शीर्षक पंक्ति: आदरणीया कविता रावत जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक में पढ़िए पाँच चुनिंदा रचनाएँ-
(अंक प्रस्तुतकर्त्ता का रचनाओं की विषय-वस्तु से वैचारिक रूप से सहमत-असहमत होना ज़रूरी नहीं है बल्कि ब्लॉगर डॉट कॉम पर जो प्रकाशित हो रहा है वह पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है क्योंकि 'पाँच लिंकों का आनंद' परिवार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है।)
एक सखी कह रही सखी से,
जनक लली कर्पूर सी गौर।
राम दिख रहे कुछ काले काले,
दूजी सखी राम केश घुँघराले।।
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रहना नहीं इधर न रहो पर उधर नहीं ...
आँखों में आंसुओं का जो सैलाब है जमा,
लोगों पे
आज़माना इन्हें मेरे पर नहीं,
महसूस कर
सकोगे जो बैठोगे आस-पास,
शबनम की बूँद
हूँ मैं दहकता शरर नहीं,
'झ'
से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1)
जब उम्मीदों
पर झाड़ू फिरती, तब होश ठिकाने आता है,
जो झूठ के पुल बाँध रहा था, वह झेंप खड़ा रह जाता है।
तब अपनी ही नादानी पर, मन ही मन झख मारते हैं,
जो बैठे थे
भाग्य भरोसे, वो झक मारकर हारते हैं।
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कांधला के विश्व विख्यात पंडित व्यक्तित्व
खेतों में
ट्रैक्टर चलते देख हमने उसपर चढ़ाने की जिद की।चाचा ने कहा जाओ अंदर टेबल पर स्वीच बोर्ड है उसका हरा बटन दबा दो तब ट्रैक्टर पर चढ़ाएंगे।जब
हमने हरा बटन दबाया तो मोटर चलने की बड़ी तेज आवाज हुई। घबराकर दोनों बहनें जोर से
चीखती हुई एक-दूसरे से लिपट गई।दादाजी ने सोचा हमें करेंट लग गया। चाचा से गुस्से
से कहा-मार दिया न दोनों को?
चाचा ने जाकर जब हमें सही -सलामत देखा
तो मन बहलाने के लिए खेतों की ओर ले चले।एक खेत में घूसते ही
हमें भूतों के दर्शन होने लगे। बिना सिर बारे भूत, खेतों में
बोझ ढोते सिर्फ दो पैरों वाले भूत,खेतों में
कीचड़ से नहाये, पौधे उखाड़ते भूत। पेड़ों पर झूलते और
उछल-उछल कर चढते-उतरते हुए भूत।एक बूढ़ी खेत की क्यारी पर बैठी दो बच्चों को अपने
पास पकड़कर बैठाई थी,उनके बाहर निकले बड़े-बड़े दातों को देख
हमने उन्हें किचिन मान लिया।
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बेहतरीन अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर
वंदन
अब सिर्फ कहानी ही नहीं कविता भी
जवाब देंहटाएंसादर आमंत्रित है
अगला अंक 16 अगस्त 26 को
इसके लिए रचना प्रेषण तिथि 14 अगस्त 26 तक
नया विषय है आजादी, स्वतंत्रता, उड़ान
पिछला अंक देखिए
https://halchalwith5links.blogspot.com/2026/08/4823.html
सुप्रभात! पठनीय रचनाओं से सजी सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसुन्दर व सार्थक लिंक्स, मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद रवीन्द्र सर 🙏🙏
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति में शीर्षक के साथ मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आभार
जवाब देंहटाएंसभी प्रस्तुतियाँ सराहनीय।
जवाब देंहटाएंआभार मेरी ग़ज़ल को जगह देने के लिए … सुंदर हलचल
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