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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

1166..बदलना चाहता है कोई अगर, कुछ उसके बदलने से पहले बदलने को ही बदल दो

सादर अभिवादन...
कल से पितृ-पक्ष चालू हो गया...
पितरों को आस बंधी कुछ तर खाने को मिलेगा
पड़ोसी भी उम्मीद लगाए हैं.....
चलिए चलते हैं एक श्राद्ध कार्यक्रम का जायजा लें...

बेटे ने तर्पन करते हुए कहा, ''पापा, आज ऑफिस में थोड़ा ज्यादा काम हैं। इसलिए आप लोगों को वक्त नहीं दे सका। लेकिन हमने श्राद्ध के खाने की तैयारी कर ली हैं। मेल खोल लीजिए...अटैचमेंट में जाइए...दो पिज्जा, एक बर्गर और एक चाउमीन अटैच कर दिया हैं...हैप्पी मील पापा...सी...यू...बाय...बाय...!!!''

टटोल कर, मेरा भावुक सा मन,
बोल कर कई सुप्रिय वचन,
पूछ कर न जाने, कितने ही प्रश्न,
रख गया था कोई हाथ, मेरे हाथों में....


मौत तुमसे कभी मैं डरूंगा नहीं
मार  दोगी मगर मैं मरूंगा नहीं

धुंध, आँधी, बवंडर न मुझको दिखा
रौशनी बन चुका हूँ बुझूंगा  नहीं


हमें कुछ भेड़ियों की खून की आदत नहीं दिखती।
हमें तब बेटियों पर आ रही आफत नहीं दिखती।

ये खतरे से नहीं खाली किसी पर यूँ भरोसा हो।
नकाबी नक्श के पीछे हमें सूरत नहीं दिखती।


हवाओं  ने लहरायें,
ग़ुम नाम मनसूबे,
हाथों ने फिर तेरा नाम संवारा,
भूल चुकी  थी,
 इश्क का गलियारा,
धङकनो ने फिर तेरा नाम पुकारा ।


कब आओगे परदेशी
तुम फिर से इन गलियों में
अब की में भी साथ चलूंगी
संग तेरे तेरी दुनिया में

सुई का काम चुभोना है
धागे का काम पिरोना है
एक दूजे में मिलना होगा
प्रेम से सब सिलना होगा।

आओ तुम सुई बन जाओ
मुझको भी खुद में समाओ
फूलों को भी खिलना होगा
रिश्तों को भी सिलना होगा।

इससे पहले 
कोई समझले 
क्या कह 
दिया है 
विषय ही 
बदल दो 

समय 
रुकता नहीं है 
सब जानते हैं 
समझते नहीं हैं 
मौका देखकर 
समय को 
ही बदल दो 


-*-*-*-*-*-*-
हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का अड़तीसवाँ क़दम 
सप्ताह का विषय
एक चित्र है
इसे देखकर आपको कविता रचनी है
उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है

अंतिम तिथिः शनिवार 29 सितम्बर 2018  
प्रकाशन तिथिः 01 अक्टूबर 2018  को प्रकाशित की जाएगी । 

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यशोदा













23 टिप्‍पणियां:


  1. आओ तुम सुई बन जाओ
    मुझको भी खुद में समाओ
    फूलों को भी खिलना होगा
    रिश्तों को भी सिलना होगा।

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,आभार आप सभी रचनाकारों का

    जवाब देंहटाएं
  2. मन भावन और बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।
    आदरणीया यशोदा जी आपका बहुत बहुत आभार,बदलना चाहता कोई ...इस अंक में आपने मेरी रचना को स्थान दिया ।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. सुप्रभात
    एक बात पूछनी हैं
    श्राद्ध हमेशां कौवों को डाला जाता है लेकिन मेरे दादा दादी जी को ये कवे बिलकुल पसंद नहीं थे. फिर उनकी आत्मा इन दिनों इन कोवों में कैसे घुसती होगी?
    पता नहीं क्यों लेकिन ये सिर्फ मेरे दादा दादी जी की ही बात नहीं है कवे किसी भी इन्सान को पसंद नहीं हैं.
    पुरे साल आत्मा भूखों मरे और केवल एक बार भोजन कराओ...ये भी बात अत्याचार सी है :)
    या फिर ये बात भी सोचने लायक है की आत्मा को भी भूख लगती है.
    या ये बात कि जो आत्मा हमारे पूर्वजों में थी उनका पुनर्जन्म नहीं हुआ और साल में एक बार कौवों के माध्यम से भोजन मिलने का इन्तजार कर रहें हैं.
    अभी तक ये रिवाज मुझे तर्कहीन लगती है..
    अगर आपके पास इस रिवाज के पीछे मनघडंत कहानी के अलावा सही fact हैं तो प्लीज़ साँझा करें.
    हो सकता है मुझे भी इस रिवाज में कोई कमी महसूस न हों.

    सुंदर हलचल

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. रोहितास जी, इस विषय पर मेरी पोस्ट https://www.jyotidehliwal.com/2014/09/blog-post_7.htmlजरूर पढ़िएगा।

      हटाएं
    2. रोहित जी मुझे लगता है कोवों की अवधारणा को छोड़ दें तो बस पूर्वजों के प्रति श्रद्धाकर्म ही श्राद्ध हैं | बस अपनों को महसूस करना और उनके प्रति नत हो उन्हें इस पखवाड़े में श्रद्धा सुमन अर्पित करना ही मकसद है शायद | और दिवंगत के प्रति उसकी पसंद का होजान अर्पण करना भी इसी भावनात्मकता की एक कड़ी है |

      हटाएं
  4. उम्दा लिंक्स। मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद,यशोदा दी।

    जवाब देंहटाएं
  5. सबरंग में रची रचना बहुत बढिया दी..
    धन्यवाद🙂

    जवाब देंहटाएं
  6. नीला,पीला,हरा,गुलाबी..
    कच्चा-पक्का रंग....
    बढ़िया ...सोचिए और लिखिए
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  7. सुंदर प्रस्तुति !सभी रचनाएं लाजवाब ।

    जवाब देंहटाएं
  8. विविधता से परिपूर्ण अत्यंत सुन्दर प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  9. बेहतरीन प्रस्तुति करण उम्दा लिंक संकलन...
    रोहिताश जी के प्रश्न के सही fact वाले उत्त्तर का इंतज़ार रहेगा....।

    जवाब देंहटाएं
  10. शुभ संध्या दी:)
    सुंदर रचनाओं का सार्थक संकलन तैयार किया है आपने दी।
    सभी को शुभच्छायें मेरी।

    जवाब देंहटाएं
  11. सुंदर प्रस्तुति शानदार रचनाएं मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार यशोदा जी

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी प्रस्तुति 👌👌👌

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। आभार यशोदा जी 'उलूक' की एक पुरानी कतरन को स्थान देने के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  14. सार्थक प्रस्तुति सार्थक रचनाओं के साथ सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  15. अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुती आदरणीय दीदी | सभी रचनाएँ पढ़कर आ रही हूँ | सभी रचनाकारों को सस्नेह शुभकामनाये और आपको सादर हार्दिक बधाई इस सुंदर प्रस्तुती के लिए |

    जवाब देंहटाएं
  16. बेहतरीन संकलन। मेरी सुई धागा को शामिल किया। बहुत आभार

    जवाब देंहटाएं
  17. Aaj Mai aazaad hu
    Rango ki siyaahi sa
    Chitrapat par bhar du kya
    Mai rang is siyaahi kaa

    Khel lu inse aaj
    Holi Kay us gulal sa
    Yaa ishq koi Naya Karu
    Jo rangde bemisal saa

    Dekh Isko ek umang
    Jaag gai sang sang
    Rang ki yeh tarang
    Jayegi Ab mere sang

    Kavi sabhi rang gae hain aaj
    Rango Kay is kumbh mai
    Mushkil bada btana ab
    Rang Kavi Mai ya Kavi rang mai

    जवाब देंहटाएं

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