाड़ी का
सौंदर्य बोध
तो कबाड़
होता है
कहीं भी
पड़ा रहे
कबाड़ी
के लिये
बस वो
ही तो
श्रंगार
होता है
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हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम अट्ठारहवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है
इंतजार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब, वफ़ा, नशा
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई सरेआम हुई
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई सरेआम हुई
को आधार मान कर रचना लिखनी है
सबको अपने ढंग से पूरी कविता लिखने की आज़ादी है
रचनाकारः रोहिताश घोड़ेला
आप अपनी रचना शनिवार 12 मई 2018
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी
सोमवारीय अंक 14 मई 2018 को प्रकाशित की जाएगी ।
रचनाएँ पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें
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फिलहाल के लिए
यशोदा
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