शीर्षक पंक्ति: आदरणीया फ़िज़ा जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-
तिलचट्टे तिलचट्टे तिलचट्टे बस तिलचट्टे
इंसानों में इंसान तो पाया नहीं जाता ...
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया फ़िज़ा जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ-
तिलचट्टे तिलचट्टे तिलचट्टे बस तिलचट्टे
इंसानों में इंसान तो पाया नहीं जाता ...
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सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंआभार
वंदन
अति सुन्दर सूत्रों से सुसज्जित प्रस्तुति में ‘अनुत्तरित प्रश्न’ को सम्मिलित करने हेतु सादर आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏
जवाब देंहटाएंसुप्रभात, सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसुंदर चर्चा … आभार मेरी ग़ज़ल को जगह देने के लिए
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति. अनवरत की पोस्ट को शेयर करने के लिए आभार.
जवाब देंहटाएंआभार रवींद्र जी |
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचनाओ से सुसज्जित बेहतरीन अंक 🙏
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
जवाब देंहटाएंसुंदर बेहतरीन