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बुधवार, 27 मई 2020

1776..बीच रस्ते मील का पत्थर पुराना आ गया....


।। उषा स्वस्ति ।।
“ पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर!
वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें?
हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें?
जिन्दगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है,
आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर..!!”
नीरज
चलिए तो फिर हम सभी अविचल मुसाफिर के समान ब्लॉग की ओर बढ़ते हैं ...बदले हुए सुर के साथ जिसे कलमबद्ध  की हैं ..आ०साधना वैद जी....✍ 
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“अरे पकड़ लपक के राजू ! जाने ना पाए !  धर के लगा पीठ पे चार छ: लातें ! नंबर नोट कर लीयो बाइक का  ! कस के पकड़ कर रखियो आ रहे हैं हम भी ! सारी हेकड़ी निकालते हैं सा....... की!..

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विधा:दोहा

नारी सम कोई नहीं, नारी सुख की धाम
बिन उसके घर घर कहाँ,घर की है वह खाम ।1।

शक्ति विहीना नारि जब, लेती है कुछ ठान
अनस्तित्व फिर कुछ नहीं,  नारी बल की खान

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(पर्दा उठता है )
सूत्रधार -   एक जोगन राजस्थानी 
              और बृज की है ये कहानी
               कृष्णा के गुण गाती आई  
          मीरा प्रेम दीवानी।
              बृज ठहरी रसिकों की भूमि,
            भक्तों और संतों की भूमि,
            यहीं-कहीं  जाना मीरा ने 
           ठहरे जीव गोस्वामी।

मीरा -   ओह! सखी बड़ भाग हमारे 
          सुअवसर जो आज पधारे 
          भक्त शिरोमणि गोस्वामी जी के 
        दर्शन से चलो लाभ उठा लें।
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आ० नीरू मोहन जी....सोनू मेरा प्यारा बेटा , सभी का प्यारा सोनू , सोनू तू न सबसे प्यारा है और सब को प्यारा । सूरज की पहली किरण को देखकर सोनू को मां की कही यही बातें याद आ रही थीं । सोनू सोच रहा था पूरा देश महामारी से बेहाल है और प्रवासी मजदूरों का तो और भी बुरा हाल है उनके पास तो सिर छिपाने के लिए जगह भी नहीं है अपने शहरों , गावों और..

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कमल उपाध्याय की अफ़वाह..#हास्य : क्या जन गण मन पर खड़े होने से माफ़ हो जायेंगे गुनाह?

नालासोपारा के सुप्रसिद्ध माफिया पोपु पेजर ने वो कर दिखाया जिसे आज तक कोई भी माफिया, गैंगस्टर और गुंडा नहीं कर पाया है। एक कत्ल करके पोपु पेजर जब मौकाए वारदात पर सभी को अपनी गुंडई दिखा रहा था, तब वहाँ पुलिस आ धमकी। पुलिस

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बीच रस्ते मील का पत्थर पुराना आ गया..ग़ज़ल .जिसे पिरोया है... आ० चन्द्र भूषण मिश्र ‘गाफिल’. जी ने
हाँ मुझे बातें बनाना मैंने माना आ गया
उसको भी तो तानों का थप्पड़ चलाना आ गया

शम्स की ताबानी का फ़िक़्र अब नहीं है मुझको फिर
गाँव के बरगद का सर पे शामियाना आ गया..
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उलूक का नया पन्ना

‘उलूक’
हमेशा की तरह

मुँह
ऊपर कर
आकाश में टिमटिमाते
तारों में

गिनती भूल जाने
के
वहम के साथ
खो जाने की
अवस्था का चित्र
सोचते हुऐ

चोंच
ऊपर किये हुऐ
पक्षी का योग
कैसे
किया जा सकता है

सकारात्मकता
के
मुखौटों को
तीन सतह का मास्क
पहनाना
चाहता है।


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हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
🌸🌸

।। इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ‘तृप्ति ‘...✍

10 टिप्‍पणियां:

  1. जानदार प्रस्तुति
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह!शानदार प्रस्तुति पम्मी जी ।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति आज की पम्मी जी ! मेरी रचना को आज की हलचल में स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार ! सप्रेम वन्दे !

    जवाब देंहटाएं

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