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बुधवार, 26 सितंबर 2018

1167.. मौन निमंत्रण के आगाज से ..


।।शुभ भोर वंदन।।

स्वर्ण ,सुख,श्री सौरभ में भोर
विश्व को देती है जब बोर,

विहग कुल की कल -कंठ हिलोर

मिला देती भू नभ के छोर;

न जाने,अलस पलक-दल कौन

खोल देता तब मेरा मौन!

सुमित्रानंदन पंत


इसी मुखर मौन निमंत्रण के आगाज से आज की सुबह चाय के साथ -साथ 
इन लिंकों पर भी नजर डाले...✍
🕊



शाख़ ए नशेमनशेमन

समंदर से बच आये दो आंखों मे डूब गये

मुकद्दर का खेल था तेरी बातों मे डूब गये ।

तस्सवुर मे ना था कोई कशिश मे खिंचते रहे
बीच धार से बच आये साहिल पर ड़ूब गये ।

🕊




दिल से दिल तक की भावप्रवण रचना..
मैं जा रहा था , उस दिन शाम के समय टहलता ,कुछ सोचता हुआ ,

उस झील के किनारे -किनारे।

सोच रहा था जिंदगी के फलसफे के बारे में ,

जो अपनी इच्छा से नचाता है , इंसान को  कठपुतली बनाता है ,..

🕊






आज
पार कर लिया है तुमने

उम्र का सत्रहवां घेरा भी

बेशक नहीं है कोई बड़ी घटना

न ही हमने उसको खास बनाने की ..की कोशिश..

🕊





द मिस्ड बीट..न.. न.. इस नाम पर नहीं बल्कि हिंदी की जहीन ब्लॉग है..

प्यार बहुत करते थे मगर हमसफर न बन सके,

ये दो कमरे जो कभी घर न बन सके,

यही था दोनो का फैसला तो सिर फोड़ना कैसा,

जो नही था तकदीर में,वो उमर भर न बन सके,

🕊






दोहे "गुरुओं का ज्ञान" 
मतलब के हैं अब गुरू, मतलब के ही शिष्य।
दोनों इसी जुगाड़ में, कैसे बने भविष्य।।


सम्बन्धों की आज तो, हालत बड़ी विचित्र।
नहीं रहे गुरु-शिष्य अब, पावन और पवित्र।।
🕊
हम-क़दम के अड़तीसवें क़दम
का विषय...
यहाँ देखिए....

🕊

।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍








20 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात।
    आज की हलचल पड़कर बहुत अच्छा लगा।प्रस्तावना भी शानदार लगी।कैसा इतेफाक़ कल पंत जी की जन्मस्थली कौशानी गया था उनके पुस्तैनी मकान भी देखा।आज उनकी कविता पड़कर आनंद आ गया।

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  2. शुभ प्रभात सखी
    स्वर्ण ,सुख,श्री सौरभ में भोर
    विश्व को देती है जब बोर,

    विहग कुल की कल -कंठ हिलोर
    मिला देती भू नभ के छोर;
    बेहतरीन अंक
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात

    आज की हलचल प्रस्तुत पढ़कर बहुत अच्छा लगा ।
    बेहतरीन प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  4. शुभ प्रभात
    आज की हलचल प्रस्तुत पढ़कर बहुत अच्छा लगा
    बेहतरीन प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  5. 200 अनुसरणकर्ता होने की बधाई हलचल परिवार को। सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण संकलन सभी चयनित रचनाकारों को बधाई आपका आभार इतनी बेहतरीन
    रचनाओं से रूबरू करवाने के लिए 🙏

    जवाब देंहटाएं
  7. शुभदोपहर पम्मी जी,
    सुंदर शानदार आगाज़ के साथ बेहद उम्दा रचनाओं का संकलन तैयार किया है आपने।
    सभी रचनाएँ बहुत अच्छी हैं..👌
    सादर आभार।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति.और मेरी रचना शामिल करने के लिए सादर आभार।

    जवाब देंहटाएं
  9. भोर के प्रति हमारा मोह बढ़ातीं कविवर सुमित्रानंदन पंत जी की अप्रतिम पंक्तियों से प्रस्तुति का शानदार आग़ाज़। रचनाओं का चयन कौशल प्रभावशाली है ,बधाई आदरणीया पम्मी जी एक सुन्दर प्रस्तुति तैयार करने के लिये.
    सभी चयनित रचनाकारों बधाई एवं शुभकामनाऐं।

    जवाब देंहटाएं
  10. पंत जी की सुकुमार कविता से आरंभ बहुत लुभावना है पम्मी जी।
    सुंदर प्रस्तुति सभी रचनाऐं मनमोहक ।
    मेरी रचना को चुनने के लिये सस्नेह आभार।
    सभी रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत ही उम्दा प्रस्तुति ..सभी रचनाएं लाजवाब ।

    जवाब देंहटाएं
  12. शानदार लिंक संकलन एवं बेहतरीन प्रस्तुतिकरण...

    जवाब देंहटाएं

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