---

रविवार, 31 मई 2026

4759 ..वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो

 सादर अभिवादन 


कुछ भूले बिसरे
यूं ही बे-सबब न फिरा करो 
कोई शाम घर में रहा करो 

वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है 
उसे चुपके चुपके पढ़ा करो 
 
कोई हाथ भी न मिलाएगा 
जो गले मिलोगे तपाक से 

ये नए मिज़ाज का शहर है 
ज़रा फ़ासले से मिला करो।

रचनाएं



अभी पिछले दिनों कुछ पूर्वाग्रही, कुंठित, अराजक तत्वों ने अपनी तुलना उस 2.5x4x1.5cm के आकार के कीड़े से की जो इस दुनिया में करीब 35 करोड़ सालों से रेंग रहा है ! जो एक कीड़ा नहीं बल्कि चलता-फिरता जीवाश्म है ! तो क्या ऐसे लोगों ने सिर्फ इसलिए एक घृणित जीव को अपना आदर्श बना लिया क्योंकि वह करोड़ों वर्षों से ''सर्वाइव'' कर रहा है? नहीं ! उनका मुख्य उद्देश्य उस जीव के ''सर्वाइवालपने'' के पैटर्न को अपने से जोड़, एक गलत नेरेटिव गढ़, देश के युवा वर्ग को गुमराह करना था ! पर उनके उस विलेन नुमा हीरो के चरित्र, उसका व्यवहार, उसकी कारस्तानियों ने इनके गुब्बारे के फूलने से पहले ही हवा निकाल दी ! 





करीब डेढ़ दशक पहले मुझसे एक पत्रकार मित्र ने पूछा मॉनसून क्यों, मानसून क्यों नहीं? दक्षिण भारतीय भाषाओं में और अंग्रेज़ी सहित अनेक विदेशी भाषाओं में ओ और औ के बीच में एक ध्वनि और होती है। ऐसा ही ए और ऐ के बीच है। Call को देवनागरी में काल लिखना अटपटा है। देवनागरी ध्वन्यात्मक लिपि है तो हमें अधिकाधिक ध्वनियों को उसी रूप में लिखना चाहिए। इसलिए वृत्तमुखी ओ को ऑ लिखते हैं। हिंदी के अलग-अलग क्षेत्रों में औ और ऐ को अलग-अलग ढंग से बोला जाता है। मेरे विचार से बाल और बॉल को अलग-अलग ढंग से लिखना बेहतर होगा।



विहँसती हवा
मुस्काता गगन
खिलते सुमन
कहते कान में
दिन क्यों ख़ास है
तू आसपास है !




साक्षी एक जागता भीतर
स्पन्द विशेष जहाँ खो जाता, 
जग सपने सा भास हो रहा 
गुरु इस ज्ञान को सुदृढ़ करता !


जग के साथ एक्य का अनुभव 
एक चेतना का हो दर्शन, 
जीवन उत्सव बन जाता जब 
गुरुदेव का होता पदार्पण !


सादर समर्पित
सादर वंदन

3 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ संध्या! वाह, एक से एक रचनाओं का सुंदर संयोजन, 'मन पाये विश्राम जहां' को स्थान देने के लिए आभार!

    जवाब देंहटाएं
  2. सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार ! स्नेह बना रहे 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. आज का अंक विविध विषयों, भावों और चिंतन का सुंदर समागम है। सभी रचनाएँ अपने-अपने ढंग से पाठक को विचार और संवेदना के नए आयाम प्रदान करती हैं। उत्कृष्ट चयन और सुसंस्कृत प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। ‘पाँच लिंकों का आनंद’ वास्तव में हिंदी ब्लॉग-जगत की एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कड़ी है।

    बहुत सुंदर आभार

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।