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बुधवार, 15 मई 2019

1398...आज की अतिथि चर्चाकार हैं सखी मीना भारद्वाज..

सखी पम्मी जी मुम्बई प्रवास पर हैं
आज का ये अंक हममें से कोई भी प्रस्तुत कर देता
पर नहीं न कर रहे हैं
हम अपनी नित्य की पाठिका व रचनाकार

को अतिथि चर्चाकार के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं
अतिथि चर्चाकर हैं सखी मीना जी..
"मीना भारद्वाज" जी की लेखनी
ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान रखती है।
सहज,सरल,सुंदर और
सारगर्भित, सुरुचिपूर्ण शब्द संयोजन,
नपा-तुला भाव
उनकी रचनाओं की खासियत है जो 
पाठकों के मन पर प्रभाव छोड़ जाती हैं।
अनुशासनबद्ध विचारों को मोतियों की तरह
पिरोकर मनमोहक माला के रुप 
में पाठकों के समक्ष समर्पित करती हैं।
साहित्यिक कोई भी विधा सहजता से ग्रहण कर
इनकी लेखनी जादू बिखेरने में पूर्णतया
सक्षम है।
तो चलिए देर न करते हुये
हम उनकी लिखी एक "त्रिवेणी"
पढ़ते हैं फिर उनकी पसंद की
अन्य रचनाएँ पढ़ेंंगे-
★★★
आपकी एक त्रिपदी पढ़िए

गर्म अहसास पूरी शिद्दत से मौजूद है 
कल कल करते निर्झर कब के सूख गए


ग्लेशियर तो पहले ही कोहिनूर जैसे हैं

सखी मीना भारद्वाज जी की पसंद की रचनाएँ पढ़वा रहे हैं...
★★★

ग़ज़लों की बात चले तो 
ब्लॉग "स्वप्न मेरे" की  चर्चा दूर तक जाएगी । 
आदरणीय दिगम्बर नासवा जी कलम से निसृत एक ग़ज़ल 

ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे ...

मील के पत्थर थे ये जलते रहे
कुछ मुसफ़िर यूँ खड़े जलते रहे

पास आ, खुद को निहारा, हो गया
फुरसतों में आईने जलते रहे

कुसुम कोठारी जी की अद्वितीय कलम  विविधतापूर्ण भावों को 
उकेरने में सिद्धहस्त है। गुलमोहर से उनकी बातें मन को छू गई

कहो तो गुलमोहर

मई जून में भी यूं खिल-खिल
बौराये बसंत हुवे जाते हो ।
कहो तो गुलमोहर कैसे !
गर्मी में यूं मुस्कुराते हो ?

कहो क्या होली पर भटक
कहीं दूर गली जाते हो
चटकिला रंग लिए अब
किससे फाग खेलने आते हो।

आदरणीय गोपेश मोहन जी का ब्लॉग "तिरछी नजर"  
उनके द्वारा लिखे संस्मरणों  और कहानियों के साथ 
समसामयिक विषयों पर उनके पैने नजरिए को 
पेश करता है  सामाजिक विसंगति को 
दूर करने पर रोचक कथा
दुनिया ना माने ....

प्रिंसिपल रामचन्द्र शुक्ल की पूरे कीर्तिनगर में बड़ी इज्ज़त थी. 
और दूसरी तरफ़ उनके बचपन के दोस्त लाला भानचंद थे जिनकी ख्याति सूदखोर बनिये के रूप में कीर्तिनगर की सीमाओं 
को भी लांघ चुकी थी. लोगबाग 
उजाले और अँधेरे की इस दोस्ती पर बड़ा अचरज 
करते थे लेकिन 50 साल पुरानी इस दोस्ती में कभी 
कोई दरार नहीं पड़ी थी.

ब्लॉग जगत का लोकप्रिय नाम हैं श्वेता जी । विषय कोई भी हो इनकी लेखनी कल कल करते निर्झर सी बहती है । मन मोह लिया इनकी"सुनो ना माँ' ने ।आपने पढ़ी होगी एक बार मेरे नजरिए से -

सुनो न माँ ....

कैसे कहूँ,किस सरिता में बहूँ
ममता तेरी,भावों में बाँध नहीं पाती हूँ
कैसे बताऊँ माँ तुम क्या हो?
चाहकर भी,शब्दों में साध नहीं पाती हूँ

"शब्दों की मुस्कुराहट " के माध्यम से 
मुस्कुराहटें बाँटते श्री संजय जी की लड़कियों के 
लिए विचारणीय प्रस्तुति -

अपना घर

जवान बेटी को बाप ने कहा
जाना होगा अब तुम्हे अपने घर ,
बी.ए की करनी वही पढाई
मैंने
ढूंढ़ लिया तेरे लायक वर ,
अब तक तुम हमारी थी
पर अब हमे छोड़ जाना होगा

आदरणीय सुशील जोशी जी के 
"उलूक टाइम्स" के बिना ब्लॉग जगत की चर्चा ही अपूर्ण लगती है  
मेरी पसन्दीदा रचना उनकी कलम से -

खुले में बंद और बंद में खुली 
टिप्पणी करना 
कई सालों की 
चिट्ठाकारी के 
बाद ही आ पाता है

"एक ख़त परमपिता परमेश्वर के नाम"  
आदरणीया यशोदा जी का ख़त ईश्वर के नाम 
सम्पूर्ण महिलाओं की तरफ से..., 
आभार यशोदा जी इस ख़त के लिए...,
एक महिला होने के नाते इस ख़त को 
मैं दिल के बहुत करीब  पाती हूँ -


एक ख़त परमपिता परमेश्वर के नाम

★★★★★
सखी मीना भारद्वाज
किसी परिचय की मोहताज नहीं है
आप कहती हैं...
जन्म और उसके बाद अध्ययन अध्यापन में जीवन का 

अधिकांश समय पिलानी (राजस्थान) में ही बीता । फिलहाल 
अपने  परिवार सहित निवास स्थान बैंगलुरु (कर्नाटक) है । 
फुर्सत के पलों की रिक्तता भरने में किताबों से अधिक 
गहरा मित्र भला कौन हो सकता है ? किताबों की दुनिया 
मुझे बेहद प्रिय है । शैली चाहे गद्य हो या पद्य लिखना और 
पढ़ना मेरे जीवन का अटूट हिस्सा है जो 
मुझे पूर्णता प्रदान करता है ।
मीना भारद्वाज

हम अपने "ब्लॉग पाँच लिंकों का आनन्द" में
आपका स्वागत करते हुए उनके 

उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं
उनका लेखन स्वस्थ और सुन्दर हो


चलते-चलते इस सप्ताह के विषय के बारे में
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए















25 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभातम्
    मीना जी बहुमुखी साहित्यिक प्रतिभा की धनी बेहद सुंंदर मन सरल स्वभावयुक्त प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं। इनकी सुंदर और प्रेरक रचनाएँ जीवन और प्रकृति के गूढ़ रहस्यों को पाठकों के मन तक संदेश दे पाने में पूर्णतया सक्षम है।
    मीनमीना जी आपके विषय में जानना और और आपकी पसंद की सुरुचिपूर्ण पूर्ण रचनाएँ पढ़ना बहुत अच्छा लगा। मेरी रचना को अपनी पसंल में शामिल करने के लिए हृदयतल से आभार।
    यशोदा दी का भी सादर आभार..ऐसे ही और भी अन्य ब्लॉगर मित्रों का परिचय करवाती रहिये।
    मीना जी को मेरी अशेष शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  2. लाजवाब पसंद..
    अच्छा पढ़ती हैं आप..
    लिखती भी अच्छा है..
    ऊफर में एक त्रिवेणी पढ़ा अभी..
    शुभकामनाएँ...
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  3. लाजवाब पसंद..
    अच्छा पढ़ती हैं आप..
    लिखती भी अच्छा है..
    ऊपर में एक त्रिवेणी पढ़ा अभी..
    शुभकामनाएँ...
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  4. बैंगलोर में निवास करती हैं मीना जी तो मैं उनसे भेंट होने की उम्मीद कर सकती हूँ? 22 जून से मैं वहाँ हूँ...
    लाजबाब प्रस्तुतीकरण

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपसे मिलना सौभाग्य की बात होगी मेरे लिए 🙏🙏 आप से अनुरोध है कृपया अपना सम्पर्क-सूत्र साझा करें ।

      हटाएं
  5. बेहतरीन प्रस्तुति प्रिय सखी मीना जी के द्वारा |
    बहुत सा स्नेह और ढेरों शुभकामनायें,
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. अपना धर रचना का लिंक खुल नहीं रहा | होसकता है मेरे फोन में समस्या हो |
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह! एक से बढ़कर एक रचनाओं का संकलन।

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह मीनाजी बेहतरीन रचनाओं का संकलन।आपको और सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. सुप्रभात....
    "पाँच लिंकों का आनन्द" के सभी चर्चाकार एवं रचनाकार !
    सादर आभार सखी यशोदा जी एवं श्वेता जी !!
    आपने मुझे अतिथि चर्चाकार के रूप मेंं इस मंच से मेरे मन की अभिव्यक्ति प्रकट करने का अवसर दिया ।
    ब्लॉग जगत के अनेक गुणीजन जिनकी कृतियाँ समय समय पर "पाँच लिकों का आनन्द" के मंच पर प्रस्तुत होती हैं उन सब की बहुत सी रचनाओं को मैं दिल के करीब पाती हूँ । मंच की परम्परा के अनुसार कम रचनाएँ यहाँ आ पाईं । मैं आप सभी की आभारी हूँ बहुत कुछ सीखा है मैनेंं आप सभी से और सीखने की यात्रा अनवरत जारी है । सादर आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति की है मीना जी ने आज अतिथी चर्चाकार के रूप में। मीना जी का लेखन प्रभावित करता है। चर्चा में सूत्र को स्थान दे कर उनके द्वारा दिये गये सम्मान के लिये 'उलूक' की ओर से आभार।

    जवाब देंहटाएं
  11. मीना जी वैसे तो आपकी हर पोस्ट गहरी और ठहराव लिए मन को छूती है। निसंदेह आप बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। और आज की प्रस्तुति आप की विशेष टिप्पणीयों के साथ अति विशिष्ट नजर आ रही है हर रचना की संतुलित और शानदार व्याख्या आज की प्रस्तुति को विशेष बनाती है
    मेरी रचना को शामिल किया आपने सच मन आह्लाद से भर गया तहेतहेदिल से आपका शुक्रिया।
    सभी रचनाएं मन को लुभाती सभी रचनाकारों को बधाई
    और आपके इस सुन्दर प्रयास के लिये साधुवाद।
    मां शारदे आपके लिए नये रास्ते प्रशस्त करें ।
    सस्नेह।

    जवाब देंहटाएं
  12. सुन्दर हलचल प्रस्तुति है आज की और मीना जी ने आज अतिथी चर्चाकार के रूप में। मीना जी का लेखन प्रभावित करता है बहुमुखी प्रतिभा की धनी मीना जी हर पोस्ट गहरी और मन को छूती है बेहतरीन रचनाओं का संकलन।
    मीना भरद्वाज की लिखी मेरी पसंदीदा रचना......पुरानी‎ फाइलों में पड़ा खत एक खत

    एक दिन पुरानी‎ फाइलों में
    कुछ ढूंढते ढूंढते
    अंगुलि‎यों से तुम्हारा‎
    ख़त टकरा गया
    कोरे पन्ने पर बिखरे
    चन्द अल्फाज़…, जिनमें
    अपने अपनेपन की यादें
    पूरी शिद्दत के साथ मौजूद थी
    मौजूद तो गुलाब की
    कुछ पंखुड़ियां भी थी
    जो तुमने मेरे जन्मदिन पर
    बड़े जतन से
    खत के साथ भेजी थी .,
    उनका सुर्ख रंग
    कुछ‎ खो सा गया है
    हमारे रिश्ते का रंग भी अब
    उन पंखुड़ियों की तरह
    कुछ और सा गया है !

    -- संजय भास्कर

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत- बहुत धन्यवाद मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए

    जवाब देंहटाएं
  14. मीना जी आप एक बेहतरीन रचनाकार हैं ,आप की हर रचना बेहद गहरा असर छोड़ती है दिल पे ,और आज की आप की प्रस्तुति भी लाज़बाब हैं खास तौर पर यशोदा दी की रचना "एक खत परमेस्वर के नाम "और कुछ ऐसी ही और पुरानी रचना जो मेरे जैसे नये पाठक उसे पढ़ने से वंचित रह गए थे ,उसे प्रस्तुत करने के लिए आभार आप का

    जवाब देंहटाएं
  15. प्रिय सखी मीना जी -- आज आपको इस मंच पर अतिथि चर्चाकार के रूप में देखकर मन को अपार प्रसन्नता हुई | यूँ चाहती तो सुबह - सुबह ही लिख देती पर आपकी एक रचना मेरे याद आई जो कभी मुझे बहुत पसंद आई थी उसे ढूढने आपके ब्लॉग पर चली गयी थी जिसके बहाने आपकी आज बहुतसी रचनाएँ पढ़ी या यूँ कहूं आपको उन रचनाओं के माध्यम से थोडा और अच्छे से जान पायी | काव्य की हर विधा में बड़ी सरलता और सहजता से आपका लेखन बहुत ही लाजवाब है | मैं जब से ब्लॉग जगत में आई हूँ आपके ब्लॉग की रचनाओं पर मैं यदा कदा जाती रही हूँ | बहुत सी रचनाएँ है जो मुझे याद है आपकी लेकिन यशोधरा पर आपकी भावपूर्ण रचना मुझे हमेशा याद रहती है आज इसी को आपके ब्लॉग से लेकर आई हूँ | इसे मैं अपनी पसंद के अंक में लेना चाहती थी पर रचनाओं की सीमा थी अतः संभव ना हो सका | इसी तरह आदरणीय दिगम्बर जी की गजल और आदरणीय साधना वैद जी की रचना के साथ एक दो और महत्वपूर्ण रचनाएँ रह गयी जिनका बहुत अफ़सोस रहा | आज आपके बारें में विस्तार से जानकर बहुत ही खुशी हो रही है | आपका सुंदर संकलन आपके उत्तम पाठक होने का प्रतीक है | क्योकि हमारी पसंद से हमारी व्यक्तित्व जाना जाता है |आपकी पसंद का मान बढाने सभी रचनाकारों की रचनाओं को जरुर पढूंगी | आपको शुभता और सफलता भरे जीवन की हार्दिक शुभकामनायें और प्यार देती हूँ | इसके साथ आज के विशेष दिन के लिए आपको बहुत बधाई | यशोदा दीदी की इस सुंदर प्रस्तुती के लिए उन्हें साधुवाद और आभार | अपने अनुभव से जानती हूँ कि कितना अच्छा लगता है एक दिन का अतिथि होना वो भी इस प्रतिष्ठित मंच पर | सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें और अंत में आपकी वो भावस्पर्शी रचना पाठकों के लिए --
    उपालंभ

    मैं तुम्हारी यशोधरा तो नही....,
    मगर उसे कई बार जीया है
    जब से मैनें ......,
    मैथलीशरण गुप्त का
    “यशोधरा” काव्य पढ़ा है
    करूणा के सागर तुम
    सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध‎ बने
    अनगिनत अनुयायियों के
    पथ प्रदर्शक तुम
    अष्टांगिक मार्ग और बौद्ध‎धर्म के
    जन्मदाता जो ठहरे
    तुम्हारे बुद्ध‎त्व के प्रभामण्डल के
    समक्ष नतमस्तक तो मैं भी हूँ‎
    मगर नम दृगों से तुम्हारा
    ज्योतिर्मय रूप निहारते
    मन के किसी कोने में
    एक प्रश्न बार बार उभरता है
    हे करूणा के सागर !
    तुम्हारी करूणा का अमृत
    जब समस्त जड़-चेतन पर बरसा
    तो गृह त्याग के वक्त
    राहुल और यशोधरा के लिए
    तुम्हारे मन से नेह का सागर
    क्यों नही छलका ?

    इसके साथ प्रिय संजय को आभार आपकी और एक भावपूर्ण रचना पढवाने के लिए | सस्नेह --

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अभिभूत हूँ रेणु जी आपके स्नेहसिक्त अनमोल वचनों से ...,निशब्द और भावविह्वल । आप स्वयं इस प्रतिष्ठित मंच की सहभागी रही हैं अतः मेरे मन के भावों को भी उकेर दिया है अपनी कलम से । आपका स्नेह अनमोल धरोहर है मेरे लिए । सस्नेह आभार .

      हटाएं
    2. स्वागत है आपका सखी मीना | 

      हटाएं
  16. अतिथि चर्चाकार के रूप में मीना जी की पसंद की रचनाओं ने मन मोह लिया मीना जी का लेखन लाजवाब है आप सभी विधाओं में पारंगत हैं आपकी पसंद की रचनाएं पढवाने एवं आपको अतिथि चर्चाकार के रूप में मिलवाने के लिए यशोदा जी का हृदयतल से आभार ...हमेशा की तरह बहुत ही लाजवाब प्रस्तुतिकरण।

    जवाब देंहटाएं
  17. मीना जी का "पाँच लिंकों का आनन्द" पर स्वागत है। मीना जी का रचनाकर्म प्रभावशाली है जहाँ शब्द,भाव,विचार और सन्देश की साम्यता सौम्यता के साथ निखरी है। बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    सुन्दर रचनाओं का संकलन प्रस्तुत किया है। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. "पाँच लिंकों का आनन्द" मंच को नमन इस अतुलनीय सम्मान के लिए ...आभार आप सभी गुणीजनों का मेरे उत्साहवर्धन के लिए..., पुनश्चः आभार सखी यशोदा जी एवं श्वेता जी 🙏 🙏 सादर .

      हटाएं

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