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सोमवार, 15 अप्रैल 2024

4097 ...दो मुख्य दर्रे बंद कर दिए गए

 


सादर अभिवादन
करते करुणा-घन छाँह वहाँ,
झुलसाता निदाध-सा दाह नहीं
मिलती शुचि आँसुओं की सरिता,
मृगवारि का सिंधु अथाह नहीं,
हँसता अनुराग का इंदु सदा,
छलना की कुहू का निबाह नहीं,
फिरता अलि भूल कहाँ भटका,
यह प्रेम के देश की राह नहीं!
-महादेवी वर्मा  
आइए देखें कुछ रचनाएं ....



पहले चीता हेलीकॉप्टर ने 13 अप्रैल को सुबह 5.30 बजे कैप्टन संजय कुलकर्णी और एक सैनिक को लेकर बेस कैंप से उड़ान भरी। दोपहर तक 17 ऐसी उड़ानें भरी गईं और 29 सैनिकों को बिलाफोंड ला में उतारा गया। जल्द ही, मौसम खराब हो गया और पलटन मुख्यालय से कट गई। तीन दिनों के बाद संपर्क स्थापित हुआ, जब पांच चीता और दो एमआई-8 हेलीकॉप्टरों ने 17 अप्रैल को सिया ला के लिए रिकॉर्ड 32 उड़ानें भरीं। इस तरह, सबसे पहले बिलाफोंड ला और सिया ला की चोटियों पर भारत का फिर से कब्जा हो गया, जिससे पाकिस्तानी सेना के लिए इन रणनीतिक स्थलों तक पहुंच पाना नामुमकिन हो गया।
उसके बाद तो जल्द ही पूरे ग्लेशियर को सुरक्षित कर लिया गया। लेफ्टिनेंट जनरल चिब्बर ने एक आधिकारिक नोट में लिखा, 'दो मुख्य दर्रे बंद कर दिए गए। दुश्मन को पूरी तरह से आश्चर्यचकित कर दिया गया और लगभग 3,300 वर्ग किमी का क्षेत्र, जिसे पाक और यूएसए की ओर से प्रकाशित मानचित्रों पर अवैध रूप से पीओके के हिस्से के रूप में दिखाया गया था, अब हमारे नियंत्रण में था




मन जब भी
कातर हुआ
अनगिनत मूक संवाद ,
और स्नेह आलंबन भी
आश्वस्त न कर पाए,
जबकि दूर से दिखती
सुंदर चेहरों की हंसी
अच्छी लगी
लेकिन कभी उन चेहरों के
मन के पास से गुजरी तो
निशब्द हो उठी


अब तो जाग उठो जवानों,
जी में साहस ले कर।
काली बन अरि के सीने का,
दिखलाओ शोणित पी कर



हर प्लीज का, मतलब रिस्पेक्ट नहीं होता
कुछ प्लीज किसी को मजबूर करने के लिए भी
'यूज़ किए जाते हैं
'नो' कहना सुरक्षित रखो मतलबी बातों के लिए.


सोचा कि कुछ पल तो
आराम मिलेगा तुझको
अपने हिस्से के बादल
सब सौंप दिए तुझको
मुझको भी सफर करना है साथी
मेरी धूप मुझे लौटा दो
मेरी छाव मुझे लौटा दो ।




अलमारी के खानों में
बिछाकर रखे थे
पुराने कैलेंडर के पन्ने
आज खोला जो
अलमारी
तो सोच बदल दूं ,
बिछा दूं नए काग़ज़।





आज बस. ...
कल फिर सखी आएगी
सादर वंदन

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