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शनिवार, 13 जून 2026

4772...मातु बिना जग सूना लागहि, अब कौन बुलाये मुझको लाल...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय अशर्फी लाल मिश्र जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

शनिवारीय अंक में पढ़िए ब्लॉगर डॉट कॉम पर प्रकाशित रचनाएँ-

भार्गव राम खण्डकाव्य - 22

मन में राम अब क्या है इच्छा,

अब शीघ्र मांगो दूजा वरदान।

मातु बिना जग  सूना  लागहि,

अब कौन बुलाये मुझको लाल।।

*****

पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना 

जाने कब, कहाँ, किस राह से तुम गुजरो

हर राह में बेसब्र बिखरने लगा है आईना

.

उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह

रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना

*****

'' वर्ण के मुहावरों की कविता (5) | हिंदी मुहावरा-माला।

युद्ध में खून की नदी बहाना और खून-खच्चर होना तबाही लाता है,

मासूमों का खून जिसकी गर्दन पर होवह नरक का भागी कहलाता है।

 

ज़ालिम किसी का खून पीता हैगरीबों का खून चूसता है जो,

उसका खून ठण्डा/सर्द होना तय हैचाहे जितना भी उबलता हो।

*****

खबर 

कोई कर्ज में डूबा किसान

या,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी

लेता है जब खुदकुशी का निर्णय

आसान  तो नहीं होता .......

खुदकुशी थी वो,या मार डाला गया

समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने,

दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई

वो तो खडा बस यहाँ एक साए-सा।

*****

शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति को पहचानो: सतीश सक्सेना 

यानी लड़ाई वैक्सीन ने नहीं, बल्कि शरीर ने लड़ीकोरोना संक्रमण हुआ, और शरीर के अंदर की सेना  टी सेल, बी सेल, एंटीबॉडी और मेमोरी सेल इन सबने मिलकर वायरस को पहचानकर खत्म किया।

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 


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