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बुधवार, 1 जुलाई 2020

1811..जी हाँ, लिख रहा हूँ ... बहुत कुछ..


।। भोर वंदन ।।
"जी हाँ, लिख रहा हूँ ...
बहुत कुछ ! बहोत बहोत !!
ढेर ढेर सा लिख रहा हूँ !
मगर , आप उसे पढ़ नहीं
पाओगे ... देख नहीं सकोगे
उसे आप !
दरअसल बात यह है कि
इन दिनों अपनी लिखावट
आप भी मैं कहाँ पढ़ पाता हूँ"
नागार्जुन
इसी के साथ आज के दिन यानी बुधवार को खास चुनिंदा लिंकों को सहेजने का प्रयास.. 
कृपया आगे बढ़ने से पहले रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें ..
और अपनी , समीक्षात्मक टिप्पणी से हौसलाअफजाई जरूर करें..✍

१.आ० अनिता जी.. लिखे जो खत तुझे
२.आ० कमल उपाध्याय की अफ़वाह
३.आ० अनिता सुधीर आख्या जी- दोहा छंद
४. आ०अनुराधा चौहान'सुधी' जी - काली बदली
५.आ० डॉ. राजीव जोशी जी- ग़ज़ल

🌍🌍

हाथ से लिखे शब्द 
मात्र शब्द नहीं होते 
उनमें हृदय की संवेदना भी छिपी होती है 
मस्तिष्क की सूक्ष्म तंत्रिकाओं का कम्पन भी 
गहरा हो जाता है कभी कोई शब्द
कभी कोई हल्का
🌎🌎

मेरा स्टडि लैंप कल लड़ रहा था मुझसे,
शिकायत है कि मैं रोज मिलता नही उससे,

पहले तो देर रात तक जागकर बातें करता था,
याद है कई बार घर वाले चिल्लाते थे
🌎🌎



**
सोंधी माटी गाँव की,वो खेतों की मेड़ ।
रचा बसा है याद में,वो बरगद का पेड़।।

अथक परिश्रम खेत में,कृषक हुआ जब क्लांत।
हरियाली तब गाँव की ,करे चित्त को शांत।।

🌎🌎



नीले अम्बर को घेरे
शीतल ठंडी पवन मचलती
घिरते हैं मेघ घनेरे।

नयन आस से देख रहे हैं
कब ये बदली बरसेगी।
कहीं हवा उड़ा न ले जाए
ये अखियाँ फिर तरसेगी
🌎🌎

*ग़ज़ल*


वक़्त सच का एक दिन तो आईना दिखलाएगा।

क्यों न होगा आदमी गद्दार फिर तू ही बता
भूखे पेटों को अगर हुब्ब-ए वतन सिखलाएगा
🌎🌎
हम-क़दम का नया विषय
सरहद
कोई भी फिल्मी-गैर फिल्मी गीत के बोल भेजिए

यहाँ देखिए
ब्लॉग सम्पर्क फार्म द्वारा

।। इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ‘तृप्ति’...✍


10 टिप्‍पणियां:

  1. "जी हाँ, लिख रहा हूँ ...
    बहुत कुछ ! बहोत बहोत !!
    ढेर ढेर सा लिख रहा हूँ !
    मगर , आप उसे पढ़ नहीं
    पाओगे ... देख नहीं सकोगे
    उसे आप !
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  2. वन्दन,अभिनन्दन
    बेहतरीन..
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह!खूबसूरत प्रस्तुति पम्मी जी ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही बेहतरीन और चुनिंदा रचनाओं से सजी आज की प्रस्तुति! बधाई!!!

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर रचनाओं का चयन, कहीं वर्षा का आवाहन, कहीं गांवों की सोंधी खुशबू, कोरोना के संकट से जूझता आदमी और मोबाइल के कारण जीवन में आए बदलावों पर गहरी नजर, सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई और आपका आभार पम्मी जी !

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर प्रस्तुति, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीया पम्मी जी।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाकई सभी रचनाएँ बहुत बढ़िया है।

    '' मेरा स्टडि लैंप कल लड़ रहा था मुझसे'' यह रचना तो बिल्कुल ही भिन्न है।
    बेहतरीन प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं

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