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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

4665..ख़्वाहिशें..

 भोर वंदन 

गुरुवारीय प्रस्तुति में शामिल
'आपका ब्लॉग 'से रचनाए
कई शब्द रंग-ढंग को समेटे..✍️






न बीवी मिली न प्यारे

  आओ किस्सा तुम्हे सुनाए 

recent सा है यार 

साठ साल की उमर में हो गया 

ऑनलाइन मुझे प्यार 

ऑनलाइन मुझे प्यार 

मिले वो टिंडर पे थे यार

प्रोफाइल देखकर रीझ गया दिल 

हुआ पहली नज़र में प्यार 

✨️

बांचती रही हूं

 बस तुम्हें औ तुम्हारा लिखा ही  मैं बाँचती रही हूं

तुम्हे सोना चांदी हीरा मोती सम मैं आंकती रही हूं


 अक्षरशः पढ़ना तुझे जैसे सांस सांस लेना

तेरा वजूद तूफान सा और मैं पत्ते सी कांपती रही हूं

✨️



टेली कॉल वालों के जी के जंजालों ने


अजब मोबाइल है

गजब सी उस की उल्फ़त है

नजदीकिया है दूरी

दूरियां में क़ुर्बत है

कोई दुखड़ा सुना रहा

अपना व्हाट्सएप पे..
✨️
जिंदगी में कुछ पाने की ख़्वाहिश हमेशा होनी चाहिए क्योंकि ख्वाहिशें ही हकीक़त बनती हैं।जब ख़्वाहिशें हकीकत का जामा पहनती हैं तब जो आंतरिक सुख मिलता है, उसका रसास्वादन स्वयं के अलावा कोई नहीं कर सकता। हम दूसरों से अपने अनुभव बता तो सकते हैं, किंतु उन्हें महसूस नहीं..
✨️
पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️



3 टिप्‍पणियां:

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