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बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

4664..छटाँक भर का

।।प्रातःवंदन।।

दूर क्षितिज पर सूरज चमका,सुब्‍ह खड़ी है आने को

धुंध हटेगी,धूप खिलेगी,साल नया है छाने को


प्रत्यंचा की टंकारों से सारी दुनिया गुंजेगी

देश खड़ा अर्जुन बन कर गांडिव पे बाण चढ़ाने को..!"

गौतम राजरिशी

आइये चलें शब्दों की नगरी और बुधवारिय

प्रस्तुति के साथ..✍️



बरसाना की लट्ठमार होली: प्रेम, प्रतिरोध और भक्ति का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण



ब्रज की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवीय भावनाओं का एक जटिल और गहरा ताना-बाना है. इसमें बरसाना की 'लट्ठमार होली' अपने आप में अद्वितीय है. जहाँ दुनिया होली को केवल 'रंगों के खेल' के रूप में देखती है, वहीं एक मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक दृष्टिकोण से यह उत्सव दमित भावनाओं के रेचन (Catharsis), स्त्री सशक्तिकरण और सामूहिक भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

✨️

छटाँक भर का





"ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " !


एयरपोर्ट से बाहर निकलते बेटे के मुँह से ऐसे शब्द सुनते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी एक दूसरे का मुँह ताकने लगे । बेटे से मिलने का उत्साह जैसे कुछ ठंडा सा पड़ गया ।


सोचने लगे कहाँ तो हमें लगा कि इतने समय बाद हमें देखकर बेटा खुश होगा पर ये तो भगवान को ही कोसने लगा है" ।


तभी बेटा आकर दोनों के पैर छूकर गले मिला और फटाफट सामान को गाड़ी में रखवा कर तीनों जब बैठ गए तब पापा ने चुटकी लेते हुए कहा , " क्यों रे ! किसका इंतजार था तुझे ? कौन आयेगा तुझे लेने यहाँ..?.. हैं ?... अच्छा आज तो वेलेंटाइन डे हुआ न तुम लोगों का ! कहीं कोई दोस्त तो नहीं आयी है लेने ! हैं ?.. बता दे "?


बेटा चिढ़ते हुए - "मम्मी ! देख लो पापा को ! कुछ भी बोल देते हैं" ।


"सही तो कह रहे तेरे पापा" - मम्मी भी मुस्कुराते हुए बोली, "हमें देखकर भगवान को जो कोसने लगा तू ! क्या कह रहा था ये-


"ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है "


दोनों ने एकसाथ दोहराया और हँसने लगे ।


"शिट ! तो आप लोगों ने सुन लिया" ?


"बेवकूफ ! गॉड ने हमें भी कान दिए है", मम्मी बोली , "चल बता क्या चीटिंग हुई तेरे साथ " ?


तो बेटा बोला, " हाँ मम्मी ! चीटिंग ही तो है न ये , देखो ! मैं हमेशा आप लोगों के सामने छटाँक भर का ही क्यों रह जाता हूँ" ?


"छटाँक भर का" ! आश्चर्य ..

✨️

तुनुक मिज़ाज़ प्रेमिका


अक्सर प्रेमिकाएँ


तुनुक मिज़ाज़ होती हैं—


जैसे हवा में खेलती धूप


हल्की, नर्म, और चुलबुली।


कल तक गुस्सा, आज हँसी,


आँखों में चमक और थोड़ी..

✨️

निडर राजा और जिद्दी प्रश्न


एक निडर राजा था,

उसे किसी से डर नहीं लगता था।

डरता था तो बस—

प्रेस कॉन्फ़्रेंस से।


मंत्रिपरिषद ने समझाया—

“महाराज, प्रेस कॉन्फ़्रेंस..

✨️


बासंती हाइकु


1


खिले जलज


पवन मलयज


आया बसंत।


2


पीत पराग


ऋतुराज का पाग


है अनुराग।


3


मंद पवन


अनुरागी छुअन


बासन्ती मन।


4


विरही मन


कहाँ पाए बसंत


रंग बेरंग।


5


वाणी की वीणा


मंद मंद रागिनी


खोया है मन।

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️



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