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मंगलवार, 3 मई 2016

291...ये रिश्ते ,ये जिंदगी ........

जय मां हाटेशवरी...

अब आनंद का ये सफर...
अपने 300 अंक पूरे करने ही  वाला है....
डर हमे  भी लगा था  फासला देख कर,
पर हम बढ़ते गये रास्ता देख कर,
खुद ब खुद हमारे  नजदीक आती गई,
हमारी  मंजिल हमारा  हौंसला देख कर |
अब पेश है...
आज की चयनित कड़ियां...

ये रिश्ते ,ये जिंदगी ........
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हर रिश्ते की
अपनी सीमा है
और अपनी ही गरिमा भी
तब भी  ....
कैसी तो चाहतें
जन्म लेती हैं
और
तोड़ती भी है दम
गीत "हो चुकी अब बन्दगी
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गुन-गुनायेगा कड़ी, जब कोई मेरे गीत की,
फिर कोई गुलशन खिलेगा, जी उठेगी जिन्दगी।
बाँध लो बिस्तर जहाँ से, हो चुकी अब बन्दगी।।
हर किसी की जिन्दगी है, बस अधूरी जिन्दगी।
बाँध लो बिस्तर जहाँ से, हो चुकी अब बन्दगी।।
 कैसी ये तक़दीर...
छोटी-छोटी ऊँगलियों में
चुभती है हुनर की पीर
बेपरवाह दुनिया में
सब ग़रीब सब अमीर
आख़िर हारी आज़ादी
बँध गई मन में ज़ंजीर

एक मजदूर होने का दर्द
सर वो जब लगातार ओवर टाइम्स करते रहने में भूख लगता है और नींद आने लगता है तो लिक्विड अमोनिया को रुई के फाहे में डूबा कर उसको सूंघ लेते है तो भूख और नींद
दोनों थोड़ी देर के लिए खत्म हो जाती है।
अरे यार तुम पागल हो क्या अरे वो केमिकल है नुकसान करता है तुम कैसे आदमी हो जो ये सब करते हो।
डरते डरते उसने कहा कि सर आप बोले थे कि गुस्सा नही करेंगे!
मुझे एक पल के लिए लगा कि इस बन्दे को कोई बड़ी परेशानी जरूर है तभी ये ऐसा काम कर रहा है। मुझे इसकी बात सुननी चाहिए।

स्व॰ सत्यजित रे जी की ९५ वीं जयंती
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फ़िल्मों में मिली सफलता से राय का पारिवारिक जीवन में अधिक परिवर्तन नहीं आया। वे अपनी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ही एक किराए के मकान में रहते
रहे। १९६० के दशक में राय ने जापान की यात्रा की और वहाँ जाने-माने फिल्म निर्देशक अकीरा कुरोसावा से मिले। भारत में भी वे अक्सर शहर के भागम-भाग वाले माहौल
से बचने के लिए दार्जीलिंग या पुरी जैसी जगहों पर जाकर एकान्त में कथानक पूरे करते थे।
राय की कृतियों को मानवता और समष्टि से ओत-प्रोत कहा गया है। इनमें बाहरी सरलता के पीछे अक्सर गहरी जटिलता छिपी होती है। इनकी कृतियों को अन्यान्य शब्दों में
सराहा गया है। अकिरा कुरोसावा ने कहा, “राय का सिनेमा न देखना इस जगत में सूर्य या चन्द्रमा को देखे बिना रहने के समान है।” आलोचकों ने इनकी कृतियों को अन्य
कई कलाकारों से तुलना की है — आंतोन चेखव, ज़ाँ रन्वार, वित्तोरियो दे सिका, हावर्ड हॉक्स, मोत्सार्ट, यहाँ तक कि शेक्सपियर के समतुल्य पाया गया है।



आज के पांच लिंक पूरे हुए...
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