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शनिवार, 14 जनवरी 2017

547..... खिचड़ी



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सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

अरवा चावल ,तील ,गुड़ ,अदरक
मिश्रण प्रसाद में खिलाते रिश्ते उपचारक

दही-चुडा ,लाई ,तिलकुट के संग
मनाते भी हैं और हम आज खाते भी हैं 
















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पतंग



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मकर संक्रांति की असीम शुभकामनायें



फिर मिलेंगे ... तब तक के लिए

आखरी सलाम


विभा रानी श्रीवास्तव





7 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात मेरी बड़ी दीदी
    सादर नमन
    भटे का भरता
    तिल की पापड़ी
    खिचड़ी
    और पतंग
    गहरा नाता है इन तीनों मैं
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात
    सादर प्रणाम
    मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर मकर संक्रान्ति प्र्स्तुति। पर्व की सभी को शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर मकर संक्रान्ति युक्त हलचल प्रस्तुति
    सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!

    जवाब देंहटाएं
  5. आदरणीय आरती शुभ दोपहर बहुत सुंदर मकर संक्रांति पर सुंदर प्रस्तुति आभार आपका

    जवाब देंहटाएं
  6. " ओ काले मेघ खुलकर बरस जा ......
    तेरे अपनों पर थोडा तो तरस खा
    सभी तेरे न बरसने से परेशान है .....
    इस बात से अन्नदाता भी हैरान है ....
    किसानो की जमीन दुसरो के कब्जे में है ....
    इस बात से ना जाने कितने परिवार सदमे में है ....
    कोमल से हाथो वाली बिटिया रानी
    हस्ते खेलते हुई अब सायानी है ...
    तेरा बरसना सभी के लिए वरदान है .....
    तुझपे ही आश्रित ना जाने कितने बागबान है ....
    प्यासी - पथराई आँखे आस लगाये है ....
    दिल में उम्मीदों के दिए जलाये है ....
    बस अब तु यू ना सता
    काले मेघ खुलकर बरस जा .....

    जवाब देंहटाएं

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