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गुरुवार, 3 मई 2018

1021....लू के गरम थपेड़े खाकर, अपना “रूप” दिखाते हो....

सादर अभिवादन। 

कहीं बादल रहे उमड़, 
कहीं आँधी रही घुमड़।  
अब आ गयी धूप 
चुभती चिलचिलाती, 
अब सूखे कंठ से 
चिड़िया गीत न गाती।  
-रवीन्द्र 

आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-


सुनसान पलों में
जब भी झांकता पीछे,
पाता हूँ खड़े 
वे रुके हुए शब्द 
जो भटक रहे हैं
आज़ भी आँधी में




ये बेबुनियाद लम्हें 
ये सरकती सी ज़िन्दगी 
पूछती सिर्फ इक सवाल 
अब किसका इन्तज़ार 
सलाम होता कुर्सी, 
जवानी व पैसे को, 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


अरुणलालिमा जैसा तुमने,
अपना भेष बनाया है,
प्यारे-प्यारे फूलों से,
सबका ही मन भरमाया है,
लालरंग संकेत क्रोध का,
मगर प्यार दिखलाते हो?
लू के गरम थपेड़े खाकर,
अपना “रूप” दिखाते हो।।



मेरी फ़ोटो

मुझे पता है कि सोने में तौल देगा मुझे,
मगर ज़मीर की फटकार, मुझको रोके है.



Painted stork

कठसारंग तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाला स्टोर्क परिवार का एक बड़ा पक्षी है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में हिमालय के दक्षिण में उष्णकटिबंधीय एशिया के जलमय भूमि में पाया जाता है और  एशिया के दक्षिणपूर्व तक फैला हुआ है।

चलते-चलते आनन्द लीजिये आदरणीया अपर्णा बाजपेयी 
के स्वर में उनकी  गंभीर रचना का -

हिंदी कविता - दुनिया का सच.... अपर्णा बाजपेयी 


हम-क़दम के सत्रहवें क़दम
का विषय...


⚫⚫

मिलते हैं फिर अगले गुरूवार। 
कल आ रही है आदरणीया श्वेता सिन्हा जी की प्रस्तुति।

रवीन्द्र सिंह यादव  

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