अच्छे होते हैं ..
बुरे लोग....!!!
जो अच्छा होने का
नाटक तो नहीं करते.
सादर अभिवादन....
चलते हैं देखने आज की चुनिन्दा रचनाएं...
आप कुछ सवालों के
जवाब देकर पैसे कमा सकते हैं।
काट रही हूँ धीरे धीरे
जिससे प्यार सिर्फ प्यार रहे
न किसी को साधे न किसी को बांधे
न सधे न बंधे कभी किसी बंधन में
तुझे और मुझे
फिर हर खेत
में कबूतरों की
फूल मालाऐं
पहने हुऐ रंग बिरंगे
पुतले नजर आयेंगे
ले अक्षत व डोरी
ताके ड्योढ़ी
फूल एक उपवन के
सींचा और सँवारा
माली ने
एक समान हमे
आज
भरा जीवन हम में
अब आज्ञा दें यशोदा को
फिर मिलते हैं..
फिर मिलते हैं..




