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सोमवार, 22 अप्रैल 2024

4104 ...खबरची की खबर पर वाह कह के मगर जरूर आता है

सादर अभिवादन

कल हनुमान जी का जन्म दिन है



पढ़िए आज की चुनिंदा रचनाएं



वाह रे ‘उलूक’
तेरे घर तेरे शहर में हो रहे को तू देखता है
और अपना मुंह छुपाता है

शाबाश है खबरचियों की ओर से
खबरची की खबर पर
वाह कह के मगर जरूर आता है




पापा आप दीर्घायु हो यही है मेरा अरमान
आपसे ही तो है ये छत ये दीवारें ये मकान।

मम्मी के श्रृंगार आप ही से सलामत है पापा ।
आप से ही है मम्मी के चेहरे की मुस्कान ।




‘अरे बंधु,यही मेरी जीत का टीका है।रक्त की एक-एक बूँद से जनता इसका जवाब देगी
अगले दिन सभी अख़बारों के मुखपृष्ठ पर सचित्र खबर छपी, ‘नेताजी ने अपने क्षेत्र में श्रमदान में भाग लिया और रक्तदान का शुभारंभ किया।उनसे मिलकर किसान खूब रोए !’





प्रिये पराये धन को अपना कहूँ,
यह ब्राह्मण धर्म का अंग नहीं।
हम हैं स्वाभिमानी ब्राह्मण प्रिये,
उपकृत महल हमें स्वीकार नहीं।।




कहीं पर नहीं है खाने के निवाले,
तो कहीं पर नहीं हैं खाने वाले।
अमीर देश के अमीर लोग बच्चे नहीं जनते,
गरीब देश के गरीब लोग जनने से नहीं थमते।
विश्व का संतुलन बिगड़ता जा रहा है,
इसीलिए इंसान का सकून छिनता जा रहा है।

आज बस. ...
कल मिलिये सखी से
सादर वंदन

2 टिप्‍पणियां:

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