।।शुभ वंदन।।
समकालीन परिस्थितियों को परिलक्षित करती
दिनकर जी के शब्द..
दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी
यदि बाधा हो
तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो
अपनी धरती तमाम
हम वहीँ खुशी से खायेंगे,
परिजन पे असी ना उठाएंगे
रश्मिरथी/तृतीय सर्ग /भाग 3 /
यदि बाधा हो
तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो
अपनी धरती तमाम
हम वहीँ खुशी से खायेंगे,
परिजन पे असी ना उठाएंगे
रश्मिरथी/तृतीय सर्ग /भाग 3 /

(सितम्बर 23, 1908 – अप्रैल 24, 1974)
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर शत शत नमन..
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर शत शत नमन..
पॉक्सो एक्ट में किए गए संशोधन के अंतर्गत 12 वर्ष से कम की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने पर अब मौत की सजा स्वागत योग्य के साथ विचारणीय भी है।
आज की लिंकों पर नज़र डालते है..✍
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ब्लॉग "यथार्थ " सच की बात, विक्रम जी के साथ..
अपना घर कोई बनाना हो
या कहीं दूर घूमने जाना हो
कोई दुःख की बात हो
या कोई जश्न मनाना हो
मुझे हर बात के लिये लड़ना पड़ा है
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ब्लॉग ''अब छोड़ो भी" से..
...और अंतत: दुष्कर्मियों के लिए फांसी का प्रावधान हो ही गया, फांसी
अर्थात् अपराधशास्त्र और दंडनीति के अनुसार सजा का अंतिम अस्त्र।
कठुआ, उन्नाव और सूरत में बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वालों का
उदाहरण सामने रखते हुए कल केंद्र सरकार ने अपनी कैबिनेट मीटिंग में
बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों के लिए
फांसी की सज़ा..
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ब्लॉग " मेरी अभिव्यक्तियाँ " से..
कब खोया तुम्हे
जो तुम्हे 'मिस करूँ'
साथ ही तो रहते हो,
खाते हो,टहलते हो,
सोते हो,,,,
लगता ही नही तुम
अब मुझसे दूर रहते हो!!!!
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ब्लॉग "ज़िन्दगीनामा" से..
से बढ़ रहे है और मेरी निजी
जिंदगी में दखल डालकर ज्ञानी बन रहे है और प्रमाणपत्र बाँट रहे है
निवेदन है सभ्य भाषा मे कि सीमा मतलब औकात में रहें, आप जो
भी हो प्रशासनिक अधिकारी, मास्टर, लेखक , डाक्टर, वकील, बाबू, वैज्ञानिक ,
पत्रकार, दोस्त या कोई ऐरे गैरे नत्थू खैरे
हजार बार कह चुका हूँ
कि फेसबुक पर अरबों खाते है और यहाँ मैं आपसे पीले चावल देकर
विनती नही कर रहा कि ये सब पढ़े
और कमेंट करें..
🔵
ब्लॉग क्षितिज से..
जिसने उसके मन में झाँका,
जागी थी जैसे तू कपलायिनी --
ऐसे कोई नहीं जागा !!
पति प्रिया से बनी पति त्राज्या--
सहा अकल्पनीय दुःख पगली,
नभ से आ गिरी धरा पे-
नियति तेरी ऐसी बदली ;
वैभव से बुद्ध ने किया पलायन
तुमने वैभव में सुख त्यागा |
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ब्लॉग " एक बोर आदमी का रोजनामचा" से..
मेरा महबूब एक साथ चाँदऔर गुले रातरानी है
होगा वो तुम्हारे ज़ालिम या फिर होगा क़ातिल
मेरे लिए तो साँस दर साँस है मेरी ज़िंदगानी है
इसी साथ आज की प्रस्तुति
यहीं तक कल फिर एक नई लिंकों के साथ..
यहीं तक कल फिर एक नई लिंकों के साथ..
।।इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍




































