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सोमवार, 27 जुलाई 2020

1837.. हम-क़दम का एक सौ अट्ठाईसवां अंक ..बरसात

सादर बरसावन
सोमवारीय अंक में स्वागत अभिनन्दन

बारिश अच्छी ही लगती है. घर में रहने को विवश हो जाते हैं लोग..
पर बच्चे तो बच्चे ही होते हैं, किसी भी संक्रमण से बेख़ौफ़ बहते 
जल में नाव चलानें में मशगूल..
फिर भी बूंदों की झड़ी देखना सुखद है..

बरसात दरअसल, प्रकृति का एक भाव है....
बरसकर खुश भी होती है, अति में आकर रौद्र रूप भी 
दिखलाती है..और सौम्य फुहरों से 
राहत की छुअन भी दे जाती है, 
जैसे नम आँखें हंसती भी है..दुख भी कहती है 
और हर हल में साथ होने का अहसास भी कराती है...
बारिश क़ुदरत की आँख है.. 
...
बारिश में सिर्फ जल ही नहीं गिरता
बारिश तो होती है इनकी भी
आफत की, धूल की, आग की , गम की, खुशी की
गोलियों की, बमों की..


शुरुआत में कुछ प्रतिष्ठित रचनाएँ
सारी रचनाएं अनहदकृति से ली गई है

आदरणीय डॉ. प्रेम लता चसवाल 'प्रेमपुष्प'
बेमौसम बरसात

उद्बोधन के गीत मेरे, ऐसे बेमानी हो गए,
लोरी सुनकर जैसे वे सब गहरी निंदिया सो गए।

बेमौसम बरसात और ओला-वृष्टि अंधड़ देखो,
जीवनदायी घन ही अब तो जान के दुश्मन हो गए।

***
आदरणीय शशि पुरवार
बरसाती दोहे

कांची माटी से गड़े, जितने भी आकार।
पल में नश्वर हो गया, माटी का संसार।।

चाक शिला पर रच रहे, माटी का संसार।
माटी यह अनमोल है, सबसे कहे कुम्हार।।

सबसे कहे पुकार के, यह वसुधा दिन रात
जितनी कम वन सम्पदा, उतनी कम बरसात।।

***
आदरणीय हरिहर झा
ग़मों की आग 

गीत धड़कन से निकल
कर्कश हुये
टकरा ग़मों से,
आग की बरसात हुई।

***
आदरणीय पंकज त्रिवेदी
साँस ...
साँस से शब्द सूर हो सोऽहं ओहम,
ब्रह्मनाद के स्वर में भीगता सावन

झमझम बरसात फुहार मन चंचल
नभ गरजत कड़डड बिजली सोहत
***

आदरणीय डॉ. प्रभा मुजुमदार
शब्द (उगते शब्द )  ...
मिट्टी से सोच
आकाश की कल्पना
वक़्त से लेकर
हवा, धूप और बरसात
उग आया है
शब्दों का अंकुर
कागज़ की धरा पर।

***
अब हमारे पाठकों द्वारा रचित रचनाएँ

आदरणीय साधना वैद
बादल तेरे आ जाने से ...

पहरों कमरे की खिड़की से
तुझको ही देखा करती हूँ ,
तेरे रंग से तेरे दुःख का
अनुमान लगाया करती हूँ !
यूँ उमड़ घुमड़ तेरा छाना
तेरी पीड़ा दरशाता है ,
बादल तेरे आ जाने से
जाने क्यूँ मन भर आता है !

***

आदरणीय आशा सक्सेना
बरसात .....

था इन्तजार हर वर्ष की तरह  
बरसात के इस   मौसम का
धरती में दरारे पड़ी थी
अपना दुःख  किसे बताती |
झुलसी  तपती गरमी से वह
तरस रही  थी वर्षा के लिए
हरियाली की धानी चूनर से
सजने के लिए |

***
आदरणीय अनीता सैनी
बरसात .....

मैं एकटक अपलक ताकती रिमझिम फ़ुहार को 
भार बादलों का धरणी सहती रही।
रसोई से आँगन और बाज़ार की दूरी में मैं भीगती 
मुठ्ठीभर जीवन अँजुरी से रिसता रहा।

***
आदरणीय अनीता सुधीर
सावन गीत ...
बरसे मेघा बरसी अँखियाँ,
सावन हिय को तड़पाये।
धरती पर फैला सन्नाटा,
तम के बादल हैं छाए ।।

***
आदरणीय सुजाता प्रिय
रिमझिम रिमझिम आई बरसात
झूम-झूमकर झूमे रे बदरिया।
काली-काली बिखरी कजरिया।
लहर-लहर लहराई ।
आसमान में छाई।
हवा के झोंके को लेकर साथ।
मीठी फुहारों की लायी सौगात।
रिमझिम-रिमझिम..
***
आदरणीय रवीन्द्र सिंह जी
यह जो बरसात आई है
यह जो बरसात 
आई है
हर बार की तरह 
फिर इस बार
सुहानी तो बिल्कुल नहीं
कोढ़ में खुजली-सी
लग रही है इस बार
अभी बाढ़ से आई तबाही
है चर्चा में
कल सूखे की चर्चा होगी
अभी मरनेवालों की चर्चा है
कल 
फ़सल-भूखे की चर्चा होगी

***
आदरणीय सुबोध सिन्हा
ख्वाहिशों की बूँदें ...

रुमानियत की 
हरियाली से
सजे ग़ज़लों के 
पर्वतों पर
मतला से लेकर 
मक़्ता तक के 
सफ़र में 
हो मशग़ूल 
करती जाती जो 
प्यार की बरसात

***

आदरणीय अभिलाषा चौहान
आया सावन ......

आया सावन घिर आए बादल,
काले-काले श्याम रंग बादल।
सावन मास सुहाए बादल,
धरा को खूब सुहाते बादल।

उमड़-घुमड़ कर छाए बादल,
गरज-गरज के छाए बादल।
नवजीवन के सृजनकर्ता,
झूम-झूम के बरसो बादल।

***
आदरणीय कुसुम कोठारी
बरसात एक परिदृश्य ..

बादल उमड़-घुमड़ कर आते
घटा घोर नीले नभ छाती
दामिनी दम-दम दमकती
मन मे सिहरन सी भरती ।

कभी सरस कभी तांडव सी
बरखा की रुत आती
कभी हरित धरा मुस्काती
जल में कभी मग्न हो जाती ।


***

आदरणीय अनन्ता सिन्हा
जीवन - दायनी वर्षा ....
Rain Greenery Images, Stock Photos & Vectors | Shutterstock
हे वर्षा रानी आओ ,
आ कर अपना शीतल जल बरसाओ। 
बरसो राम धड़ाके से,
मरे न कोई फांके से। 

क्यूंकि जो तुम न होगी ,
खेतों में फसलें  नहीं उगेंगी,
लोहड़ी - बैसाखी नहीं मानेगी। 

***

आदरणीय सुबोध सिन्हा
'जेड प्लस' सुरक्षा कवच 
सड़े हुए अंडों से भरे कई 'कैरेट' और
सड़े टमाटरों से भरी कुछ टोकरियाँ,
हो गई पलक झपकते खाली सारी की सारी,
हुई जब उन अंडों और टमाटरों की झमाझम बरसात
और बहुरंगी 'कार्टून' बना दिया मंचासीन साहिब को
भीड़ के कुछ लोगों ने करते हुए आदर-सत्कार।



***

आदरणीय उर्मिला सिंह
बारिश की फुहारें ....
बारिश का मौसम 
कागज की नाव,
ढूढू कहाँ बचपन ,
वो बचपन का गाँव!

सपने  हुवे जवाँ 
बचपन भूलता गया,
गुड़ियों  का संग  भी 
छूटता गया!


***

आदरणीय डॉ. सुशील जोशी
उदघोषणा

जैसे ही हुयी

बरसात के
मौसम के
जल्दी ही
आने की

मेंढक दीवाने
सारे लग गये
तैयारी में

ढूढना शुरु
कर दिये दर्जी

***
बारिशों का पानी 
भी कोई पानी है 
खुली खिड़कियों
को बरसात
के मौसम में
यूँ ही खुला
छोड़ कर
चले जाने
के बाद
जब कोई
लौट कर
वापस
आता है
कई दिनों
के बाद
गली में
पाँवों के
निशान तक
बरसते पानी
के साथ
बह चुके
होते हैं
......
कल मिलिएगा भाई रवीन्द्र जी से
129 वें विषय के साथ
सादर


17 टिप्‍पणियां:

  1. सस्नेहाशीष शुभकामनाओं के संग छोटी बहना
    सराहनीय प्रस्तुतीकरण

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  2. वाह बेहतरीन प्रस्तुति ।झमाझम वर्षा से भींगी-भींगी ।मनमोहक।

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  3. बहुत सुन्दर अंक है |मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार सहित धन्यवाद यशोदा जी |

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  4. बरसात में बरसात
    शानदार अंक
    शुभकामनाएँ
    सादर

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  5. आभार यशोदा जी 'उलूक' के मेंंढकों को जगह देने के लिये।

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  6. सुन्दर संकलन ,सभी रचनाएँ बहुत सुन्दर।हमारी याचना मो स्थान देने के लिए ह्रदयतल से धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति, शानदार लिंको का बेहतरीन गुलदस्ता,मोहक विषय मोहक रचनाएं।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय तल से आभार।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर सूत्रों से सुसज्जित आज का संकलन ! मेरी रचना को इस संकलन में स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

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  9. अत्यंत सुंदर प्रस्तुति। हर एक रचना पढ़कर आनंद आया। एक एक करके सब पढ़ा। कोई समकालीन परिस्थितियों पर सुंदर अभिव्यक्ति थी तो कोई आध्यात्मिक और प्रेरणादायक पर सभी मन को आनंद देनेवाली। बाहर वर्षा देखते हुए हर एक कविता पढ़ी। मेरी रचना को स्थान देने के लिये
    हृदय से आभार। आप सबों का स्नेह और प्रोत्साहन अमूल्य है।आप सबों को प्रणाम।

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  10. सावन की बरसातें भावों अनेक रगों में भीगो गई , खूबसूरत प्रस्तुति

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  11. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार 🙏🙏

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  12. बहुत ही सुंदर सराहनीय प्रस्तुति आदरणीय दी
    । बेहतरीन रचनाएँ है हमक़दम में ।मेरे सृजन को स्थान देने हेतु सादर आभार।

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत हलचल पैदा की है मन में आज की लिंक्स ने |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद यशोदा जी |

    जवाब देंहटाएं

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