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मंगलवार, 18 जुलाई 2017

732....जब अपनों से जंग हो, तो हार जाना चाहिए

सादर अभिवादन..
भाई कुलदीप जी रुद्राभिषेक में व्यस्त हैं आज
पहली बार व्हाट्सएप्प का उपयोग हुआ है
सूचना का आदान प्रदान के लिए...
प्रस्तुत हैं मेरी पसंद जो मैंने आज पढ़ी....

छोटी लहरों पर ही, पड़ते हैं पहरे और
जिन्दगी की ज़ोर - हवा हैं कायम..
पर मेरी फसाने की, मनमानी 
अब भी बाकी है

वधू बिन शादी , शादी बिन प्यार ,
बिन शादी के लिव इन यार। 
जब ऐसा व्यवहार , तो व्यर्थ संस्कार !

मिले जीवन के पथ कितने ही सहारे,
मन के उस जिद्दी से कोने से बस हम हैं हारे,
खाली खाली सा रहता हरदम वो कोना!
वो सूना सा कोना चाहे तेरा ही होना!

करता हूँ अब अंतिम अधिकार समर्पित
याद नही  मैं  अब  उसको  कर  पाऊंगा ।
मर्म  छुपा  लूँगा  दिल  में  सच  कहता  हूँ
अब   मैं  नही   किसी   को   बतलाऊँगा

मझधार की
उछलती  लहरें
बुला रही हैं,
कब तक
सिमटा हुआ
बैठा रहेगा किनारों में।

देखें कब बूंदों के सोंधेपन से
भरेंगे नथुने सरगोशी कराती है
कब रिमझिम सुरों से हर्षोन्माद
जगेंगे धरा बुदबुदाती है ,

इस प्रस्तुति का समापन इन पंक्तियों के साथ
कभी जिन्दगी का 
ये हुनर भी 
आजमाना चाहिए,
जब अपनों से 
जंग हो, तो 
हार जाना चाहिए








12 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात दी,
    सुंदर पठनीय लिंकों का चयन और आपकी सीख भरी पंक्तियाँ।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत उम्दा रचनाएं
    खूबसूरत संकलन

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर संकलन..
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए धन्यवाद।
    लिंक का समापन खूबसूरत सीख के साथ..
    बहुत बढिया।

    जवाब देंहटाएं
  4. शुभप्रभात
    आदरणीय, ''यशोदा दीदी''
    सुन्दर प्रस्तुतिकरण, उम्दा लिंक संयोजन
    आपका हृदय से आभार।
    "एकलव्य

    जवाब देंहटाएं
  5. आदरणीय दीदी शुभप्रभात....
    सुंदर लिंक चयन किया आपने....
    mobile हमेशा साथ रहता है....
    Whatsapp सूचना देने का सबसे उचित व सस्ता माध्यम है....
    मैं प्रस्तुति कंप्यूटर पर ही बनाता हूं....
    इस लिये घर या कार्यालय से दूर होने पर....
    पांच लिंकों का आनंद से...कभी-कभार अवकाश हो जाता है...
    पुनः आभार आप का....

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर आज की प्रस्तुति . धन्यवाद पांच लिंकों का आनंद.

    जवाब देंहटाएं
  7. बेहतरीन सूत्रों से सुसज्जित अंक प्रस्तुत किया है आदरणीय यशोदा बहन जी ने। आभार सादर। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई। मेरी रचना :ख़ालीपन से दूर ..... को स्थान देने के लिए आभार।

    प्रस्तुति के समापन पर लिखी गयीं पंक्तियाँ वृहद शिक्षा का भंडार हैं जिन पर ग्रन्थ लिखे जा सकते हैं किन्तु उन्हें आत्मसात करते-करते हम अपना बहुमूल्य समय खो चुके होते हैं और अपनों से बहुत दूर जा चुके होते हैं। चर्चा में देर से शामिल होने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।

    जवाब देंहटाएं

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