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गुरुवार, 17 अगस्त 2017

762.....बातें हैं बातों का क्या

सादर अभिवादन...
आज अभी तक भाई रवीन्द्र जी दिखे नहीं...
यदि इस प्रस्तुति के बनते-बनते भी 
उनकी प्रस्तुति नज़र आई तो भी
यह प्रस्तुति रुकेगी नहीं...
उनकी पसंदीदा रचनाएँ यहां जुड़ सकती है...

....आज देखिए अब तक की पढ़ी रचनाओं से कुछ चयनित रचनाएँ..

मन की ये उर्वर जमीं, थोड़ी रिक्त है कहीं न कहीं!
सींचता हूँ मैं इसे, आँखों में भरकर नमीं,
फिर चुभोता हूँ इनमें मैं, बीज भावों के कई,
कि कभी तो लहलहाएगी, रिक्त सी मन की ये जमीं!

कोई बेनामी ख़त चाहे 
किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए 
ज़िन्दगी का कोई नया 
शब्दकोष ही क्यों न गढ़ लिया जाये 
अंततः 
बातें हैं बातों का क्या ... 

राह में रौशनी की, थे सभी हमराह मेरे
अँधेरे बढ़ गए तो साये लापता मिले

आओ तन्हाई में दो-चार बात तो कर लो
महफ़िल में तुम हमें मिले तो क्या मिले

कुल चालीस साल नौकरी की थी सिस्टर मथाई ने, उस बड़े अस्पताल के ICU में, शुरु में तो सब ठीक था पर तीस साल की नौकरी के बाद वो Psychic (अतींद्रिय क्षमता युक्त) हो गयी थीं, कुछ मरीजों से उनको एक खास तरह की गंध आने लगती थी, और अपवादरहित रूप से वो सब मरीज अगले आठ घण्टे के भीतर मर जाते थे, चाहे रिपोर्ट्स या डॉ कुछ भी कह रहे हों... सिस्टर मथाई इस गंध को मृत्युगंध कहतीं थी।

लगे यहाँ  राजा भी भिक्षुक
नेता मत के पीछे चलता,
सबने गाड़े अपने खेमे
बंदर बाँट खेल है चलता !

गाँव दिन भर  चादर तान के सोया था
सांझ ढले घरों में उठते धुएँ से सुगबुगाहट हुई है ।
भोर होते ही  वह फिर सो जाएगा।

चलते-चलते ये वीडियो देखिए..
महिलाओँ को अपनी रक्षा करना 1947 सो सिखाया जा रहा है..



19 टिप्‍पणियां:

  1. सस्नेहाशीष संग शुभ दिवस छोटी बहना 💐😍
    उम्दा लिंक्स का चयन

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह ! बहुत ही खूबसूरत लिंक संयोजन । बहुत सुंदर आदरणीया ।

    जवाब देंहटाएं
  3. शुभप्रभात....
    सुंदर संकलन....
    कहां गये भाई रविंद्र जी....
    सादर....

    जवाब देंहटाएं
  4. सुप्रभात यशोदा जी ! बहुत सुन्दर सूत्र ! आज की प्रस्तुति में मेरे ब्लॉग सुधीनामा पर मेरे आलेख 'यह कैसा विरोध' के चयन की भी सूचना दी थी रवीन्द्र भाई ने ! कोई बात नहीं ! वे कहीं व्यस्त हो गए हैं ऐसा लगता है ! आपने बहुत सार्थक लिंक्स लगाए हैं ! आभार !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय दीदी
      सादर नमन
      कल भाई रवीन्द्र जी की प्रस्तुति रात 9 बजे कर डैशबोर्ड पर नहीं दिखी
      तो त्वरित व्यवस्था करनी पड़ी
      खेद है....
      सादर

      हटाएं
  5. बहुत उम्दा रचनाओं का चयन
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार

    जवाब देंहटाएं
  6. शुभ प्रभात !


    आज का सुन्दर पठनीय लिंकों से सुसज्जित अंक प्रस्तुत करने के लिए आदरणीय यशोदा बहन जी का धन्यवाद एवं बधाई।

    तय समय पर प्रस्तुति मेरे द्वारा प्रेषित न की जा सकी अतः आपने सुधि पाठकों एवं रचनाकारों की अभिरुचि और लय को बनाये रखने का जो तुरत -फुरत प्रयास किया वह लाजवाब है।

    सभी मेरे द्वारा चयनित रचनाओं के आदरणीय रचनाकारों (गगन शर्मा जी, दीदी साधना वैद जी ,दिग्विजय अग्रवाल जी ,अंजू शर्मा जी ) को खेद सहित सूचना पोस्ट कर दी गयी है। आदरणीय लोकेश जी की रचना कॉमन रही अतः खेद की सूचना नहीं भेजी गयी, उन्हें बधाई।

    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं ! आभार सादर।

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    उत्तर
    1. उत्सुक सुधि पाठक इन रचनाओं के लिंक यहाँ क्लिक करके पठन का आनंद ले सकते हैं।-
      1.सोशल -मीडिया के पार्श्व-प्रभाव पढ़िए आदरणीय दीदी साधना वैद जी के सराहनीय आलेख में -
      यह कैसा विरोध......साधना वैद
      http://sudhinama.blogspot.in/2017/08/blog-post_12.html

      2. तकनीक का ख़ामियाज़ा यहाँ भी बयां हो रहा है, गगन शर्मा जी की एक विचारणीय प्रस्तुति -
      महिलाओं की "पोस्ट" पर न्यौछावर "कुछ" लोगों की अजीब मानसिकता.....गगन शर्मा, कुछ अलग सा

      http://kuchhalagsa.blogspot.in/2017/08/blog-post_76.html



      3. हमने ख़ूब सुना और पढ़ा है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए नियुक्त अमला ख़ुद भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है। कुछ ऐसा ही समाज का भ्रष्टाचार उजागर करती व्यंग के सिरमौर स्वर्गीय हरिशंकर परसाई जी की आदरणीय दिग्विजय अग्रवाल जी द्वारा प्रस्तुत एक शानदार कृति-
      अश्लील .....हरिशंकर परसाई
      http://digvijay4.blogspot.in/2017/08/blog-post_16.html

      4. हिंदी के जाने माने साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध कवि डॉक्टर चंद्रकांत देवताले जी का विगत सोमवार 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। "पाँच लिंकों का आनंद" उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंजू शर्मा जी द्वारा प्रस्तुत उनकी दस प्रतिनिधि रचनाऐं पेश कर रहा है -

      चंद्रकांत देवताले की दस कवितायें...अंजू शर्मा





      हटाएं
    2. चंद्रकांत देवताले की दस कवितायें...अंजू शर्मा


      http://swayamsiddhaa.blogspot.in/2017/08/blog-post_16.html


      हटाएं
  7. मभावस्निग्ध सुप्रभात। हलचल के अंक का नियमित पाठक हूँ। कभी कभी अपनी रचनाओं को इस सरिता में प्लावित होते देखकर मन प्रसन्न हो उठता है। सभी का धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  8. आदरणीय दीदी शुभ प्रभात
    आपातकालीन परिस्थितियों में बनाई गई प्रस्तुति भी लाज़वाब
    सुन्दर लिंक संयोजन ,रचनाओं को चुनने में त्वरित निर्णय ,
    काश हमारे देश के न्यायालय भी ऐसे ही होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती।
    आभार ,"एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
  9. सुप्रभात यशोदा जी . बेहद सुन्दर संयोजन .अपने लिंक संयोजन में मुझे शामिल करने के लिए‎ बहुत बहुत‎ आभार .

    जवाब देंहटाएं
  10. सुप्रभात दी:)
    बहुत सुंदर संयोजन और सराहनीय रचनाएँ आज के लिंकों की। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  11. सुप्रभात यशोदाजी, पठनीय सूत्रों का संयोजन, मुझे भी शामिल करने के लिए आभार !

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर संकलन..
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  13. उम्दा लिंको का संकलन....
    सुन्दर प्रस्तुतिकरण...

    जवाब देंहटाएं
  14. बढ़िया प्रस्तुति हमेशा की तरह। जारी रहे।

    जवाब देंहटाएं

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