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बुधवार, 16 अगस्त 2017

761..संजिदा सहिफा के ताल्लुकात आजमाने से हैं..

१ ६ /० ८ /२ ० १ ७ 
|| ऊँ भानवे नमः ||
 | मांगल्यम सुप्रभात |

प्रारम्भ इस कथ्य से..

कुछ तो बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़मॉ हमारा
(इकबाल)

स्वतंत्रता  दिवस और जन्माष्टमी पर्व के सूर्य दर्शन के पश्चात् 
आज यानि 16 अगस्त 2017 का प्रारम्भ कर्मयोग संकल्प से करें..

बहुत हुई विचार- विमर्श और बातें
स्वतंत्रता मात्र स्व तक सीमित न रह स्व के विस्तार से हैं..

नेहरू जी ने कहा
 हमने किस्मत से बाजी लगाई थी, एक इकरार किया था,
 प्रतिज्ञा की थी, वक्त आया कि हम इसे पूरा करें, ....

चलिए ये तो हुई समसमायिक विषयों की बातें ..
अब लिंक से समबन्धित मुद्दें की ओर गौर फरमातें हैं..

अच्छा हो...
जो फसाने में दफ्न  होनें से पहले
शिद्दत से हर किरदार निभाए..
संजिदा सहिफा के ताल्लुकात आजमाने से हैंं....

 चलिए  रूबरू होते हैं आदरणीय  दिगम्बर नसवा जी की सुंदर सोच और लेख से ..



पर नहीं स्वीकार अपने वीर यूँ कटते रहेंगे

दक्ष हो कर आज फिर प्रतिशोध तो लेना जी पड़ेगा
सर्प कब तक आस्तीनों में छुपे पलते रहेंगे

एक ही आघात में अब क्यों नहीं कर दें बराबर 

अटूट बंधन  ब्लॉग से 



                  निधि की शादी को चार साल हो गए हैं वह पति के साथ नासिक में रहती है | |उसके पति उसे बहुत प्रेम करतें हैं उसका दो साल का बेटा है निधि के माता – पिता निधि की ख़ुशी देख कर बहुत खुश होते हैं अक्सर बताते नहीं थकते उनके दामाद जी उन्की बेटी से कितना प्रेम करते हैं जब भी निधि मायके आती है साथ 
    आदरणीय विश्व मोहन द्वारा  विचारशील आलेख...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी पर गहराई से नज़र डालें तो इस बात का स्पष्ट आभास मिलता है कि यह संघर्ष यात्रा भी पूरी तरह इस देश के सनातन माटी के संस्कार से सिक्त होकर ही निकली है।वैचारिक विभिन्नताओं की अनगिनत धाराओं का अद्भुत समागम है- हमारी आज़ादी की प्राप्ति यात्रा। कोई नरमकोई गरम। कोई उदारकोई उग्र। कोई दामकोई वाम। कोई नेशनलकोई सोशलिस्ट। कोई स्वराजीकोई इम्पेरिअलिस्ट। कोई पूंजीवादीकोई मार्क्सिस्ट। तो कोई गांधियन..

            ब्लॉग उड़न तश्तरी ....से 
हम हिन्दुतानी अति ज्ञानी...जिसकी भद्द न उतार दें बस कम जानिये.
साधारण सा


 आदरणीय रवीन्द्र  सिंह यादव  द्वारा रचित  सवेदनशील रचना.. 


सीवर / गटर में मौत 
सरकारी अस्पताल में मौत 
खेत -खलिहानों में मौत 
जंगलों /अरण्यों में मौत


आज़ की प्रस्तुति यही तक..
हिन्दी ब्लॉगिग में टिप्पणी
 भाषा के  मेयार को उपर  ले जाती है...
  
।।इति शम।।
धन्यवाद।






15 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय पम्मी जी आज का अंक अत्यंत विचारणीय
    रवींद्र जी से लेकर विश्वमोहन जी ,दिगम्बर साहब तक ,
    प्रेम का ओवर डोज वंदना वाजपेई जी ने
    सही कहा है रिश्तों का आधार विश्वास
    बहुत सुन्दर संकलन
    सोचने को विवश करती ,आभार
    "एकलव्य"

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  2. शुभ प्रभात..
    प्रस्तुति काफी से अधिक श्रेष्ठ
    आपके श्रम को नमन
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. नमस्ते,
    वाह ! सुन्दर वैचारिक लिंकों का संकलन।
    उत्सव के बाद दायित्वों,संकल्पों को पूरा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति सुफल के लिए लाज़मी है।
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं !
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार पम्मी जी।
    बधाई ताज़गी भरे अंक प्रस्तुतीकरण के लिए।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर सराहनीय एवं पठनीय लिंकों का समन्वय आज के अंक में पम्मी जी सार्थक प्रयास के लिए आपको बधाई एवं चयनित सभी रचनाकारों का हार्दिक शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  5. आदरणीय पम्मी जी --सुप्रभात | आजके सुंदर संकलन पर नजर डाली -- बहुत ही अच्छी रचनाएं चुनी आपने | सही कहा ध्रुव जी ने -- आज के संकलन के सभी बड़े नामों को एक साथ पढ़ना बहुत अच्छा अनुभव है | सभी को बहुत बधाई और आपको भी हार्दिक शुभकामना और बधाई |

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण.....
    उम्दा लिंक संकलन....

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर आज का संकलन पम्मी जी विचारणीय ।
    बेहतरीन

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  8. बहुत सुन्दर संकलन तैयार किया आपने पम्मी जी , मेरी रचना को स्थान देने के लिए धन्यवाद ... वंदना बाजपेयी

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  9. बेहतरीन लिंक संयोजन ! बहुत सुंदर आदरणीया ।

    जवाब देंहटाएं
  10. एक से बढ़कर एक चर्चायें। हलचल जोरों पर है। जारी रहे । शुभकामनाएं।

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  11. सुन्दर ... लाजवाब और चिंतन करते हुए आलेख औ रचनाओं को सज्जित किया है आज की हलचल में ... आभार मुझे भी जगह देने के लिए आज ...

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  12. बेहतरीन रचनाओं का संकलन है आज भी हलचल की प्रस्तुति । इंतजार और उत्सुकता अगले अंक के लिए बनी रहती है । शुक्रिया पम्मीजी ।

    जवाब देंहटाएं

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