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शनिवार, 19 सितंबर 2026

4870 ...बिना बातों के, जीवन कैसा

 सादर अभिवादन

आज रवींद्र जी फिर भूल गए
उनका पैर शायद भूलन जड़ी 
पर पड़ गया होगा
दिल्ली मे बहुतायत से पाया जाता है

देखिए रचनाएं....



दर्द लिखू या गीत लिखूं मै
मीत बता क्या रीत लिखूं मै 
सुबह - शाम की प्रीत लिखूं या 
तेरे विरह की गीत लिखूं मै
दोपहर की धूप लिखूं या 
रात की सुनी - सुनी बगिया 
अपने दिल के गीत लिखूं मैं 





सूरज कोई
आसमान से
अपने आप न आए
हम में सब में
जितना प्रकाश है
सारा बाहर जाए

सूरज बनता
किरण-किरण को
पुंज बनाने से






कर कुछ बात, ऐ उमस भरी काली रात,
बिना बातों के, जीवन कैसा,
जीवंत एहसासों बिन,आंगन कैसा,
जगाए, ऐसी ही बात!








सादर समर्पित
वंदन

5 टिप्‍पणियां:

  1. भूल को सुधारने की आपकी क़ाबिलियत का क़ाएल हूँ. विषम परिस्थिति में भी आपकी ओर से पाठकों के लिये प्रस्तुति उपलब्ध है.
    सादर आभार.
    क्षमा!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आज आराम नही न करें
      20 सितंबर की प्रस्तुति की शुरुआत करें
      वंदन

      हटाएं
  2. सुप्रभात! सुंदर प्रस्तुति, वाक़ई पाँच लिंक के प्रति आपका समर्पण नमन के योग्य है

    जवाब देंहटाएं

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