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सोमवार, 14 सितंबर 2026

4865...आपने उस दुश्मन को कैसे पछाड़ा था?

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय राहुल उपाध्याय जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच चुनिंदा रचनाएँ-

भार्गव राम खण्डकाव्य - 57

ऋषिवर!पूत हमारा अनुशासित,

सदा मातु पिता गुरु आज्ञाकारी।

गंगा  विनय  कर  रही  बार बार,

पूतहि  शिष्य बना  लो एक बार।।

*****

स्तुति

और याद है

आपने उस दुश्मन को कैसे पछाड़ा था? उस बाहुबली को कैसे मारा था?

उस दिन के तो क्या ही कहने

आप अकेले ने दस-दस को गिराया था

तो इसे तलवे चाटना कहा जाएगा

*****

याद आता है वो बचपन का स्कूल प्यारा-प्यारा | Kasturba School Reunion गीत | 2 October Alumni Meet

छूट गया वो घर और स्कूल का प्यारा मंज़र,
बीत गए पचास-साठ साल ज़िंदगी के सफ़र।
पर बचपन का वो स्कूल दिल से न उतर पाया,
वही निश्छल पुराना प्यार फिर से लौट के आया!

*****

सूफ़ीमत...11. सूफ़ियों की प्रेमोपासना-

सूफ़ी दर्शन में जीव ब्रह्म  के  गुणों का प्रतिबिंब हैऔर भाव रूप में जीव का ब्रह्म में लीन होनायही उसका सर्वोच्च ध्येय है। जीव ही नहीं जगत भी  ब्रह्म  के  गुणों का प्रतिबिंब है। जीव को  हक़  (सत्‌,  ब्रह्म) से मिलने का एक ही रास्ता हैवह है -  प्रेम (इश्क़) का। यह प्रेम शुद्ध आध्यात्मिक प्रेम होता है। अलहक्क़ के साथ एकत्व प्राप्त करना सूफ़ी साधना का चरम लक्ष्य है।  सूफ़ी संत सरमद ने सूफ़ी प्रेमोपासना का रहस्य इन शब्दों में बताया है 

मुमकिन न बुबद कि यार आयद बकिनार,

ख़ुदरा अज़ ख़्याले ख़ामो अन्देशा बरार,

हर चीज़ क़ि ग़ैर अस्त दर सीनए तुस्त,

बिसयार हिजाबेस्त मियाने तो व यार!

*****

अम्र उजाला शब्द सम्मान 2026: साहित्य की विभूतियों के सम्मान का आठवाँ पड़ाव, 30 सितंबर तक नामांकन 

भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न को सम्मानित करने वाले अमर उजाला शब्द सम्मान के अंतर्गत इस वर्ष भी दो आकाशदीप अलंकरण और पाँच श्रेष्ठ कृति सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

*****

फिर मिलेंगे।

 

रवीन्द्र सिंह यादव

 

5 टिप्‍पणियां:

  1. सूफ़ीमत...11. / अम्र उजाला शब्द सम्मान 2026 लिंक काम नहीं कर रहे हैं |

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आभार

    जवाब देंहटाएं

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