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सोमवार, 27 सितंबर 2021

3164...ये मत समझिएगा कि आज संगीता दीदी नहीं हैं, वे हर सोमवार को आएंगी..

सादर अभिवादन..
आज संगीता दीदी नही हैं
मै कामचलाऊ चर्चाकारा
उनके जैसा तो नही लिख-पढ़ सकती
पर हाँ , उनकी ढंकी-छुपी रचनाएं 
अवश्य पढ़वा सकती हूँ...
आइए देखें....



मैं -
आसमान हूँ ,
एक ऐसा आसमान
जहाँ बहुत से
बादल आ कर
इकट्ठे हो गए हैं
छा गई है बदली
और
आसमान का रंग
काला पड़ गया है।




मैंने ---
अपनी सारी भावनाओं ,
सोच , इच्छा ,
उम्मीद और अनुभवों को
कैद कर दिया है
एक ताबूत में ,
और
ठोक दी है उसमें
एक अन्तिम कील भी ।




सोचो में तुम , ख्वाहिशों में तुम , ख़्वाबों में तुम
ज़िन्दगी की हर राह जैसे उलझ सी गई है।

उलझन ही होती तो शायद सुलझा भी लेते ,
हर चाह ज़िन्दगी की मध्यम पड़ गई है ।




रिश्तों की गांठें खोल दो
और
आजाद हो जाओ सारे रिश्तों से
फिर देखो
ज़िन्दगी कितनी
सुकून भरी हो जाती है
एक तरफ़
न तुम किसी के होंगे
और न कोई तुम्हारा




ख़्वाबों में अक्सर
देखा है मैंने ख़ुद को
किसी ऊँची
पहाडी की चोटी पर खड़ा
जब भी झांकती हूँ
नीचे की ओर
तो डर के साथ
एक सिहरन भी होती है

आज बस

कल फिर 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय दीदी
    क्षमा, आपकी अनुमति के बिना आपके ब्लॉग से लिंक लाई
    इसी बहाने आपकी शुरुआती कलम की धार दिखी
    सारी कविताएं शानदार हैं
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात !
    एक से बढ़कर एक रचनाओं का सुंदर पुष्पगुच्छ ।यशोदा दीदी आपका बहुत आभार इतनी सुंदर और सार्थक रचनाओं को साझा करने के लिए । आप दोनों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  3. एक नवीन अनुभूति लिए
    गहन चिंतन और सादगी से
    जीवन के गूढ़ रहस्यों को
    टटोलती संगीता दी की
    पुरानी रचनाओं को पढ़वाने के लिए
    बहुत आभार दी।
    ----
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  5. आदरणीय दीदी , संगीता दीदी की भावपूर्ण रचनाओं से शोभायमान पांच लिंक पर आकर आज बहुत अच्छा लग रहा है | भले, संगीता दीदी से औपचारिक परिचय कुछ ही महीने पहले हुआ है, पर उनके स्नेह की प्रगाढ़ता बहुत गहरी आत्मीयता का आभास कराती है | सरलता , सहजता से स्नेह का निर्वहन करना उन्हें खूब आता है | उनकी रचनाएँ भी उतनी ही सरल और सहज हैं | पाँच लिंकों से उनका जुड़ना पाठकों और रचनाकारों के लिए बहुत शुभ रहा | आज की सादगी भरी रचनाओं में उनके विचारों और चिंतन के नए रंग मिले | दीदी को ढेरों शुभकामनाएं और बधाई | यद्यपि ब्लॉग से कुछ दूर हूँ इन दिनों पर पाँच लिंक तो जीवन की दिनचर्या का अनिवार्य और अभिन्न अंग है | सो , आज संगीता दीदी की रचनाओं का आनन्द ले -उनसे नजरें बचाकर निकलना संभव नहीं था | प्रस्तुति विशेष पर मेरी बधाई | संगीता दीदी को पुनः बधाई | सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. शुक्रिया यशोदा ,
    आज के दिन भी मुझे यहाँ उपस्थित रखा ।
    प्रिय श्वेता और रेणु आपकी प्रतिक्रिया हर रचना पर ब्लॉग पर पढ़ कर आई हूँ । उसके लिए विशेष आभार ।
    थोड़ा व्यस्त हूँ , समय से जवाब नहीं दे पा रही ।।
    आप सबके स्नेह के लिए धन्यवाद ।

    जवाब देंहटाएं

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