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शनिवार, 18 अप्रैल 2026

4716 ..रंगाली बीहू के किस्से तय हो जाते जीवन भर के, आँखों ही आँखों में रिश्ते

 सादर अभिवादन

सप्ताहान्त शुभ हो
रचनाएं ....



हरे साग-सब्जियाँ पकाती, 
माँ का काम बहुत बढ़ जाता 
दुनिया भर में इस उत्सव का, 
अब हर कोई नाम जानता 

कुदरत के इस मधु उत्सव में, 
रंगाली बीहू के किस्से 
 तय हो जाते जीवन भर के, 
आँखों ही आँखों में रिश्ते 





पञ्च तत्व से तन बना , 
रखे इसे संभाल । 
पंछी इक दिन उड़ चला , 
छोड़ सभी जंजाल।। 
साँस साँस की बात है, 
साँस लगे अनमोल। 
राम नाम की साँस ले, 
साँसें करें कमाल।।




“मैं समझ गयी.” प्रिया ने मुसकुराते हुए कहा, “आप मुझे अपना असिस्टेंट वकील दिखाना चाहते हैं. 
बस एक कोट की कमी है, तो कल मैं एक काला समर कोट खरीद लूंगी. 
अब तक यूनियन दफ्तर में जिन्होंने मुझे देखा है वे भी मुझे आपका असिस्टेंट वकील समझने लगेंगे.”
तय हुआ कि जिरह के वक्त प्रिया वकील के आउटफिट में चव्हाण की सहायता के लिए उपलब्ध रहेगी.



रंग तो दो ही थे, उनसे ही
अद्भुत रचना कर दी ..
मिट्टी पर बनी आकृतियाँ
सजीव हो उठीं , गीत गाती
गुनगुनाती छवि से उसकी
मैत्री है चिरंजीवी ।






पास रखी वो खाली कुर्सी,
किसी अपने का इंतज़ार करे,
या खुद से मिलने का मौका,
कुछ पल दिल को उपहार करे।
ये कॉफी नहीं, एक एहसास है,
थोड़ा शहर, थोड़ा गाँव है,
भागती दुनिया के बीचों-बीच,
ये पल ही तो असली ठहराव है।




सादर समर्पित
सादर वंदन

3 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात!! सराहनीय रचनाओं का सुंदर संयोजन, आज के अंक में 'मन पाये विश्राम जहाँ' को स्थान देने हेतु बहुत बहुत आभार !

    जवाब देंहटाएं
  2. अलग-अलग रंगों में एक रंग कलावती का भी जोङने के लिए धन्यवाद। सबकी कलम को नमस्ते ।

    जवाब देंहटाएं

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