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शनिवार, 5 जून 2021

3050... स्वर्ग

हाज़िर हूँ...! उपस्थिति दर्ज हो...

कंक्रीट के जंगल में बिना आँगन निम्न मध्यम को मध्यम फ्लोर में बिन छत आश्रय मिला वो तभी तो पाया 

स्वर्ग

जहाँ प्रेम होगा हवाओं में,

विश्वास के पर्वत होंगें,

संतोष के फल लगते होंगें,

सपनों के पेड़ों में,

उम्मीदों के फूल महकते होंगें,

आशाओं के बाग में,

जहाँ लम्हों के समुन्दरों में,

खुशियों के मोती मिलते होंगें,

स्वर्ग

एक खामोश हलचल बनीं जिन्दगी गहरा ठहरा हुया जल बनी जिन्दगी,

तुम बिना जैसे महलों में बीता हुया उर्मिला का कोई पल बनी जिन्दगी,

दृष्टि आकाश में आश का दिया तुम बुझाती रहीं में जलाता रहा

में तुम्हें ढूंढने स्वर्ग के द्वार तकरोज आता रहा रोज जाता रहा..

स्वर्ग

सबका अलग-अलग थान - गन है

सबका अलग-अलग वंदन है

सबका अलग-अलग चंदन है

लेकिन सबके सर के ऊपर नीला एक वितान है

फ़िर क्यों जाने यह सारी धरती लहू-लुहान है?

स्वर्ग

हुए परेशान इंद्र बोले, हे करुणानिधान!

आप की ही शरण में है स्वर्ग का अब कल्याण। 

नींद हो गई है हराम, मिस्ड काॅल ने ले ली जान,

मोबाइल के जाल से अब, आप ही बचाइए।

मोबाइल के जाल से अब, आप ही बचाइए।

स्वर्ग

दूंड़ रहा रास्ता!
इसी चिंता मे डूबा,
कोई जुगत लगा रहा,
साधु-संत के द्वार ,
के चक्कर लगा रहा!
कोई कराता महायग,
कोई महभोग करा रहा,

@नहीं दे पायी पर्यावरण दिवस की शुभकामनाओं के संग बधाई .... 
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शायद पुन: भेंट होगी...
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4 टिप्‍पणियां:

  1. विश्व पर्यावरण दिवस पर शुभकामनाएं
    स्वर्ग के दर्शन, अप्रतिम अंक
    आभार..
    सादर नमन

    जवाब देंहटाएं
  2. अति सराहनीय संकलन दी हमेशा की तरह सबसे अलग।
    प्रणाम दी
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  3. विविधतापूर्ण सुंदर संकलन,सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं

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