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मंगलवार, 2 जनवरी 2024

3993...नूतन का अभिनंदन हो

  मंगलवारीय अंक में आप
सभी का स्नेहिल अभिवादन।
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मेरे आँगन के पीले,सफेद,बैंगनी, कत्थई, नारंगी 
गुलाबी नाजुक नरम फूलों की तरफ से,
फूलों की हरी-हरी,बिना फूलों वाली 
गहरी हरी पत्तियों की तरफ़ से,
पत्तियों की झँवई परछाईंयों की तरफ से,
भोर में आते कबूतरों के बड़े से झुंड की तरफ से
काली मैना,भूरी गौरेया,नन्हीं बुलबुल 
मुझसे मेरा हाल पूछने आती
अनाम पीली चिड़ियों और कौओं की तरफ से,
धूप में अलसाते कुत्तों,
पाँव दबाकर चलती सावधान बिल्ली की तरफ से
मेरी बालकनी से दिखने वाले पीपल,बड़ की तरफ़ से
जीवन की रोशनी भरते सूरज की तरफ से
थके तन को थपकियाँ देकर सुलाते चाँद की तरफ से
कभी दिखते,कभी नहीं दिखते,
कभी देखकर मुस्कुराते ,कभी बिना देखे
यूँ ही क़तरा के जाने वाले पड़ोसियों की तरफ से...
सड़क पर गुज़रने वाले अनाम मुसाफिरों की तरह 
अनदेखे पलों की यात्रा के लिए
आपको और मुझे भी जाने वाले साल की तरफ से
आने वाले नये साल की खुशियों की उम्मीद भरी झोली भर के शुभकामनाएँ ...।

उम्मीद की बीज मुट्ठियों में भींच लो, आओ इस अंधेरी रात की कोख को सींच दो,भोर की माथे से फूटेंगी नयी राहें,बस कुछ पल के लिए आँखें मींच लो...।
जाते हुए साल की दुआओं का असर हो जाए।
आने वाला साल हँसी-खुशी के काँधे पर बसर हो जाए।

सर्वप्रथम सभी को कालजयी क़लम की 
शुभकामनाएँ
फणीश्वर नाथ रेणु

नूतन काअभिनंदन हो
प्रेम-पुलकमय जन-जन हो!
नव-स्फूर्ति भर दे नव-चेतन
टूट पड़ें जड़ता के बंधन;
शुद्ध, स्वतंत्र वायुमंडल में
निर्मल तन, निर्भय मन हो!
प्रेम-पुलकमय जन-जन हो,
नूतन का अभिनंदन हो!
प्रति अंतर हो पुलकित-हुलसित
प्रेम-दिए जल उठें सुवासित
जीवन का क्षण-क्षण हो ज्योतित,
शिवता का आराधन हो!
प्रेम-पुलकमय प्रति जन हो,
नूतन का अभिनंदन हो!





रखे कोई हथेली में, कुछ ओस की क़तरे राहत ए जाँ के लिए
बातख़ल्लुफ़ ही सही, ज़िंदगी में यूं तो हसरतें बेशुमार रह गए,

सूखी नदी की वेदना सिवाय पत्थरों के कोई भी नहीं जानता,
टूटा हुआ पुल ही सही, उम्मीद ए सफ़र दरमियां हमारे रह गए,






मरी संवेदनाएँ हों दफ़न,
जिस दिल की धरती में
नहीं उगती फसल उसमें
बीज जितने भी बोएँगे। 

समंदर पार कर आए,
जरा सी दूर थी मंजिल
मगर सोचा ना था, कश्ती
किनारे ही डुबोएँगे।


आने वाली पीढ़ी के खातिर।
आओ प्रकृति का जतन करें।।
अद्भुत समस्त ये संसार है।
जाइए इसमें भ्रमण करें।


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आज के लिए इतना ही
फिर मिलते है 
अगले अंक में।

6 टिप्‍पणियां:

  1. शिवता का आराधन हो!
    प्रेम-पुलकमय प्रति जन हो,
    नूतन का अभिनंदन हो!
    बेहतरीन अंक
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाएं
    बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  3. कितना सुंदर आगाज़।
    नए साल का हो या आपके सुंदर आह्वान का। मन प्रसन्न हो गया। मेरी तरफ से भी आपको और अपने सभी मित्रों को भी ये नया साल आकाश भर खुशियां दे।
    सुंदर संकलन लाने के लिए आभार और अभिनंदन प्रिय सखी।

    जवाब देंहटाएं
  4. दिगंबर नासवा2 जनवरी 2024 को 2:37 pm बजे

    अंदर लिंक्स नव वर्ष के … बहुत आभार मुझे शामिल करने के लिए

    जवाब देंहटाएं
  5. नववर्ष की शुभकामनाएँ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷सुंदर लिंक्स ।

    जवाब देंहटाएं
  6. मनमोहक भूमिका के साथ सुंदर प्रस्तुति। बहुत अच्छी रचनाओं के लिंक्स। मेरी अभिव्यक्ति को पाँच लिंकों में स्थान देने हेतु बहुत बहुत शुक्रिया प्रिय श्वेता।

    जवाब देंहटाएं

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