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गुरुवार, 24 सितंबर 2026

4875 ...देवत्व से भरता है मन मुंद जाते हैं स्वतः नयन

 सादर अभिवादन

नियमित लेखक के कदम डगमगा गए हैं
हम लोग भी तरस गए है
आधे रील की ओर, 
और, बचे खुचे यू-ट्यूब की ओर
और फिर जो बचा वे जेब से दाम खर्च 
कर पुस्तकें छपवा रहे हैं , तथा 
लोग समीक्षा लिखवा कर हमें झेलने पर मजबूर कर रहे है

  
तरसते तो हम भी हैं, पढ़ने को 
पर रचनाओं का तो टोटा पड़ा है

देखिए रचनाएं....



‘राजघरानों में आधे संकट दुस्साहस से पैदा होते हैं, आधे भीरुता से‘ ... ‘रूढ़िग्रस्तता का भी अपना अर्थशास्त्र और मूर्खता का भी अपना तर्कशास्त्र होता है।‘ ... राजा अपने लिए राज्य नहीं करता। राष्ट्रहित के लिए ही वह शासन करता है। राष्ट्रहित से ही राजा मित्रों और शत्रुओं का निश्चय करता है और यह मैत्री और शत्रुता भी स्थायी नहीं होती, प्रासंगिक होती है। ... राज परिवारों में अभिधा से अधिक व्यंजना ही समझ में आती है। यदि कोई बात सहज ढंग से कही गई हो तो भी वे उसमें से व्यंजना की खोज करके ही दम लेते हैं। ... राजनय और व्यक्तिगत गुणों के संदर्भ में लक्ष्मण का विचार है कि अनन्यता और आत्मीयता स्थापित करना राम की शक्ति है। और राम कहते हैं- ‘यदि कोई व्यक्ति या प्राणी तुम्हारे मन में घृणा पैदा करने में सफल हो गया तो समझो, वह जीत गया, तुम हार गए।‘ 






मैं मशीन से आदमी होने को छटपटा रहा हूॅं।
पता नहीं किस किस के सम्पर्क में खटखटा रहा हूॅं।
पिछले कुछ दिन बीत गये हैं लोगों की इच्छा पर चलते,
अपनी इच्छा पर सवार होना क्या कोई सरल काम है?





देह की आतुरता में
बिना वजह भटकता है मन

प्रेम के दो सोपानों में
युग के सांस लेता है मन

जीवन के इन असाध्य
ध्वनियों पर सुर साधता है मन





सूरज की आंख में आँख डाल 
जब करती हूँ मंत्रोच्चार 
ॐ मित्राय नमः 
ॐ रवये नमः 
ॐ सूर्याय नमः…
देवत्व से भरता है मन 
मुंद जाते हैं स्वतः नयन
सहसा ललाट पर देखती हूँ 






संडे को झंडे
मंडे को डंडे
देश के फ्यूचर का
ऐसा है रन-वे

क्रिकेट देखो
नेटफ़्लिक्स देखो
समय बचे तो
हर-हर गंगे

सादर समर्पित
वंदन

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात!! रोचक भूमिका और सुंदर सूत्रों का संकलन

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत द‍िनों बाद यहां आना हुआ...सभी पोस्ट बेहद शानदार ...उत्कृष्ट लेखन को एक ही प्लेटफॉर्म पर पढ़वाने के ल‍िए धन्यवाद द‍िग्व‍िजय जी...प्रणाम

    जवाब देंहटाएं

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