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मंगलवार, 13 जून 2023

3787..आज का अंक भी स्थगित

 सादर नमस्कार

न्यायधीश का अनोखा दंड

अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया।

जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा, "क्या तुमने सचमुच चुराया था ब्रैड और पनीर का पैकेट"?
लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया- जी हाँ।
जज :- क्यों ?
लड़का :- मुझे ज़रूरत थी।
जज :-  खरीद लेते।
लड़का :- पैसे नहीं थे।
जज:- घर वालों से ले लेते।
लड़का:- घर में सिर्फ मां है। बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी।
जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ?
लड़का:- करता था एक कार वाश में। मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया।
जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते?
लड़का:- सुबह से घर से निकला था, लगभग पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया।
जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और विशेषतौर से ब्रैड की चोरी बहुत ही शर्मनाक अपराध है और इस अपराध के हम सब ज़िम्मेदार हैं।
"अदालत में मौजूद हर शख़्स.. मुझ सहित सभी अपराधी हैं, इसलिए यहाँ मौजूद प्रत्येक व्यक्ति पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है। दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं जा सकेगा।"
ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:- इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से इंसानियत न रख कर उसे पुलिस के हवाले किया।
अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म देगी।
जुर्माने की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट उस लड़के से माफी चाहती है।
फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के की भी हिचकियां बंध गईं। वह लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये।
क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार हैं?
चाणक्य ने कहा था कि "यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकड़ा जाए तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए।"
- चौपाल से


8 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीया सखी, चाणक्य नीति का सारगर्भित सूत्र और यह संवेदनशील कथा साझा करने के लिए हार्दिक आभार और अभिनन्दन. आज के दिन की पूँजी मिल गई. यह कहानी क्या सत्य कथा पर आधारित है ? कृपया इसकी पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालें.

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    1. सखी,
      चाणक्य ने सही ही कहा है
      तक्षशिला गुरुकुल आचार्य थे
      सादर

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    2. ऊपर लिखी तहरीर सत्य घटना है
      सादर

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  2. बहुत सटीक..।इसलिए नयी दुनिया भी कहते हैं अमेरिका को....
    काश यह बात सभी समझ पाते..
    आज का स्थगित अंक बहुत ही लाजवाब है।👌👌🙏🙏

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  3. बहुत ही भावपूर्ण और प्रेरक कथा है प्रिय दीदी।अमेरिका के न्यायधीश में नैतिकता थी,हमारे यहाँ तो गरीब सबसे ज्यादा साधन संपन्न और कथित ऊँचे लोगों के हाथों हीप्रताड़ित होते देखे और सुने गये हैं।हमारे यहाँ इस तरह के निर्णय और न्याय शायद होने बंद हो गये हैं।खुद पेट भरा है तो किसी भूखे की फिक्र किसी को नहीं।चाणक्य नीतियों और कूटनीतियों के प्रबल समर्थक थे।एक सुविख्यात कवि की पंक्तियाँ स्मरण हो आईं-- जिसका मरे पडोसी भूखा उसके भोजन को धिक्कार।इस तरह के नीति न्याय कर्ताओं को कोटि कोटि नमन।शायद इस तरह के लोग ही मानवता को जिन्दा रखे हुए हैं।अत्यंत आभार इस प्रेरक प्रस्तुति का 🙏🙏

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  4. गूगल से साभार 🙏

    हे धनियों !क्या दीन जनों की
    नहीं सुनते हो हाहाकार।
    जिसका मरे पड़ोसी भूखा
    उसके भोजन को धिक्कार। -


    कविराज
    बाल मुकुन्द गुप्त
    🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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    उत्तर
    1. एक सप्ताह और
      फिर नियमित प्रस्तुति आएगी
      पसंदीदा लिंक्स का स्वागत है
      सादर...

      हटाएं

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