अब वह सोच रहा था कि इस पत्र का क्या करे? पहले मन किया कि वह पत्र को फाड़ कर डस्टबिन के हवाले कर दे. फिर विचार आया ... नहीं, यह भागना होगा. जवाब लिखना चाहिए, और शगुन को सब कुछ समझा देना चाहिए. पर कैसे? उसे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा था. वह लिखे क्या? आखिर विचार आया अभी कुछ मत करो. वह उठा और उसने पत्र को सूटकेस में सबसे नीचे दबा कर रख दिया. जैसे किसी राज को दफ्न कर दिया हो. उसने महसूस किया उसका गला सूख रहा है. उसने अपनी बोतल उठाई और एक साँस में उसे मुहँ के जरीए अपने पेट में उड़ेल लिया
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सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर वंदन
सुन्दर संचय
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार. सादर अभिवादन
जवाब देंहटाएंसुंदर अंक
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार, बस ऐसे ही साहस बढ़ाते रहें.
जवाब देंहटाएंआप का हार्दिक आभार .........
जवाब देंहटाएंसुंदर अंक प्रिय श्वेता
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