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सोमवार, 15 मई 2017

668....क़दमों को मां के इश्क़ ने सर पे उठा लिया

सादर अभिवादन
कल मातृ-दिवस मनाया गया धूम-धाम से
आज प्रस्तुत है कल माँ पर लिखी रचनाएँ..

बेटी तो जननी सृष्टि की, 
बेटी पर टिका है जगतसार । 
बेटी तो माँ बहन बनी है, 
क्यों न समझे इनके अधिकार ।। 

वो खूबसूरत से दो हाथ, वो कोमल से दो पाँव,
वो ऊँगलियों पर बसा मेंहदी का इक छोटा सा गाँव,
है वो इक धूप की सुनहरी सी झिलमिल झलक,
या है वो लताओं से लिपटी, बरगद की घनेरी सी छाँव...

माँ…माँ संवेदना है, भावना है अहसास है
माँ…माँ-माँ संवेदना है, भावना है अहसास है
माँ…माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है,
माँ…माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है,
माँ…माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है,

जब मैं  तेरी कोख में आई
तूने स्पर्श से बताया था
ममता का कोई मोल नहीं
तूने ही सिखलाया था ।
माँ तुझे प्रणाम ।

जब-जब मुझको हिंचकी आती
तब याद माँ तेरी थपकी आती
जब तपती धूप सिर पर छाई
तेरे आँचल की ठंडक याद आई
ठोकर से कदम लड़खड़ाने लगे
तेरी बाँहों के घेरे याद आने लगे

बहुत ख़ुशनसीब होते हैं वो लोग, जिनकी मां उनके पास होती है...बहुत ख़ुशनसीब होते हैं वो लोग, जिनके साथ उनकी मां की दुआएं होती हैं...बहुत ख़ुशनसीब होते हैं वो लोग, जो दूसरों की मां की भी इज़्ज़त करते हैं, और उनसे दुआएं पाते हैं...
क़दमों को मां के इश्क़ ने सर पे उठा लिया
साअत सईद दोश पे फ़िरदौस आ गई...

बरतन-बासन मलती माँ
चूल्‍हा-चौका- करती माँ
सांझ ढले फूंक-फूंक कर 
लकड़ी के चूल्‍हे सुलगाती माँ

कुछ दिल में अरमान हैं ।
मैं भी कुछ करूँ ...।
यूँ ही न मरुँ ...।
दुनियां अपनी करूँ ।।
चंद सांसें मुझे भी ,
जी लेने दे ...मेरी माँ !

आज्ञा दें दिग्विजय को..
सादर












10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह..
    एक की विषय की रचनाएँ
    एक ही अंक में
    सादर नमन

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बहुत शुक्रिया ।।।।।
    मातृ-दिवस मची धूम-धाम से संकलित आपके पसंद की माँ पर लिखी ये रचनाएँ..सर्वोत्तम लगीं।

    जवाब देंहटाएं
  3. मातृ-दिवस की रचनाएँ प्रस्तुति हेतु धन्यवाद !

    जवाब देंहटाएं
  4. एक बढकर एक, सभी रचनायें मनमोहक

    जवाब देंहटाएं
  5. तार्किक संकलन एवं ज्ञानवर्धक। आभार

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर रचनाएँ । मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार ।

    जवाब देंहटाएं

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