सादर अभिवादन
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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फ़ॉलोअर
सोमवार, 25 दिसंबर 2023
3985 ..इतिहास की हुई खूब पिटाई संविधान ने जाकर लाज बचाई
रविवार, 24 दिसंबर 2023
3984 .."एक कटिंग चाय मुझे भी"
सादर अभिवादन
शनिवार, 23 दिसंबर 2023
3983 ...रत्नीबाई अपनी चप्पलों को अलमारी में ताला लगाकर रखती हैं
सादर अभिवादन
शुक्रवार, 22 दिसंबर 2023
3982....रह गया नभ में अकेला....
समय के नाजुक डोर से
मोती बेआवाज़ फिसल रहा हैं
जाने अनजाने गुज़रते लम्हों पर
आवरण इक धुंधला सा चढ़ रहा है
तारीखों के आख़िरी दरख़्त से
जर्द दिसंबर टूटने को मचल रहा है।
किसी और की सोच से
सपने कोई और गढ़ता है
एक तरफ हेड दूसरी और टेल ही रहेगा
सामने से कोई आज
तू क्या करेगा
रह गया नभ में अकेला
भ्रमित सा इत-उत उड़े साथी ढूँढता फिरे
भूख और प्यास से प्राण भी संत्रास में
जाने क्यों गुरूर कर हवाओं का रुख़ भूल कर
पाला उसने ख़ुद झमेला
हो गया नभ में अकेला
भोर से मायूसियो ने ढक लिया ऐसे मुझे
शाम ढलकर भी न कोई ख्वाहिशें जागी मेरी
पुरे दिन बोझिल थी आँखें आँसुओं के खोज में
साड़ियों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये जादुगरी करती है
मिलते हैं अगले अंक में
गुरुवार, 21 दिसंबर 2023
3981...भर के रखो ख़ुशियों का गुल्लक भले ही टूटे...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ.जेन्नी शबनम जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक में पाँच रचनाओं के साथ हाज़िर हूँ। आइए पढ़ते
हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-
3.
भर के रखो
ख़ुशियों का गुल्लक
भले ही टूटे।
4.
भरा गुल्लक
ख़ुशियों का रुपया
मेरा ख़ज़ाना।
किस ने किस को दर किनार किया अब सोचने से फ़ायदा
कुछ नहीं,
शीशा ए ख़्वाब टूटते ही, हद ए नज़र वो
गुज़िश्ता कल याद आया,
क्योंकि उनके संघर्ष
उनकी महत्वाकांक्षाओं से
कहीं अधिक बड़े होते हैं
जिनकी पूर्णता की जद्दोजहद में
वो उठते हैं- गिरते हैं
गिरते हैं-उठते हैं
साहित्य अकादमी पुरस्कार 2023 की घोषणा, 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को अवार्ड
साहित्य अकादमी पुरस्कार साहित्य और भाषा के
क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है. इससे भारत की समृद्ध और विविध
साहित्यिक विरासत को बढ़ावा और संरक्षण मिलता है. साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता
को एक लाख रुपये राशि का नकद पुरस्कार दिया जाता है.
वास्तु और तकनीकी की अद्भुत मिसाल, सोमेश्वर छाया मंदिर
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
बुधवार, 20 दिसंबर 2023
3980...अलसाई - सी धूप..
।।प्रातः वंदन।।
"कुहरे की झीनी चादर में
आगाज़ गुलाबी ठंड का,ओंस से नहाई धानी अंज,कंज लिए महिना दिसंबर हो चला,
हाथों में अदरक की सोंधी खुशबू से भरी एक कप चाय लिए महिना दिसंबर हो चला ,
आगम शास्त्र की विषय वस्तु यही है कि पत्थर को ईश्वर कैसे बनाया जाये, इसका आध्यात्मिकता से क्या है संबंध
आगम शास्त्र हमें मन्दिरों की संरचना से लेकर योजना, वास्तुकला
तथा पूजा की विधि के बारे में सब कुछ बताते हैं । मंदिर बनाने
के इस प्राचीन भारतीय विज्ञान के बारे में आज हम आपको
बताते हैं, एक ऐसा विज्ञान जिसके जरिये आप पत्थर
जैसी स्थूल वस्तु को एक सूक्ष्म ऊर्जा में रूपांतरित कर सकते हैं।
.आगम शास्त्र की विषय ..
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मन मयूर नृत्य करता हो कर तन्मय
कोई खुशी मन में ना रहे शेष
यही दुआ करता प्रभु से
खुद नाचता झूम झूम प्रकृति में |
तब कोई उदास दिखाई ना देता
।। इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️
🏵️
मंगलवार, 19 दिसंबर 2023
3979....कितनी ही स्मृतियों की गठरियाँ...
मन ह्रदय पतंग हो उठा,
तोड़ सभी तन के बंधन
चिदाकाश में उड़ा किया !
मानस धवल हंसा हुआ,
मृदु भावों के सरवर में
वह अनवरत तिरता रहा !
में टिमटिमाते रहे, कुछ अपने आप ही बुझ जाए, आरती से घुमाई गई हथेली माथे
पर आ रुक जाए । निःशब्द गिरती
रही रात भर ओस की बूंदे, इक
अजीब सी ख़ामोशी रही
दरमियां अपने, इक
गंध कोष जिस्म
के बहोत
अंदर
खुल के बिखरता रहा रात भर, मन्नतों का दरख़्त
प्रतिस्पर्धा के दौड़ मे, वो खुद से ही पिछड़ गया
सोचा था पहाड़ रहकर, खुद का गाँव घर सुधारेंगे
मगर उसका हर ख्वाब, राजनीति के दलदल मे गड़ गया




























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