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शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

1169....हसरतों के बाजार में सब्र की आजमाइश है

आज के दिन भारतमाता फूली नहीं समाती, 
उनकी गोद को धन्य करने भगत सिंह 
जैसा सपूत जो आँचल में आया था।
-*-*-*-
सुप्रभातम्
चलिए आज हम साहित्य सिंधु की
एक मीठी निर्झरी की कुछ बूँदों का
आस्वादन करते हैं।
आज पढ़ते हैं
जयशंकर प्रसाद जी की कुछ रचनाएँ,

आप भी आनंद लीजिए

अधरों में राग अमंद पिए
अलकों में मलयज बंद किए
तू अब तक सो‌ई है आली
आँखों में भरे विहाग री!
समय भागता है प्रतिक्षण में,
नव-अतीत के तुषार-कण में,
हमें लगा कर भविष्य-रण में,
आप कहाँ छिप जाता है
सब जीवन बीता जाता है
सूने नभ में आग जलाकर
यह सुवर्ण-सा ह्रदय गला कर
जीवन-संध्या को नहलाकर 
रिक्त जलधि भरने वालों को?
अब चलिए आप के द्वारा सृजित रचनाओं के
संसार में

आदरणीय दिलबाग सिंह विर्क जी

ये सच है, ये यादें जलाती हैं तन-मन को मगर 
तन्हाइयों में अक्सर इनका ही सहारा होता है। 

क़त्ल करने के बाद दामन पाक नहीं रहता इसलिए 
ख़ुद कुछ नहीं करता, सितमगर का इशारा होता है। 
★★★★★★
आदरणीया अनिता जी
भावों की हाला पी पीकर
होश गँवाए ठोकर खायी,
व्यर्थ किया पोषण उस 'मैंका

बुनियाद जिसकी नहीं पायी
★★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम जी

प्रवाह प्रबल मन के आवेगों में,
कहीं दूर बहा ले जाता है,
कण-कण प्लावित कर जाता है,
बेवश कर जाता है....
★★★★★★
आदरणीया पम्मी जी


तिजारत-सरे-बाजार में तलबगार खुश है
फिर क्यूँ तुम गुजरे गाफिल की तरह।

शोख,वफा,जज़्ब में हिज्र की आजमाइश है
फिर क्यूँ ये ठहरे साहिल की तरह।
★★★★★★
आदरणीय शशि जी

 रात्रि की इस तन्हाई में जब हम दो ही साथ होते हैं , अक्सर यह सवाल मैं अपने मासूम दिल से पूछता हूँ कि  बंधु माना कि हम किसी के नहींं हो सके ना कोई हमारा ही हुआ ,तो भी तुम्हें इन नगमों की थपकियों से नींद की देवी के आगोश में पनाह दे ही देता हूँ। देखों न हम -तुम आपस में कितने लड़ते -झगड़ते हैं, रूठते- मनाते हैं और जीवन का हर दर्द खुशी- खुशी बांट लेते हैं। यह मान लेते हैं कि हम दोनों की नियति है, यह तन्हाई। हाँ, यह सत्य है कि तुम्हारी अनेक चाहतों को मैं पूरा नहीं कर सका हूँ । तुम्हारी उदासी कभी- कभी मेरे मुस्कुराते चेहरे पर भी झलक आती है। तुम्हारी मासूमियत पर , तुम्हारी कसमसाहट पर , तम्हारी बच्चों जैसी बातों पर जब तरस मुझे आता है , तो एक टीस  हृदय में उठती है। स्मृतियों के पटल पर अतीत का मानचित्र बनने लगता है -
★★★★★★

आज सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिवस है।
सुनिये कोकिल कंठी की आवाज़ में
मेरी पसंद का एक गीत


★★★★★★

आज का अंक आपको कैसा लगा?
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जरुर दीजिए।

हमक़दम के विषय में

आज के लिए इतना ही
कल आ रही हैं विभा दी
अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ


17 टिप्‍पणियां:


  1. इंकलाब जिंदाबाद...
    शहीद-ए-आजम भगत सिंह का यह बुलंद नारा आज भी नौजवानों ,कामगारों और अपने हक अधिकार को लेकर प्रदर्शन करने वाले तमाम लोगों के लिए जोश भरने वाला है। ऐसे महान भारत माता के सपूत को मेरा नमन और हमारा समाज उनसे प्रेरणा प्राप्त करते रहे ,भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष जारी रहे, ऐसी कामना हम करते हैं। जय हिन्द

    ******
    कोई नहीं है फिर भी है मुझको
    कोई नहीं है फिर भी है मुझको
    क्या जाने किसका इंतज़ार
    हो ओ ओ..
    कोई नहीं है फिर भी है मुझको
    क्या जाने किसका इंतज़ार
    हो ओ ओ..
    ये भी ना जानूँ लहेरा के आँचल
    किसको बुलाये बार बार...

    "पत्थर के सनम" चित्रपट में लता दीदी का गीत है यह ... सच कहूँ,तो अपने सदाबहार गायक मुकेश जी के बाद लता दी मुझे बहुत पसंद हैंं .. वे सौ बसंत पूरा करें ,यही मेरी शुभकामना है।
    *******
    श्वेता जी शब्दों के रंग से सजा बेहद खुबसूरत आजका अंक है। मुझ नादान की बातों को ब्लॉग पर स्थान देने के लिये हृदय से आभार आपको।
    ******

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  2. शुभ प्रभात
    अब श्रमबिन्दु पोंछ लीजिए
    बेहतरीन प्रस्तुति
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. जयशंकर प्रसाद जी की रचनाओं से ब्लॉग का स्वाद ही बढ़ गया है...नये रचनाकारों को साहित्य सृजन की विधा पता चलेगी.
    सभी लिंक्स नायाब रहे आज की हलचल के.
    लजा जी का यह गाना मुझे भी बेहद पसंद है.

    जवाब देंहटाएं
  4. अप्रतिम प्रस्तुति ...
    बार-बार पढने हेतु विवश है मन...
    बधाई ....व...सुप्रभात

    जवाब देंहटाएं
  5. शुभ प्रभात
    बेहतरीन प्रस्तुति
    प्रस्तूत करने का नायाब तरीका
    उम्दा
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. कविवर जयशंकर प्रसाद जी की रचनाओं के साथ बहुत ही शानदार प्रस्तुतिकरण....उम्दा लिंक संकलन...

    जवाब देंहटाएं
  7. बेहद खूबसूरत प्रस्तुति के साथ आज की हलचल।उम्दा लिंकों के बीच मेरी रचना को स्थान देने के लिए धन्यवाद।
    शुभकामनाएँँ।

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  8. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण संकलन।

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह!!श्वेता ,बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति । सभी लिंक बहुत ही सुंदर ।प्रसाद जी की रचनाएं पढवाने हेतु धन्यवाद ।
    भारत माता के महान सपूत को शत शत नमन ।

    जवाब देंहटाएं
  10. बेहतरीन रचनाएं शहीद भगत सिंह जी को शत् शत् नमन 🙏 सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  11. भारत के महान सपूत शहीद भगतसिंह को विनम्र श्रद्धांजलि ! जयशंकर प्रसाद जी की कालजयी रचनाओं का रसास्वादन करने के लिए शुक्रिया..सुंदर सूत्रों से सुसज्जित आज के अंक के लिए बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  12. वाह आज का दिन हुतात्मा भगत सिंह का जन्म दिवस!!
    हर दिल अजीज कोकिल कंठी आदरणीय लता जी का जन्म दिन, और साथ ही काव्य सम्राट प्रसाद जी की रस से सरोबार सरस रचनाओं का आस्वादन, आज का अंक इतनी विशिष्टता समेटे सुंदर लिंको के साथ, मन प्रसन्नता से भर गया श्वेता बहुत बहुमूल्य प्रस्तुति के लिये आभार और बधाई । सभी रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं

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