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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

4631.... तुम्हारी सोच तय करती है...

 शुक्रवारीय अंक में 

आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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वन्दे सदा चेतसा ज्ञानशक्तिम्
हृदय से सर्वदा ज्ञानशक्ति प्रदात्री सरस्वती की वंदना करती हूँ।
ब्रह्मरूपिणी,सर्वव्यापिनी,चर-अचर मूढ़ जगत में 
बुद्धिरूपिणी देवी माँ सरस्वती को शत-शत नमन।

मानसिक प्रदूषण से रक्षा करने वाली देवी के आगमन से 
संपूर्ण प्रकृति उल्लासित और श्रृंगारित होने लगती है।
वृक्षों में नूतन किसलय,चित्ताकर्षक पुष्पों की सुवासित छटा,
आम्र मंजरियों से लदी अमराई में कोयल की कूक 
एवं भ्रमरों के गान, सरस रागिनी प्रकृति सौंदर्य 
को सुशोभित करते हैं, बसंती हवाओं की सुगंध कण-कण 
में बिखर जाती है। हर्षित धरा का गान हृदय में 
प्रेम और पवित्रता का संचार करते है। जग के झमेले 
से हटकर अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर 
आप भी प्रकृति के उत्सव को महसूस कीजिए।

साहित्य के बसंत महाप्राण निराला जी की पुण्य स्मृति को सादर नमन।
 मुक्त छंद (स्वच्छंदता) के प्रवर्तक, व्यक्तिगत सुख-दुख की मार्मिक अभिव्यक्ति, प्रकृति चित्रण, क्रांति और विद्रोह की चेतना, सामाजिक यथार्थ का चित्रण (शोषितों के प्रति सहानुभूति), रहस्यानुभूति, आत्म-गौरव, ओज और औदार्य तथा भाषा की विविधता (सरल से संस्कृतनिष्ठ तक) सूर्य कांत त्रिपाठी निराला के लेखन की प्रमुख  विशेषताएं हैं, जो छायावाद से प्रगतिवाद तक के सफर को दर्शाती हैं।

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आज की रचनाऍं- 

प्रेम
किसी पुराने स्वेटर की तरह है
जो अब पहना नहीं जाता
पर फेंका भी नहीं जाता
ठंड अचानक बढ़ जाए
तो वही
सबसे पहले याद आता है




ज़रूरी है युद्ध
क्योंकि शांति के नाम पर
हर असहमत आवाज़ के सामने
हादसों के गड्ढे तैनात किये जा रहे हैं.
इसलिए
यह कोई नारा नहीं,
कोई उत्सव नहीं।

बस इतना जान लो
ज़रूरी है
यह युद्ध।




तुम ही तुम सजने लगे ख्यालों ख़्वाबों में ऐ सनम 
बदला चाल ढाल रंग ढंग खुद पर नाज़ हो गया है 
दिन हसीं रंगीन शामें लगने लगीं आजकल सनम 
उड़ने लगी मैं हवा में जबसे तूं सरताज हो गया है ।



याद रखना…
ज़िंदगी तुम्हें नहीं तोड़ती,
तुम्हारी सोच तय करती है
कि तुम टूटोगे या बनोगे।

Problem बड़ी नहीं होती,
हम उसे देखने का Angle छोटा कर देते हैं।

जब तुम कहते हो –
“मुझसे नहीं होगा”
तो ज़िंदगी भी कहती है –
“ठीक है, जैसा तुम चाहो।”


नीट की छात्रा......


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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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2 टिप्‍पणियां:

  1. जय हो मातारानी की
    तुम्हारा प्यार पाकर माता,
    जग में प्रज्ञा अभियान हो गया
    आभार मातेश्वरी का
    वंदन, अभिनंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. सुंदर रचनाओं को समेटे सारवान सुंदर अंक प्रस्तुति । धन्यवाद !

    जवाब देंहटाएं

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