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बुधवार, 27 जून 2018

1076.. आज बातें दिल्ली की मुहावरे से..



आज बातें दिल्ली के मुहावरे से..

हैं न कुछ अलग सी "आटे की आपा" और..इस "आठ अठारह करना" पर तो सब राजी 
फिर भी सब की  अजीज़ है दिल्ली..

इसी के साथ रूबरू होते है आज की शामिल लिंकों से..

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देश केे लोकतंत्र  को 21 महीने का ग्रहण लगाने वाली इमरजेंसी पर आज बस इतना ही कह सकती हूं  कि…इतिहास की एक घटना जिसने भारतवर्ष की  राजनैतिक दिशा-दशा, आरोह-अवरोह, घटना-परिघटना,  विचारधाराओं का विचलन और समन्‍वय के साथ-साथ  हमारी पीढ़ियों को लोकतंत्र की उपयोगिता व संघर्ष को  बखूबी परिभाषित कर दिया….उसे शब्‍दों में समेटा नहीं  जा सकता।





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दिग्म्बर नसवा जी ...एक खूबसूरत गज़ल ..



ये दाव खुद पे लगा दिया है

तुम्हारे ख़त को जला दिया है

तुम्हारी यादों की ईंट चुन कर 

मकान पक्का करा दिया है

जहाँ पे टूटा था एक सपना





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अनुराधा जी की रचना..




निशब्द हुं मैं शब्द नहीं है मेरे पास

  देश में फैले भ्रष्टाचार से

  धोखा फरेब के जाल से

  गरीबों के उत्पीड़न से

  किसानों की बदहाली से

निशब्द हुं मैं शब्द नहीं है मेरे पास





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ब्लॉग ब्रज की दुनिया से सारगर्भित लेख..



मित्रों, लगभग हर चुनाव में हम इस नारे को सुनते हैं-तख़्त बदल दो ताज बदल दो बेईमानों का राज बदल दो. एक समय था जब समाजवादी होना ईमानदारी का प्रमाणपत्र माना जाता था लेकिन आज अखिलेश टोंटी चोर के नाम से जाने जाते हैं. यूपी की ही तरह बिहार में भी पिछले २८ सालों से समाजवादियों का शासन..
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अपना ही आशियाना कोई उजाड़ता नही है

आइना  घर का  उदास रहा करता है  अब

तेरे बाद उसकी ओर कोई निहारता नही है

आँगन की तुलसी भी दूब से  घिर  गई  है

उन गमलों से घास कोई उखाड़ता 



अमित मिश्रा जी के बिखरा आशियाना... से आज की समाप्ति से पहले..

अब  इस सप्ताह का विषय
हम-क़दम के पच्चीसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........



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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..









13 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात सखी
    दिल्ली को मुहावरे....
    एक बार में केवल तीन
    पूरा लिखिए ना
    सही व सटीक संकलन
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. शानदार प्रस्तुति मुहावरे नये नये वो भी दिल्ली के बहुत सुंदर आकर्षक भुमिका पम्मी जी सभी रचनाऐं बहुत सुंदर सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. मुहावरे बहुत अच्छे लगे
    मुहावरे प्रयोग करने से कम शब्दों में विशेष बात कही जाती रही है
    उम्दा संकलन
    शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  4. सच है ... दोल्ली के मुहावरों की बात ही अलग है .... मुहावरों का अलग ही मजा है ...
    आपका आभार मेरी ग़ज़ल को आज के लिंक्स में जगह देने के लिए ....

    जवाब देंहटाएं
  5. सारगर्भित भूमिका के साथ सुंदर रचनाओं का सराहनीय संकलन आदरणीया पम्मी जी।
    बहुत अच्छा अंक है।

    जवाब देंहटाएं
  6. सुंदर संकलन सादर आभार आपका मेरी रचना को साझा करने के लिए

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!!बहुत खूबसूरत संकलन ।

    जवाब देंहटाएं
  8. दिल्ली के रोचक नये मुहावरों के साथ समसामयिक बिषयों पर आधारित विचारणीय रचनाओं के सफल संयोजन से युक्त सुन्दर प्रस्तुति के लिये बधाई आदरणीया पम्मी जी.
    इस अंक में चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनायें.

    जवाब देंहटाएं
  9. अत्यंत सुंदर मुहावरे एवं खूबसूरत संकलन

    जवाब देंहटाएं
  10. दिल्ली के मुहावरे ...गजब शोध ...कार्य और आगे बढाइये ..संकलन उम्दा है

    जवाब देंहटाएं

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