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मंगलवार, 5 मई 2020

1754...तब माया-मयूर ने लिया जान...

सादर अभिवादन। 
पाँच लिंकों का आनंद की चर्चाकार आदरणीया पम्मी सिंह 'तृप्ति' जी मातृशोक के दुःख से गुज़र रहीं हैं। माताजी की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करे और परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति दे। 
पाँच लिंकों का आनंद परिवार की ओर से माताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि!
आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-

 
मन की संवेदना
का स्तर 
इन्हीं प्रश्नों के
बहाव पर
तय किया जाता है
जाने-अनजाने
रिश्तों में?

 
मोहे राधा जब आठों याम!
तब माया-मयूर ने लिया जान 
कोटिशः वंदन,कोटिशः प्रणाम,
आगे जिनके झुकते हैं श्याम,
राधा से ही भक्ति और ज्ञान।


 Sparrows, Two, Birds, Pair, Plumage
बस थोड़ा सा सह लो,
फिर देखना,
अकेले नहीं रहोगे तुम,
उदासी नहीं घेरेगी तुम्हें,
लॉकडाउन तुम्हें अच्छा लगेगा.


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गवद्गीता महाभारत का ही एक भाग है, जो भारत का प्रमुख धार्मिक ग्रन्थ है. वर्तमान पीढ़ी को इसे मूल रूप में पढ़ने का अवसर तो नहीं मिलेगा पर धारावाहिक के रूप में ही वे इससे परिचित हो रहे हैं और अपनी प्राचीन गौरवशाली परंपरा पर गर्व कर रहे हैं. इसके विभिन्न पात्रों पर कितने ही नाटकों उपन्यासों की रचना हो चुकी है. भारत के कण-कण में इन प्राचीन गाथाओं की गन्ध बसी है.


अनपढ़ औरतें...अनीता सैनी 



"कीनिया की एक महिला जिसके आठ बच्चे थे वह विधवा थी। लोगों के कपड़े धोकर अपने बच्चों का पेट भरती थी। हाल ही में कोरोना की वजह से काम पर नहीं जा सकती थी। खाने को घर पर कुछ नहीं था,  बच्चों को बहलाने के लिए वह पत्थर उबालने लगी। बच्चों को कुछ संतोष होगा जिसके इंतज़ार में वे सो जाएँगे।"


फरमाइसें आती थी ज्यादा,
राजनांदगांव, अकोला
और झुमरीतिलैया से,
जैसे सारे संगीतप्रेमी
इन्हीं जगहों में जाकर हों बसे


 हम-क़दम-119 का विषय है-
'संजीदगी' 
उदाहरणस्वरूप पढ़िए नाज़िम हिकमत जी की कविता -
जीना - नाज़िम हिकमत की
कविता
जीना कोई हँसी-मजाक की चीज़ नहीं,
तुम्हें इसे संजीदगी से लेना चाहिए।
इतना अधिक और इस हद तक
कि, जैसे मिसाल के तौर पर, जब तुम्हारे
हाथ बँधे हों
तुम्हारी पीठ के पीछे,
और तुम्हारी पीठ लगी हो दीवार से
या फिर, प्रयोगशाला में अपना सफेद
कोट पहने
और सुरक्षा-चश्मा लगाये हुए भी,
तुम लोगों के लिए मर सकते हो --
यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जिनके
चेहरे
तुमने कभी देखे न हों,
हालाँकि तुम जानते हो कि जीना ही
सबसे वास्तविक, सबसे सुन्दर चीज है।
मेरा मतलब है, तुम्हें जीने को इतनी
गम्भीरता से लेना चाहिए
कि जैसे, मिसाल के तौर पर, सत्तर की उम्र
में भी
तुम जैतून के पौधे लगाओ --
और ऐसा भी नहीं कि अपने बच्चों के लिए,
लेकिन इसलिए, हालाँकि तुम मौत से डरते
हो
तुम विश्वास नहीं करते इस बात का,
इसलिए जीना, मेरा मतलब है, ज्यादा
कठिन होता है।


- नाज़िम हिकमत

 आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में। 
रवीन्द्र सिंह यादव 

13 टिप्‍पणियां:

  1. पम्मी सिंह 'तृप्ति' जी मातृशोक के लिए बेहद दुःख है,माता की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करे और परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति दे।

    सराहनीय प्रस्तुतीकरण

    सदा स्वस्थ्य रहें

    जवाब देंहटाएं
  2. दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। भगवान चिरंतन शांति प्रदान करें!🙏🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया संकलन. मेरी कविता को शामिल किया आभार.दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि।

    जवाब देंहटाएं
  4. माता श्री मंजु सिंह को
    अश्रुपूरित श्रद्धाञ्जली
    सादर नमन


    जवाब देंहटाएं
  5. आदरणीया पम्मी जी की माताजी के निधन का समाचार बड़ा दुखभरा है.
    परमात्मा माताजी की आत्मा को शांति दे और स्वजनों को दुख से उबरने की क्षमता दे. उन्हें मेरे श्रद्धा सुमन अर्पित हैं.
    सुंदर प्रस्तुति में मेरी रचना शामिल करने के लिए सादर आभार.

    जवाब देंहटाएं
  6. दुःखद समाचार मन को उदास कर गया। ईश्वर पम्मी जी एवं उनके परिवार को यह शोक सहन करने की शक्ति दें और दिवंगत माताजी की आत्मा को शांति प्रदान करें।

    जवाब देंहटाएं
  7. परमात्मा माँ की आत्मा को शांति दे व पम्मी जी को इस दुःख के क्षणों में शक्ति दे, पठनीय लिंक्स का चयन, आभार मुझे भी शामिल करने हेतु !

    जवाब देंहटाएं
  8. दिवंगत आत्मा को शांति मिले यही ईश से निवेदन है, सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  9. पम्मी दी,
    माँँ को मेरी ओर से श्रद्धा पुष्प अर्पित कर दीजिए कृपया।

    विविधतापूर्ण सुंदर उत्कृष्ट सूत्रों से सजी प्रस्तुति में मेरी साधारण सी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत आभार आपका रवींद्र जी।
    सादर शुक्रिया।

    जवाब देंहटाएं
  10. प्रिय पम्मी जी की माता जी के बारे में दुखद समाचार से मन को बहुत पीड़ा पहुंची | ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे | पुण्यात्मा माँ की पुण्य स्मृति को कोटि नमन | माँ की छाया से वंचित होना बहुत वेदना पूर्ण है , ईश्वर पम्मी जी को ये सपरिवार ये दुःख सहने की शक्ति दे |सार्थक अंक है आदरणीय रवीन्द्र जी | सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं | सादर

    जवाब देंहटाएं
  11. आदरणीया पम्मी मैम आपकी माता जी को मेरी ओर से भी श्रद्धा सुमन अर्पित।

    सुंदर रंगों से सजी इस लाजवाब प्रस्तुति में मेरी रचना को स्थान देने हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय सर। सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई। सादर प्रणाम 🙏

    जवाब देंहटाएं

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