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गुरुवार, 12 मार्च 2020

1700.....पलाशी शाम आँखों से बिखरा कहाँ है?

गुरुवारीय अंक में
आप सभी का
स्नेहिल अभिवादन
आज 

पाँच लिंक ने 1700 वाँँ क़दम रखा है
यह संभव हो पाया है
सिर्फ़ और सिर्फ़
आप सभी साहित्य सुधियों एवं
स्नेहिल पाठकों की
वजह से,
आप सभी का
हमारा परिवार हृदय से आभार
व्यक्त करता है।
आप का बेशकीमती साथ एवं
सहयोग सदैव अपेक्षित है।

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मिज़ाज-ए-मौसम बेतरतीब है,
बरसती बूँदें आसमां के क़रीब हैं।
मय्यसर नहीं दो निवाले सुकून के,
ये जरूरी तो नहीं कि वो गरीब़ हैंं।
सिकुड़ी पेशानी के जाएज़ सवाल,
जो गले मिले दोस्त हैं कि रक़ीब है?

★★★★★

अभी होलियाना ख़ुमार उतरा कहाँ है?
हथेलियों में रची हुई मेंहदी अबीरी,
रंग-भंग,मन-मलंग तन थकन में चूर,
पलाशी शाम आँखों से बिखरा कहाँ है?
★★★★★

पढ़िये मेरे द्वारा संजोये गये सूत्र-

★★★★★

फेसबुक

रवाना करने के बाद शुभकामनाओं की खेप
नजर आती है कोई पकवान की तस्वीर
लीजिये रेसिपी भी मांग ली है किसी ने तो
इसके पहले कि जुबान पर टिकता पकवान का स्वाद
बड़े साहित्यिक जलसे की तस्वीरें नुमाया होती हैं
कौन क्या बोल, किसने क्या सुना से ज्यादा
किससे मिले, कितनी तस्वीरें खिंची
के दृश्य आँखों में झरते चले जाते हैं।


★★★★★

ज़िंदगी


ज़िंदगी की परतों के 
भीतर ही कहीं 
छुपी रहती ज़िंदगी 
जैसे छुपा हो 
हारिल कोई 

हरे पत्तों के बीच 

★★★★★★

रंगोत्सव
रंग रंगीला साजना,करें बहुत धमाल।
फगुआ गाय घड़ी- घड़ी,करके मुखड़ा लाल।।
करके मुखड़ा लाल, मरोड़ी मेरी कलाई।
कोमल सी नार मैं, छेड़ों न मेरी सलाई।
भीगी तृप्ति सोच रही, क्यूँ शिव बूटी माजना।
सांवली सूरत में , रंग रंगीला साजना।।


★★★★★


फ़र्क कहाँ हैं?

पूजा में हाथ जोड़ें,हाँथ बांधें,या दुआ में ऊपर उठाएं,
जब मांगते सभी सलामती ही हैं तो फिर फर्क कहाँ है ?

अम्मी कहें,मॉम या के माँ पुकारें अपनी जननी को,
जब माँ की ममता सामान ही है तो फिर फर्क कहाँ है ?

★★★★★

मन की गति कोई न जाने

कभी अर्श चढ़ कभी फर्श पर
उड़ता फिरता मारा मारा ।
मीश्री सा मधुर और मीठा
कभी सिंधु सा खारा खारा।
कोई इसको समझ न पाया
समझा कोई हर कण हर कण।।

★★★★★★

और चलते-चलते
छिपकली

जब वह बिस्तर पर होती है जैसे कानों में बंसी बज उठती है।वह चौंक कर उठ बैठती है। मगरस्विच आन’ करने पर उसे दिखायी पड़ती है बल्ब के पास दीवाल से चिपकी हुई एक घिनौनी छिपकली।रोज ही वह इसे अपने कमरे से भगाती है मगर न जाने किस वक्त वह रेंगती हुई फिर अपनी जगह आ चिपकती है।उसे देखते ही उसका जी मचलाने लगता है।मगर अंधेरा करते ही उसे लगता है वह उसके मुँह पर आ गिरेगी।वह खाने की मेज पर होती तो लगता उस भोजन के बीच कहीं न कहीं वह छिपकली भी जरूर है।बस कौर उसके गले में चिपकने लगता।बड़ी मुश्किल से दो-चार कौर पानी के सहारे निगल कर वह थाली छोड़ देती।उसे किसी भी गीली या मुलायम चीज में छिपकली का ही आभास मिलता।

★★★★★★

आज का यह अंक आप सभी को कैसा लगा?
आपसभी की प्रतिक्रिया उत्साह बढ़ा जाती है।

हमक़दम का विषय

यहाँ देखिये

कल का अंक पढ़ना न भूलें कल आ रहे हैं
आदरणीय रवींद्र जी विशेष
प्रस्तुति के साथ।

#श्वेता

★★★★★★




15 टिप्‍पणियां:

  1. आनन्दित हुआ..
    बेहतरीन प्रस्तुति..
    सादर....

    जवाब देंहटाएं
  2. सभी को हार्दिक बधाई 1700 वें पूरे हो गए...
    सराहनीय प्रस्तुतीकरण

    जवाब देंहटाएं
  3. 1700 वें अंक की मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ अंकित करें आदरणीया ।
    मंच की सार्थकता ऐसे ही बनी रहे तथ हिन्दी व हिदी रचनाओं के उत्थान में इसकी भूमिका दिनानुदिन महत्वपूर्ण होती रहे।

    जवाब देंहटाएं
  4. बढ़िया प्रस्तुति..
    2000 में तीन सौ बाकी है
    हो जाएंगे..
    शुभकामनाएँ....
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  5. तीन सौ ही क्यों तीन लाख से ऊपर होंगे। अनंत की ओर बस चरैवेति चरैवेति। सत्रह सौंवी वर्षगांठ की अखंड बधाई और अशेष शुभकामनायें। हृदयतल से।

    जवाब देंहटाएं
  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  7. पांच लिंकों की आज की विशेष प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें प्रिय श्वेता। ये महफ़िल यूँ ही आबाद रहे । सुंदर अंक , सभी रचनाएँ बेहतरीन ---तृप्ति जी की कुंडली मन मोह गयी। सभी रचनाकारों को नमन। 🙏

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह!1700अंक पूरे होने की हार्दिक बधाई ।ये सिलसिला बस यूँ ही चलता रहे । सभी रचनाएँ बहुत सुंदर ।

    जवाब देंहटाएं
  9. 1700 अंक पूरे होने की अनंत बधाइयाँ। बहुत सुंदर प्रस्तुति..मेरी रचनाओं को शामिल करने के लिए धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  10. १७०० अंक पूरे होने पर बहुत बहुत बधाई |

    जवाब देंहटाएं
  11. मेरी कविता "फर्क कहाँ है"को पाँच लिंकों का आनंद में स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद श्वेता सिन्हा जी !🙏 😊

    जवाब देंहटाएं
  12. 1700 वें अंक की सभी रचनाकारों और चर्चाकारों को हार्दिक बधाई।
    आज का विशेष अंक सराहनीय भूमिका ।
    बहुत सुंदर संकलन ,सभी रचनाकारों को बधाई।
    तेरी रचना को शामिल करने केलिए हृदय तल से आभार।

    जवाब देंहटाएं
  13. 1700 वें अंक की सभी रचनाकारों और चर्चाकारों को हार्दिक बधाई।

    love shayari
    Diwali wishes in hindi
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    जवाब देंहटाएं

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