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बुधवार, 12 जून 2019

1426...यादों का पपीहा..



।।भोर वंदन।।

क्षण-भर सम्मोहन छा जावे!

क्षण-भर स्तंभित हो जावे यह
अधुनातन जीवन का संकुल,
ज्ञान-रूढ़ि की अनमिट लीकें
हृत्पट से पल-भर जावें धुल,
मेरा यह आन्दोलित मानस,
एक निमिष निश्चल हो जावे!
क्षण-भर सम्मोहन छा जावे !!

प्रयोगवाद एवं नई कविता को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने वाले कवि सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय
जी को उनके जन्मदिवस पर कोटि कोटि नमन..समाज के वर्तमान परिस्थितियों को इंगित करती यह रचना..

सांप !
तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।
एक बात पूछूं—( उत्तर दोगे ? )
तब कैसे सीखा डसना—
विष कहां पाया ?
~ अज्ञेय

अब नजर डालें लिंकों पर..✍
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रोज़ कर बैठता हूँ बग़ावतें दिल से,

रोज़ दिल के हाँथो हार जाना पड़ता है.....१


रोज भूलने की कोशिशें करता हूँ,

और रोज़ नाकामियों को छुपाना पड़ता है....२



बड़ी मशक्क़त करता हूँ 

ख़ुद को समझाने की,

रोज हर सबक भूल जाना पड़ता है.....३
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आदरणीया अनुपमा पाठक जी की रचना..


बारिश और छतरी का भी
कैसा अद्भुत नाता है
जब बरसता है अम्बर
तो छतरी
हमारा आसमान हो जाती है
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आदरणीया कुसुम कोठारी जी की खूबसूरत ..
यादों का पपीहा

शजर ए हयात की शाख़ पर

कुछ स्याह कुछ संगमरमरी
यादों का पपीहा।
खट्टे मीठे फल चखता गीत सुनाता
उड़-उड़ इधर-उधर फूदकता
यादों का पपीहा।


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ब्लॉग व्याकुल पथिक से...रामनाम सत्य 

( लघु कथा )



       क्या कोई शवयात्रा है ? सड़क पर तो ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा था..   फिर क्यों भरी दुपहरी में यह व्यक्ति  ऐसे बुदबुदा रहा था .!  क्या यह उसका अंतर्नाद है अथवा विरक्त मन की आवाज ..ठीक से  समझ नहीं पा रहा था मैं, उसकी इस मनोदशा को..!!!

      देखने में विक्षिप्त तो न था..!  सोसायटी में खासी पहचान है उसकी .. कपड़े भी ठीक-ठाक पहन रखे हैं ..केश जरूर अस्त -व्यस्त है..
    न जाने क्या चल रहा था उसके दिमाग में..  बगल सेश गुजरे पहचान वाले लोग तक उसे दिखाई नहीं पड़ते. धक्का खाये जा रहा था औरों से.. इस  बावले को हो क्या गया है ..?

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आदरणीया सुषमा वर्मा जी के शब्दों के साथ यहीं तक..सभी पढ़ें कि..

तुम्हे आज लिखती हूँ मैं,

फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं...

उजली सुबह लिखती हूँ मैं,
ढलती शामे लिखती हूँ मैं..
गहरी खमोश राते लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..


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हम-क़दम का नया विषय

यहाँ देखिए

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।।इति शम।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह 'तृप्ति'..

5 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    आभार..
    अज्ञेय जी की रचना के लिए...
    बेहतरीन प्रस्तुति...
    सादर।...

    जवाब देंहटाएं
  2. मोहक भुमिका।
    अज्ञेय जी की शानदार पंक्तियाँ चार चांद लगा रही है सुंदर प्रस्तुति पर।
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह
    लाजवाब प्रस्तुति
    उम्दा रचनाएं
    🙏🙏🙏

    जवाब देंहटाएं

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