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मंगलवार, 29 जनवरी 2019

1292.....एक सही, एक करोड़ गलत पर भारी होता है

सारे भारत का मौसम इस समय 
भारी है भारतियों पर
कहीं बर्फ है तो...
कहीं बारिश है..
कहीं कुछ तो कहीं कुछ
पर बदली जरूर है हर जगह
ऐसे में हम... 
भाई कुलदीप जी की 
उम्मीद नहीं न कर सकते...
सादर अभिवादन...

हाथ क्या मिलाया था दिल ही दे दिया था उन्हें
हाथ अपने देखे तो उंगलियां ही गायब हैं

यूं ही गर्भ पे जो चली आपकी ये मनमानी
कल जहां से देखोगे ल़डकियां ही गायब हैं

वे भले प़डोसी थे, आए थे नहाने को
बाथरूम की तब से टौंटियां ही गायब हैं


मखमली से फूल नाज़ुक पत्तियों को रख दिया
शाम होते ही दरीचे पर दियों को रख दिया

लौट के आया तो टूटी चूड़ियों को रख दिया
वक़्त ने कुछ अनकही मजबूरियों को रख दिया


मूर्त रूप हो कोई, या हो महज कल्पना,
या हो तुम, मेरी ही कोई, सुसुप्त सी चेतना,
हर घड़ी, हर शब्द, तेरी ही विवेचना!

पुनर्सृजित हो जाते हो, रचनाओं में तुम ही...


रौशनी में डूबा हुआ सारा शहर - 
लगता है बेहद ख़ूबसूरत,
उड़ान पुल हो, या 
आकाश पथ 
से झाँकते 
मग़रूर निगाहें, काश देख पाते, 


ठहरो!!!
मेरे बारे में कोई धारणा न बनाओ।
यह आवश्यक तो नहीं,
कि जो तुम्हें पसंद है,
मैं भी उसे पसंद करूँ।
मेरा और तुम्हारा
परिप्रेक्ष्य समान हो,
ऐसा कहीं लिखा भी तो नहीं।

अखबार तो अखबार ही होता है
पढ़िए एक अखबार की कतरन
सुना गया है
बैकुंठ में वैसे तो 
सब कुछ होता है 
और 
अलौकिक होता है 
फिर इस लोक में 
क्यों कोई आने को 
इतना आतुर होता है
ये उसकी समझ में 
आने से बहुत 
दूर होता है 
-*-*-*-*-
अब बारी है हम-क़दम  की
छप्पनवा क़दम
विषयः
याद
उदाहरण

फिर से आज बौराई शाम
देख के तन्हा मन की खिड़की
दबे पाँव आकर बैठी है
लगता है आज न जायेगी
यादों में पगलाई शाम

अंतिम तिथिः 02 फरवरी 2019
प्रकाशन तिथिः 04 फरवरी 2019

आदेश दें
यशोदा



14 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम की सच्चाई की बोलियां ही गायब हैं
    आदमी के अंदर से बिजलियां ही गायब हैं..

    बिल्कुल सच्ची बात ,इसे गयब रखने में ही इस अर्थ युग में सम्वेदनशील इंसान की भलाई है, अन्यथा भावनाओं में बह कर वह अपने लिये अंधकार का सृजन करेगा, उपहास का पात्र होगा..?
    चापलूसी की भाषा ही अब सब समझ रहे हैं, प्रेम की नहीं।

    मौसम जो हमें खराब लग रहा है,किसानों को खुश कर रहा है। बस ओला न पड़े।

    सभी को सुबह का प्रणाम, सुंदर संकलन ।
    होटल के बाहर अभी प्रथम दर्शन कबाड़ बटोरने वालों का हुआ, मानो प्रकृति ने उन्हें कोई सुरक्षा कवच पहना रखा हो।

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  2. बेहतरीन प्रस्तुति । सुंदर भावों को स॔जोती। शुभकामनाएं
    शुक्रिया ।

    जवाब देंहटाएं
  3. सस्नेहाशीष संग शुभकामनाएं छोटी बहना
    सुंदर संकलन

    जवाब देंहटाएं
  4. सुंदर संयोजन आज का ...
    अच्छे लिंक्स हमेशा की तरह ... आभार आज मेरी ग़ज़ल को यहाँ जहः देने के लिए ...

    जवाब देंहटाएं
  5. सुन्दर संकलन। आभार 'उलूक' की रद्दी की एक खबर दिखाने के लिये यशोदा जी।

    जवाब देंहटाएं
  6. शानदार प्रस्तुतिकरण उम्दा लिंक संकलन...

    जवाब देंहटाएं
  7. उम्दा संकलन |
    https://kavivirajverma.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति👌
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत ही सुंदर लघु प्रस्तुति आदरणीय यशोदा दीदी |दिगम्बर जी की रचना लाजवाब है तो उलूक दर्शन का भी जवाब नहीं | सभी रचनाकारों को सस्नेह शुभकामनयें और आपको हार्दिक बधाई | सादर

    जवाब देंहटाएं
  10. सादर नमस्कार यशोदा दी ,लाजबाब संकलन ,सभी रचनाकार को सादर नमन

    जवाब देंहटाएं
  11. उत्तम बहुत शानदार प्रस्तुति हर रचना लाजवाब।
    सुशील सर और नासवा जी के ब्लॉग पर टिप्पणी नही हो पा रही दोनों ही लाजवाब प्रस्तुति।
    सभी रचनाकारों को बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  12. सुंदर अंक
    बेहतरीन रचनायें
    सादर आभार ......प्रेम की, सचाई की, बोलियाँ ही गायब हैं -अशोक अंजुम जी रचना संकलित करने के लिए

    जवाब देंहटाएं

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