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शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
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7 टिप्पणियां:
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सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंरंगों की छुअन से बौराने का मौसम आया है।
दिलों में जमी बर्फ पिघलाने का मौसम आया है।
आभार
वंदन
फगुनहट में सॉंसें महकाने के इस मौसम में गुनगुनाती एहसासों से युक्त शानदार अंक
जवाब देंहटाएंसाधुवाद
अच्छा लगा पढ़कर । शुक्रिया !
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर चयन आपका । महफ़िल सज चुकी है।
जवाब देंहटाएंमेरी रचना शामिल करने के लिए शुक्रिया ।
धन्यवाद स्वेता जी, अष्टभुजा शुक्ल की इस नायाब कविता को अपने मंच पर स्थान देने के लिए आपका आभार... मैंने भी जब ये कविता पढ़ी तो लगा कि सभी को पढ़नी चाहिए काशी से ये विलक्षणता
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार. होली की हार्दिक शुभकामनायें
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