नून-रोटी के जुगाड के ज़द्दोज़हद में अनगिनत पल ऐसे आते हैं जब निराशा एक अंधेरी गुफा की तरह
कोई राह नहीं सूझता,अंधेरे में अनजान मुसीबतों,
घुप्प अंधेरी गुफा का छोर ढूँढ़ना नहीं छोड़ता है
और तब तक टटोलता रहता है जब तक कोई
उजाला जीवन की सकारात्मकता,आशा,खुशियाँ और प्रगति का प्रतीक होता है।
यह पोस्ट लिखना इस लिए जरूरी लगा कि अब तक सबसे फ़ोन पर और इनबॉक्स में झूठ बोल बोल कर थक गया था। अधिकतर लोग शक कर रहे थे कि जिम की पिक नही आ रही, मुम्बई में इतने दिन क्यों, नए जॉब का क्या हुआ etc.
Life_is_so_unpredictable , क्या क्या नही सोच लिया इस बीच मगर यह समझ मे आया कि अंदर की मजबूती ही फाइट करने का सहारा बनती है बाकी दुनिया फिर बेमानी लगती है।
सुनो, सीता,
मैं राम हूँ, मर्यादा पुरुषोत्तम हूँ,
तुम्हारा अपहरण नहीं होता,
तो मैं युद्ध नहीं करता,
पर मेरी जगह कोई और होता,
तो चढ़ाई कर देता बिना कारण,
उठवा लेता लंका का सारा सोना।





सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर वंदन
सुप्रभात! आज के हालात को अभिव्यक्ति देतीं सुंदर रचनाओं की खबर देता अंक
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति। आभार
जवाब देंहटाएंमेरी पोस्ट को शामिल के लिए शुक्रिया, अमित श्रीवास्तव भाई के लिए रब से दुआ है कि वह जल्दी से और पूरी तरह स्वस्थ हो जाएं
जवाब देंहटाएंबेहतरीन अंक के लिए साधुवाद
जवाब देंहटाएंआज की रचनाओं में विसंगतियों की टीस भी है और उम्मीद जिलाए रखने वाली सामग्री भी है । बधाई एवं शुभकामना ।
जवाब देंहटाएंश्वेता जी. इस मंच से जोड़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद, मेरी रचना को यहाँ स्थापित करने के लिए आभार, बस मन की भावनाएं शब्दों में अपना स्थान पा ही लेती है.
जवाब देंहटाएंकहा किसने इन कोरे कागजों से कुछ नहीं मिलता
लिखी तहरीर पढने से मिले किरदार की खुशबू
देवी नागरानी