---

बुधवार, 15 जनवरी 2020

1643..उत्तरायण हुआ सूर्य निखरने लगा है ..

।।उषा स्वस्ति।।

"प्रात नभ था बहुत नीला शंख
जैसे भोर का नभ,
राख से लीपा हुआ चौका
बहुत काली सिल जरा-से लाल केशर से
कि धुल गयी हो...

नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो...
और...
जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है..!!"
- शमशेर बहादुर सिंह

सूर्य उपासना के पर्व संग समृद्धि और सद्भावनाओं के आगत के साथ, 
आप सभी नज़र डालें आज के लिंकों पर..✍


💢💢

आ० पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा जी..मकर संक्रंति

नवभाव, नव-चेतन ले आई, ये संक्रांति की वेला........
तिल-तिल प्रखर हो रही अब किरण,

उत्तरायण हुआ सूर्य निखरने लगा है आंगन,
न होंगे विस्तृत अब निराशा के दामन,
मिटेंगे अंधेरे, तिल-तिल घटेंगे क्लेश के पल,
हर्ष, उल्लास,नवोन्मेष उपजेंगे हर मन।


मत पूछिए के इश्क़ में लाचार कौन है
यह देखिए के अस्ल गुनहगार कौन है

गोया के चारसू है गुलों की जमात पर
चुभता है मेरे जी में वो जो ख़ार, कौन है

अब तक न जान पाया के दर्या-ए-इश्क़ में
मुझको डुबा दिया जो मेरा यार, कौन है
💢💢


 आ० अरुण साथी जी   ..कौन बनेगा झूठों का 

सरदार 20-20 सैयां झूठों का बड़ा सरताज निकला, 

चोर समझी थी मैं थानेदार निकला। वैसे तो अब यह गीत ओल्ड है पर  ओल्ड इज गोल्ड है। आजकल झूठों का बड़ा सरदार कौन यह प्रतियोगिता जारी है और इस प्रतियोगिता में शामिल कई प्रतिस्पर्धी एक दूसरे को विजेता बनाने में लगे हुए है। हालांकि कुछ माह पहले तक झूठों के सरदार का सरताज कजरी बवाल को माना जाता था ..


💢💢

पहले ही कह देतीं ....अनुराधा चौहान

आज मिस्टर मेहता के बेटे की जन्मदिन की पार्टी में उसे देखकर पुरानी यादें ताजा हो गई।

कुछ भी नहीं बदला था उसमें वही तेल चुपड़े बालों कसी हुई चोटी।आँखों में काजल और पारंपरिक चनिया चोली पहने थी।

अगर कुछ बदला था तो सिर्फ चेहरे पर हमेशा खिली रहने वाली मुस्कान। बहुत चुप-चुप-सी थी।

हाथ बिजली की तेजी से चल रहे थे। उसने मुझे नहीं देखा था।सबको फटाफट नाश्ते की प्लेट लगाकर देने में व्यस्त थी।




💢💢



****************

गली की

आखिरी मोड़ वाली पुलिया पर बैठकर

बहुत इंतजार किया 
तुम नहीं आयीं
यहां तक तो ठीक था
पर तुम घर से निकली भी नहीं ?..

💢💢
हम-क़दम का नया विषय

💢💢
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'.✍



10 टिप्‍पणियां:

  1. आज हिंदू धर्मावलंबियों का प्रमुख पर्व मकर संक्रांति है , अतःआप सभी रचनाकारों को इस पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएँ। यह स्नान और दान का पर्व है।हमारे विंध्यक्षेत्र में स्नान कुरुक्षेत्र की सरस्वती नदी में स्नान से सौ गुणा श्रेष्ठ है । ऐसा उल्लेख नारद पुराण के उत्तर भाग में मिलता है । ऋषि वशिष्ठ ने वसु और मोहिनी संवाद के क्रम में कहा कि हरिद्वार, प्रयाग, विन्ध्याचल, काशी, गंगा सागर में मकर संक्रांति स्नान उत्तमोत्तम है।
    सुंदर एवं समसामयिक प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन प्रस्तुति
    शुभकामनाएँ..
    साद...

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी गुणीजनों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत शानदार प्रस्तुति पम्मी जी सभी रचनाएं बहुत सार्थक सुंदर।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार पम्मी जी

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर लिंक संयोजन
    मुझे सम्मिलित करने का आभार

    जवाब देंहटाएं
  7. मकर संक्रांति और सूर्य भगवान के उत्तरायण होने के पर्व पर सभी को शुभकामनाएँ। सुंदर अंक।

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।