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मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

4705...अमित,तुम्हें कैंसर है...

मंगलवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है।
नून-रोटी के जुगाड के ज़द्दोज़हद में अनगिनत पल ऐसे आते हैं जब निराशा एक अंधेरी गुफा की तरह
मन पर छा जाती है।
कोई राह नहीं सूझता,अंधेरे में अनजान मुसीबतों,
 ठोकरों और शत्रुओं के प्रति आशंकित मन फिर भी
घुप्प अंधेरी गुफा का छोर ढूँढ़ना नहीं छोड़ता है
और तब तक टटोलता रहता है जब तक कोई
 उजाले की किरण उस कालिमा को मिटा न दे।
उजाला जीवन की सकारात्मकता,आशा,खुशियाँ और प्रगति का प्रतीक होता है।


आज की रचनाऍं- 


यह पोस्ट लिखना इस लिए जरूरी लगा कि अब तक सबसे फ़ोन पर और इनबॉक्स में झूठ बोल बोल कर थक गया था। अधिकतर लोग शक कर रहे थे कि जिम की पिक नही आ रही, मुम्बई में इतने दिन क्यों, नए जॉब का क्या हुआ etc.

Life_is_so_unpredictable , क्या क्या नही सोच लिया इस बीच मगर यह समझ मे आया कि अंदर की मजबूती ही फाइट करने का सहारा बनती है बाकी दुनिया फिर बेमानी लगती है।




जघन्यता और पाशविकता
चीखों की जनक हैं
इनका जन्म
अक्सर
आदिम हवस
और धार्मिक कट्टरता की
अंधी सुरंगों में होता है।

 




बस… यहीं से हर किसी की आँखें नम हो गईं… 😢
क्योंकि ये सिर्फ़ कार्ड नहीं था, ये इंसानियत का पैग़ाम था।  
आज जब दुनिया धर्म के नाम पर बंट रही है, तब ये कहानी हमें याद दिलाती है:
👉 मोहब्बत का कोई मज़हब नहीं होता
👉 रिश्ते खून से नहीं… दिल से बनते हैं




सेना की भर्ती खुली है
बीच युद्ध के दौरान
और इसमें भर्ती होने से मना करना 
राष्ट्र के लिए कर्तव्य की अवहेलना है
जबकि रोजगार के अवसर भेंट चढ़ गए हैं
युद्ध के उन्माद के ! 



सुनो, सीता,

मैं राम हूँ, मर्यादा पुरुषोत्तम हूँ, 

तुम्हारा अपहरण नहीं होता, 

तो मैं युद्ध नहीं करता,

पर मेरी जगह कोई और होता,

तो चढ़ाई कर देता बिना कारण,

उठवा लेता लंका का सारा सोना।




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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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7 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात! आज के हालात को अभिव्यक्ति देतीं सुंदर रचनाओं की खबर देता अंक

    जवाब देंहटाएं
  2. मेरी पोस्ट को शामिल के लिए शुक्रिया, अमित श्रीवास्तव भाई के लिए रब से दुआ है कि वह जल्दी से और पूरी तरह स्वस्थ हो जाएं

    जवाब देंहटाएं
  3. बेहतरीन अंक के लिए साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  4. आज की रचनाओं में विसंगतियों की टीस भी है और उम्मीद जिलाए रखने वाली सामग्री भी है । बधाई एवं शुभकामना ।

    जवाब देंहटाएं
  5. श्वेता जी. इस मंच से जोड़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद, मेरी रचना को यहाँ स्थापित करने के लिए आभार, बस मन की भावनाएं शब्दों में अपना स्थान पा ही लेती है.
    कहा किसने इन कोरे कागजों से कुछ नहीं मिलता
    लिखी तहरीर पढने से मिले किरदार की खुशबू

    देवी नागरानी

    जवाब देंहटाएं

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