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गुरुवार, 10 सितंबर 2026

4861 घूमते घूमते भूल जाता है घूमना है उसे

सादर अभिवादन
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यदि आप 
किसी से ऐसी बात करें कि
आप कितने शक्तिशाली हैं
आपकी आँखें कितनी सुंदर हैं
आपकी भुजाओं में कितना दम है
आपके कान के तो क्या ही कहने
आपकी गर्दन तो बस देखते ही बनती है




आदमी
घूमता है तारा बन
अपने ही बनाये सौर मण्डल में

घूमते घूमते भूल जाता है
घूमना है उसे
अपने ही सूरज के चारों ओर





अगर किसी छात्र को एक कोर्स के लिए 33 अलग-अलग रीडिंग्स पढ़नी हैं, तो अलग-अलग किताबों से उन्हें इकट्ठा करने में कई महीने लग सकते हैं। मैं सारी सामग्री एक ही पैक में देकर छात्रों का काम आसान करता हूं।

उन्होंने अदालत से मांग की कि दुकान को कॉपीराइट वाली सामग्री की फोटोकॉपी करने से हमेशा के लिए रोक दिया जाए।





मेल -जोल बैठकी नदारद
बिरहा, कजरी, कव्वाली
हलुवा, पूरी के प्रसाद से
वंचित डिह, माता काली
घर में टी वी चैनल, बाहर 
बिग बजार औ मॉल बा





भावनाओं की नींद का 
अचानक टूटना 
आंखों का खुल जाना 
और खुद को पाना 
एक खुरदुरी चट्टान पर 
खिले एक ज़िद्दी फूल की तरह 
एहसास कराता है 
उस मिथ्या का 






चंचलता  चित्त  की  चमक   सुहाती
ज्योतिपुँज  की  गहराई  में  डूबी 
केसरी  कुँज   श्वेतमय   पारिजात  प्रिय
सर्मिपत  हो  जाना  पूर्ण  रुप  में
खुले  दिल  से  अपनी  सुरभि  को
लहलहाना  ,  क्षुब्ध  मन  को  मिले  जो  विश्राम 
पथिक  की आशा - निराशा अंतर्द्वंद  को  आराम


चलते -चलते एकअंतिम प्रयास
लघुकथा/कविता का चौथा अंक
नया विषयः  गणपति उत्सव, और  जगराता, व्रत  
प्रेषण तिथिः 11 सितम्बर 26
प्रकाशन तिथिः 13  सितम्बर 26


सादर समर्पित
वंदन


2 टिप्‍पणियां:

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